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एक और मोर्चा खोलेंगे दादरी के किसान

 अम्बरीश कुमार 

लखनऊ ,दिसम्बर । दादरी के किसान अभी एक मोर्चा और खोलेंगे । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किसानो को जमीन वापस करने के साथ उसके बदले मिला पैसा वापस करने की भी बात कही है ।जबकि ज्यादातर  किसान की जमीन गई और उनके  जीवन यापन का जरिया भी छिन गया था दूसरी तरफ  पुरा मुआवजा भी नहीं मिला  ।  दादरी के करीब दस फीसदी किसान ऐसे है जिनकी खेती बंद हो गई और एक पैसा भी मुआवजा नहीं मिला । जिन्हें मिला भी तो  कौड़ियों के भाव और १८ फीसदी घूस देने के बाद ।  पचास फीसदी किसानो को आंशिक भुगतान हुआ । ऐसे दादरी के किसान न सिर्फ हर्जाने की मांग करेंगे बल्कि किस्तो में भुगतान की भी मांग करेंगे  । किसान मंच से जुड़े किसानो ने यह जानकारी दी ।किसान एक तरफ तो विजय दिवस की तैयारी करेंगे तो  दूसरी तरफ मुआवजे को लेकर उतार प्रदेश सरकार से गुहार लगाने के लिए लखनऊ में भी मार्च कर सकते है ।  कल के फैसले के बाद किसानो का हौंसला बुलंद है  । पर एक किसान बाबू सिंह के लिए यह फैसला काल बन गया जिन्हें यह जानकारी मिलने के बाद दिल का दौरा पड़ा और बच नहीं पाए । बाबू सिंह की भी जमीन दादरी परियोजना की भेंट चढ़ गई थी और वे मुफलिसी के दौर से गुजर रहे थे ,जमीन वापस मिलने की खबर वह बर्दाश्त नहीं कर पाए। 
दादरी में १३ दिसंबर को होने वाली पंचायत में किसान जमीन के बदले मिले पैसे की वापसी के तरीके पर भी फैसला करेंगे । ककराना के शिव कुमार ने कहा -हम तो हर्जाना देने की बात करेंगे ।किसान की जमीन छिन गई और खेती बाड़ी  बंद हो गई ।आन्दोलन चला तो पुलिस ने दमन अलग किया मुआवजे के लिए सरकारी अफसरों ने घूस भी ली।किसान के पास बचा क्या जो माँगा जा रहा है ,सरकार को तो मुआवजा देना चाहिए  । किसान मंच के संयोजक विनोद सिंह ने कहा -फैसला तो सब पंचायत में ही होगा पर दादरी के किसान जो सवाल उठा रहे है वह महत्वपूर्ण है।किसानो से २५०० एकड़ जमीन ली गई जिसमे २०००  एकड़ जमीन दो से तीन फसली थी जिस पर पांच साल से खेती बंद है ,छुटपुट अपवाद अलग है। बाकि ५०० एकड़ जमीन आबादी की थी ,ऐसे में किसान एक मुश्त  पैसा कैसे दे सकता है ।  फिर पचास फीसदी किसानो को आंशिक भुगतान  हुआ और दस फीसदी किसानो को तो एक पैसा नहीं मिला है  ।इसलिए किसानो के मामले में सरकार को लचीला रवैय्या अपनाना चाहिए  । 
दादरी के किसान युधिस्ठिर  सिसोदिया ने कहा -अभी तो एक मोर्चा और खोलना होगा वरना किसान जित कर भी हार जाएगा   । पर इस बार फर्क यह होगा की जीत 
 के बाद किसानो को हर तरफ से समर्थन मिल रहा है । वरना तो नेता भी मुंह मोड़ रहे थे  ।किसान जब  भाजपा के शीर्ष नेता राजनाथ सिंह से मदद मांगने गए तो उन्होंने  कहा था -मुझे पूरा देश देखना है आप लोगो के एक जिले के  लिए मै अनिल अंबानी से  टकराव नहीं मोल लूँगा ,आप लोग जा सकते है  । इसके बाद दादरी के किसान वीपी सिंह के पास गए थे ।  पर अब कई राजनैतिक दलों ने साथ देनो को कहा है । 
दरअसल जब दादरी आंदोलन चल  रहा था तो समाजवादी पार्टी के नेताओं के निशाने पर वीपी सिंह थे ।जब वीपी ने दादरी में हल चलने का एलान किया तो यह भी सवाल उठाया गया की वीपी सिंह का किसानो से क्या लेना देना । इसपर तब वीपी सिंह ने जवाब दिया था -मै किसान का बेटा नहीं रहा पर किसी पूंजीपति का हरवाहा भी नहीं हूँ   । इशारा साफ था। इसी  दादरी आंदोलन के बाद किसान मंच ने विदर्भ में मोर्चा खोला जँहा अब कपास किसानो को लेकर आंदोलन की तयारी हो रही है  । इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले की खुशियाँ यवतमाल से लेकर अकोला तक में मनाई  गई । भूमि अधिग्रहण के सवाल पर किसान मंच की रैली में जंतर मंतर पर विदर्भ के भी किसान जुटे थे  । 
 
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