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जन आंदोलन का चेहरा हैं मेधा पाटकर

सुनीलम 

नई दिल्ली .आज एक दिसंबर को मेधा पाटकर का जन्मदिन है ,हम सब मेधा पाटकर के स्वास्थ्य और दीर्घायु होने की कामना करते है.मेधा पाटकर  ने नर्मदा घाटी में 30 से अधिक वर्ष रहकर सबसे लंबा अहिंसक नर्मदा बचाओ आंदोलन को चलाने का इतिहास रचा है.देश और दुनिया में वे देश के जनांदोलनों का चेहरा बन चुकी है.सरदार सरोवर परियोजना से विश्व बैंक को खदेडना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है.अंग्रेजों के भूमि अधिग्रहण कानून को बदलवाने में मेधा पाटकर  की भूमिका अग्रणीय रही है।देश को विकास वैकल्पिक नीतियों की जरूरत है यह देश में उन्होंने स्थापित किया है.
दिन रात लगातार पढ़ना लिखना ,बोलना ,यात्राएं करना कोई छोटी बात नहीं है. हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपने केस स्वयं लड़ती है.अन्ना आन्दोलन से लेकर किसान आंदोलन तक मेधा पाटकर  की भागीदारी उल्लेखनीय है.जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय और नशा भारत आन्दोलन का नेतृत्व करते हुए उन्होंने देश की यात्राएं की हैं.सामाजिक आंदोलन में रहते हुए उन्हें समाज ,सरकार ,पार्टियों के बीच जबरजस्त सम्मान प्राप्त है.किसान संघर्ष समिति ,समाजवादी समागम ,राष्ट्र सेवा दल ,हिन्द मज़दूर सभा ,डॉ लोहिया समता आदिवासी केंद्र ,अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के सभी साथियों की और से हार्दिक बधाई.
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