ताजा खबर
छतीसगढ़ में जोगी की जमीन खिसकी ! कांग्रेस की सरकार बनने का इंतजार ! एमपी में कहीं बागी न बिगाड़ दें खेल नोटबंदी ने तो अर्थव्यवस्था का बाजा बजा दिया
पांचवी अनुसूची का मुद्दा बना गले की फांस!

पूजा सिंह

भोपाल. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से ऐन पहले संविधान की पांचवी अनुसूची का मुद्दा गरमाया हुआ है. जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) की सक्रियता के कारण प्रमुख राजनीतिक दलों में घबराहट की स्थिति बन गयी है. प्रदेश की करीब 80 से अधिक विधानसभा सीटों पर आदिवासी समुदाय ताकतवर स्थिति में है. 47 सीटें तो सीधे तौर पर आरक्षित हैं.
आदिवासी संगठनों की मांग है कि उनकी सुरक्षा, संरक्षण और विकास से जुड़ी पांचवी अनुसूची को तत्काल पूरी तरह लागू किया जाये. जानकारों के मुताबिक पांचवी अनुसूची में आदिवासी समुदाय के संपूर्ण संरक्षण की बात शामिल है. इसमें उनके रीति-रिवाज, परंपराएं आदि सभी शामिल हैं. उनका यह भी कहना है कि विकास कार्यों तथा रोजगार के संकट की वजह से आदिवासियों का निरंतर विस्थापन हो रहा है. विस्थापन की समस्याओं के कारण उनकी विशिष्टताएं समाप्त हो रही हैं. अगर सरकार पांचवी अनुसूची को पूरी तरह लागू करती है तो उनकी समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो जायेंगी.
 
वहीं आदिवासी संगठन जयस के प्रमुख डॉ. हीरा अलावा कहते हैं कि मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदाय को पांचवी अनुसूची के अधीन जो अधिकार मिलने चाहिये वे नहीं मिल रहे हैं. आदिवासी समाज इन्हें हासिल करने के लिए राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए कमर कस चुका है.
 
पांचवी अनुसूची में देश के 10 राज्य शामिल हैं. इन राज्यों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी हैं जहां आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव होने हैं. वहीं छठी अनुसूची पूर्वोत्तर के राज्यों में लागू है.अलावा पहले ही यह ऐलान कर चुके हैं कि भाजपा को हराना उनकी प्राथमिकता है. अगर कोई अन्य दल उनका समर्थन चाहता है तो उसे आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने का वादा करना होगा. जयस ने हाल ही में आदिवासी अधिकार यात्रा भी निकाली थी जिसे प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों में व्यापक जनसमर्थन मिला था.
 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
Post your comments
Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.