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गोरखपुर का मजदूर आन्दोलन

 गोरखपुर के मजदूर आन्दोलन के खिलाफ कुछ कारखानेदारों और हिन्दूवादी शक्तियों द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार पर गोरखपुर के बुद्धिजीवी समाज, वाम, लोकतांत्रिक व मानवाधिकार संगठनों ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रविवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभागार में हाल में गठित श्रमिक अधिकार समर्थक समिति की ओर से आयोजित गोष्ठी में बड़ी संख्या में लेखकों, कवियों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। गोष्ठी में कहा गया कि अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे मजदूरों के आन्दोलन को नक्सली और माओवादी कहने के साथ ही इसे गोरखपुर में औद्योगिक अशांति उत्पन्न करने वाला और विकास में बाधक बताने के दुष्प्रचार का करारा जवाब दिया जाएगा और जरूरत पड़ी तो मजदूरांे के साथ सड़क पर उतर कर संघर्ष भी किया जाएगा।

गोष्ठी मे पीयूसीएल के संयोजक फतेहबहादुर सिंह, गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रो अनन्त मिश्र, प्रो जर्नादन, प्रो रजवन्त राव, डा अनिल राय, डा रजनीकान्त पाण्डेय, वरिष्ठ कथाकार मदन मोहन, पीयूएचआर के मनोज सिंह, सीपीएम के जिला सचिव जावेद, सीपीआई के जिला सचिव ओमप्रकाश चन्द, भाकपा माले नेता हरिद्वार प्रसाद, मेडिकल रिप्रजेन्टेटिव एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव, दमन विरोधी मंच के संयोजक डा असीम सत्येदव, जलेस के प्रमोद कुमार, रेल मजदूर नेता मुक्तेश्वर राय, डा चतुरानन ओझा, डा रामू सिद्धार्थ, चक्रपाणि, स्वदेश, जद यू के अयोध्या साहनी, राजाराम चैधरी, डा संध्या पाण्डेय, मजदूर नेता रमाकांत पाण्डेय आदि उपस्थित थे। गोष्ठी में गोरखपुर के बरगदवा क्षेत्र में मजदूर आन्दोलन की अगुवाई करने वाले तपिश मैंदोला ने आन्दोलन के बारे में विस्तृत रूप से बताया। इसके बाद लोगों ने अपनी बातें रखीं। वक्ताओं ने कहा कि तथाकथित उद्योग बचाओ समिति की ओर से अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर यहां के मजदूर आन्दोलन के बारे में  प्रचार किया गया हैं। इसके पहले यहां के सांसद योगी आदित्यनाथ मजदूर आन्दोलन को माओवादी और नक्सली बताकर प्रशासन से इसके दमन करने के लिए दबाव बना चुके है। इन लोगों के दुष्प्रचार और दबाव के कारण ही प्रशासन ने मजदूर नेताओं को गिरफतार किया और तीन थानांे में फिरौती, वसूली जैसे गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज किए। आन्दोलन के तीव्र होने और नागरिक समाज के आगे आने के कारण मजदूर नेता तो रिहा हो गए लेकिन एक कारखानेदार जो कि कांग्रेस के नेता हैं और यहां के मेयर रह चुके हैं, ने समझौते का उल्लंघन करते हुए अपने दो कारखानों को अवैध तरीके से बंद कर दिया। प्रशासन समझौते का पालन कराने में असमर्थता जाहिर कर रहा है। इस स्थिति को नागरिक समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। गोष्ठी का संचालन श्रमिक अधिकार समर्थन समिति के संयोजक और जनसंघर्ष मोर्चा के नेता यशवंत सिंह ने किया।
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