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छोटी नदियां सुधरें, तभी बचेगी गंगा

अंबरीश कुमार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'स्वच्छ गंगा अभियान' के तहत गुरुवार को उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की, जिनसे होकर गंगा बहती है। सरकार ने गंगा सफाई के लिए एक रोडमैप तैयार करने का फैसला किया है, जिस पर इन मुख्यमंत्रियों से सहयोग लिया जा रहा है। राज्यों को इस अभियान में शामिल करने का विचार महत्वपूर्ण है। देखना है, इसमें किन मुख्यमंत्रियों का कितना सहयोग मिल पाता है। दरअसल गंगा की सफाई के कई पहलू हैं। इस मामले में सिर्फ मैक्रो लेवल पर ही नहीं, माइक्रो लेवल पर भी देखने की जरूरत है। जैसे, गंगा में मिलने वाली छोटी-छोटी नदियां गंगा पर सीधा असर डालती हैं। गंगा के स्वच्छता अभियान में उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
 
वरुणा और असि
 
काशी में गंगा से पहले शहर से गुजरने वाली दो छोटी नदियों की सफाई जरूरी है। पुराणों में काशी क्षेत्र के उत्तर में वरुणा, पूर्व में गंगा और दक्षिण में असि का उल्लेख है। किसी दौर में प्राकृतिक संपदा से भरपूर ये तीनों नदियां काशी को काशी बनाती थीं। अब इनमें से एक 'असि नदी' कहीं से भी नदी नहीं बची है। यह पूरी तरह गंदे नाले में बदल चुकी है और रेकॉर्ड में भी इसे नाला ही माना जा रहा है। खादर के इलाके में कब्जा कर मोहल्ले बस चुके हैं और मुख्य धारा सीवेज बन गई है। मोहल्लों का सारा कूड़ा-कचरा ले जाकर यह गंगा को सौंप देती है। पुराणों में इसको शुष्का नदी के नाम से भी जाना जाता रहा है।
 
दूसरी नदी है वरुणा। (वरुणा और असि को मिला कर ही वाराणसी नाम प्रचलित हुआ, ऐसी मान्यता है।) इस नदी का प्राकृतिक स्रोत इलाहाबाद की फूलपुर तहसील में मेलहम गांव का तालाब है। वहां से निकल कर यह नदी करीब 110 किमी की यात्रा पूरी करती हुई संत रविदास नगर, भदोही और जौनपुर की सीमा बनाती है और काशी पहुंच कर राजघाट के पास गंगा से मिल जाती है। लेकिन यह संगम करीब डेढ़ दर्जन नालों का जहरीला पानी लेकर आने के बाद होता है। इतनी कम दूरी में भी नदी बदहाल हो जाती है। शहर के तमाम सीवरों और ड्रेनेज का अनट्रीटेड कचरा इसमें बहाया जाता है।
 
गंगा जिन बड़े शहरों से निकलती है उनमें कानपुर तो अपना जहरीला कचरा डालने के लिए शुरू से ही बदनाम है, खासकर टैनरी का कचरा, जो बहुत ही विषैला होता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि दूसरी जगहों पर गंगा को साफ छोड़ दिया गया हो। गंगोत्री से कुछ ही नीचे आने के बाद भागीरथी की दुर्गति शुरू हो जाती है। अत्याधुनिक शहर बना नया टिहरी अपने शहर का नाला इसी में बहाता है। ऋषिकेश से लेकर हरिद्वार तक साधु-संतों के बड़े-बड़े आश्रम भी इसे गंदा करने में अपना पूरा योगदान देते हैं।
 
भूजल और अन्य नदियों का पानी भी जगह-जगह गंगा में मिलता है और कहीं-कहीं ज्यादा पानी होने की वजह से यह कुछ साफ भी दिखती है। पर काशी आते-आते गंगा कितनी गंगा बचती है यह शोध का विषय है क्योंकि इसमें बड़ी जलराशि दूसरी नदियों की होती है। खैर, मुद्दा यह है कि अगर छोटी-छोटी नदियों को हम नहीं बचाएंगे तो गंगा भी नहीं बचेगी। बड़ी नदियों को बचाए रखने में छोटी-छोटी नदियों की बड़ी भूमिका है। ये बड़ी नदियों को समृद्ध करती हैं। एक बड़ा उदाहरण है इटावा के आगे पंचनदा का, जहां साफ पानी वाली चंबल यमुना के गंदे पानी से मिलकर प्रदूषित हो जाती है, मगर दूसरी तरफ यमुना का प्रदूषण कुछ कम भी हो जाता है। चंबल इसलिए प्रदूषण से बची रहती है क्योंकि किसी बड़े औद्योगिक शहर के बगल से वह नहीं गुजरती।
 
उत्तराखंड से लगे रामपुर से निकलने वाली नदियों को लें। घूघा, बहल्ला, सैंजनी, भाखड़ा आदि नदियां यहां से निकलती हैं और कोसी में मिल जाती हैं, फिर कोसी आगे चलकर शाहबाद क्षेत्र में रामगंगा में मिल जाती है। रामगंगा आगे चलकर कन्नौज में गंगा में मिल जाती है। कोसी में उत्तराखंड की फैक्ट्रियों का कचरा डाला जाता है, जिससे यह काली हो चुकी है। भाखड़ा नहर पूरे बिलासपुर की गंदगी समेटती है, जिससे वह भी प्रदूषित हो चुकी है। इसी तरह बिहार में कई छोटी-छोटी नदियां हैं, जो गंगा में मिलती हैं। इनमें हाजीपुर क्षेत्र की वन गंगा (बाली) प्रमुख है, जो काफी प्रदूषित हो चुकी है।
 
नदियों का दोहन
 
दरअसल, सालों से हम नदियों का इस्तेमाल सीवेज सिस्टम की निकासी के तौर पर करते आ रहे हैं। राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक नहीं कई फैसले गंगा को लेकर आ चुके हैं, जिसमें कहा गया है कि चीनी मिलें और अन्य उद्योग-धंधे अपना रासायनिक कचरा नदियों में बहा रहे हैं, जिससे गंगा प्रदूषित हो रही है। पर इस सबके बावजूद कोई ठोस पहल नहीं दिखती। वर्तमान सरकार सिद्धांत रूप में इस बात को मानती है कि छोटी नदियों की सफाई भी जरूरी है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने पिछले साल कहा था कि सरकार छोटी नदियों की सफाई करेगी। पर इस बारे में स्पष्ट नीति क्या है, यह अभी पता नहीं चल पाया है। उम्मीद है कि गंगा के साथ-साथ सहायक नदियों की सफाई की भी एक ठोस नीति अमल में लाई जाएगी।साभार नवभारत टाइम्स 
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