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और पुलिस की कहानी में झोल ही झोल !
अंबरीश कुमार 
रायपुर .छतीसगढ़ की राजधानी में कल से बहुत से पत्रकारों ,नेताओं और अफसरों से मुलाकात हुई . सीडी मामले को लेकर सभी का कहना था था यह अप्रत्याशित नहीं है .महीनों से इसके बाहर आने की चर्चा हो रही थी .ख़ास बात यह है कि इस मामले में एक नहीं और भी कई नेता है .देर सबेर वे भी चर्चा में आ सकते हैं .ठीक गुजरात चुनाव से पहले इस विवाद का सामने आना सत्तारूढ़ दल को सांसत में डालने वाला है .हालांकि  पहले भी सीडी को लेकर भाजपा संघ के नेता विवाद के दायरे में आ चुके हैं .संजय जोशी वाला विवाद आज भी लोगों को याद है .मध्य प्रदेश के भी एक नेता चर्चित रहे हैं .पर इस बार कुछ बड़े लोगों ने मामले को दबाने के लिए जिस तरह आनन फानन में छतीसगढ़ पुलिस को बिना नाम की शिकायत के आधार पर बारह घंटे के भीतर जहाज से पुलिस को दिल्ली भेज गाजियाबाद तक पहुंचाया वह हैरान करने वाला है .पुलिसिया कहानी में झोल ही झोल है .राजस्थान पत्रिका ने आज समूचा एक पेज ही इस मामले पर समर्पित कर दिया है .जिसमे एक नहीं कई सवाल उठाए गए हैं .कल दोपहर तक रायपुर के ज्यादातर संपादकों और पत्रकारों को सीडी मुहैया कराई जा चुकी थी .हैरान तो लोग इस बात पर हैं कि पुलिस से लेकर नेता तक सीडी के कंटेंट के बारे में कोई बात न कर सारा ठीकरा एक पत्रकार के सर फोड़ने की कवायद में जुटे हैं .
दरअसल यह मामला रायपुर पुलिस की अतिरिक्त तत्परता के चलते ही ज्यादा चर्चा में आया .जो पुलिस जल्दी कोई मामला तक न दर्ज करती वह किसी  ' आका ' के नाम पर हवाई जहाज से लव लश्कर के साथ दिल्ली पहुंच जाए क्या यह हैरान नहीं करता ? वह पुलिस जो संसाधनों का रोना रोती हो वह अचानक कैसे इतना पैसा खर्च कर तत्परता से मामले की तफ्तीश में जुट गई यह अटपटा नहीं लगता .करीब दो दशक से छतीसगढ़ और इसकी पुलिस के कामकाज को देख रहा हूं ,किसी भी अनाम मामले में दस घंटे के भीतर जहाज से तफ्तीश करने पुलिस चली गई हो ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता .कौन था यह  ;'आका ' और कौन था वह  'काका ' जिसने पुलिस को इतना मुस्तैद कर दिया .दूसरे कोई भी पत्रकार अगर सीडी रखे तो आखिर कितनी सीडी घर में रखेगा ,क्या ट्रक भर सीडी कोई घर में रखेगा ? रायपुर में तो हजारों लोगों तक सोशल मीडिया खासकर व्हाटशप से लोगों को सीडी की क्लिपिंग भेजी जा चुकी है .और पुलिस गाजियाबाद सीडी का जखीरा पकड़ने जा रही है उस पत्रकार के घर जिसका शिकायत में नाम ही नहीं था .रोचक यह है कि पत्रकार के खिलाफ एफआईआर उस पत्रकार की गिरफ्तारी के बारह घंटे बाद दर्ज कराई जाती है .
इस विवाद में जो सीडी है उसके बारे में कोई चर्चा नहीं कर रहा .छतीसगढ़ के एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा ,इस तरह की कई सीडी चर्चा में है .इनमे सत्तारूढ़ के कई नेता है .जो पार्टी ज्ञान ,शील और एकता जैसे नारे के साथ अपने कार्यकर्त्ता तैयार करती हो .चाल ,चरित्र और चेहरा की बात करती हो उस पार्टी के कई नेताओं के बारे जब इस तरह की चर्चा होने लगे तो पार्टी के शीर्ष नेताओं को सचेत हो जाना चाहिए .छतीसगढ़ पर रामनामी समाज  का प्रभाव है ,सतनामी समाज का प्रभाव है तो कबीरपंथियों का भी प्रभाव है .ऐसे में इस तरह का विवाद भाजपा के लिए संकट पैदा कर सकता है जो पार्टी जल्द ही विधान सभा चुनाव की तैयारी में जुटने वाली है .
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