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यह शाही फरमान है ,कोई बिल नहीं !

अंबरीश कुमार 

राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार का विवादित बिल अंततः कचरे की टोकरी में ही जाएगा पर भाजपा की ठीक से फजीहत कराने के बाद ही .यह किसी चुनी हुई सरकार का बिल तो लगता नहीं बल्कि राजशाही के दौर का शाही फरमान जैसा नजर आता है .महारानी का जो अंदाज है उससे लगता भी यही है कि उन्होंने कोई शाही फरमान जारी कर दिया है .महारानी की सरकार पहले से ही विवादित है .वैसे भी देश की सबसे अलोकप्रिय राज्य सरकारों में राजस्थान की सरकार भी शामिल है जो अपने कामकाज के चलते बदनाम हो रही है .राजस्थान का दौरा कर लौटे उत्तर प्रदेश के एक आला अफसर ने बताया कि लोग अब अशोक गहलौत और उनकी स्वास्थ्य ,शिक्षा से संबंधित योजनाओं को याद कर रहे हैं .जब खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सरकार के मंत्री विधायक इस कथित बिल के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हों तो पार्टी का रुख भी समझा जा सकता है .वैसे महारानी ने समय भी खूब चुना है इस विवाद को राष्ट्रीय फलक पर चर्चा में लाने के लिए .प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात बचाने के लिए जब सारे घोड़े खोल चुके हो तो उस वक्त महारानी ने भी एक पत्थर तो जोर से उछाल ही दिया है .यह अंततः मोदी के ही खाते में जाने वाला है .ठीक उसी तरह जैसे मध्य प्रदेश का व्यापम हो या छतीसगढ़ का अनाज घोटाला .या फिर अन्य भाजपा सरकारों का कारनामा .यह सब मोदी के ही बहीखाता में दर्ज होता जा रहा है .भाजपा के नेता तो वसुंधरा राजे सरकार के इस फैसले के समय को लेकर हैरान है ही विपक्षी भी नहीं समझ पा रहे हैं .जिस तरह इस विवादित बिल को ड्राफ्ट किया गया है और जिस तरह मीडिया के पर कतरने वाले प्रावधान इसमें डाले गए हैं उससे यह सर्वोच्च न्यायलय में टिकने वाला भी नहीं है .यह संविधान विरोधी भी है .
हम इसे कहीं से भी कोई बिल जैसा नहीं मानते बल्कि राजशाही के दौर का शाही फरमान ही मानते है .जब कांग्रेस का बिहार प्रेस बिल नहीं टिका उस दौर में तो यह दौर तो सब कुछ लिख डालने का है .इसका श्रेय भी मोदी को ही जाता है .मोदी ने सोशल मीडिया में एक सेना खड़ी  की कांग्रेस और अन्य विरोधियों से निपटने के लिए .जो सबकुछ लिख डालती थी .संसदीय हो या असंसदीय .कोई फर्क नहीं पड़ता .किस्सा गढ़ना हो या फर्जी फोटो शाप का करतब दिखाना हो .यह साइबर सेना सब कुछ कर रही थी ,और आज भी कर रही है .वे इज्जत घर बनवाते है और ये साइबर सेना ' इज्जत ' उतारती है .भाषा भी ऐसी कि मोहल्ले के बदनाम और लंपट मवाली भी शर्मा जाएं .एक तरफ ऐसा खुला हुआ समाज अपने साहब बना रहे हों तो दूसरी तरफ महारानी खबर पर ही रोक लगवा दे ,यह हैरान करने वाला है .पर यह इस दौर में संभव ही नहीं है .आप राज्य में रोक लगाएंगे तो दूसरे राज्य में लोग लिख डालेंगे .इसलिए इस तरह का कोई कानून चल पाए यह संभव ही नहीं है .मीडिया का विरोध तो बाद की बात है ,पहले तो पार्टी ही विरोध में खड़ी हो गई है .राजस्थान में सत्ता के खिलाफ सत्तारूढ़ दल की बगावत से ही साफ़ है यह विवादित शाही फरमान अंततः कचरे के ढेर में ही जाएगा .इसलिए निश्चिंत रहे .महारानी सिर्फ मोदी की छवि को ही ध्वस्त कर रही हैं और कुछ नहीं .
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