किसान नेता अखिल गोगोई कब रिहा होंगे

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किसान नेता अखिल गोगोई कब रिहा होंगे

सुनीलम 

नई दिल्ली . आज कृषक मुक्ति संग्राम समिति के संस्थापक अखिल गोगोई के  असम जेल में बंद हुए 200 दिन हो गए हैं.उनके साथ समिति के नेता बिट्टू सोनवाल, दाईजा कोनवार और मानस कोनवार भी जेल में है.अखिल गोगोई को मैं असम का सबसे बड़ा जन नेता मानता हूं, वे राष्ट्रीय स्तर पर भी  जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय सामिति की राष्ट्रीय समन्वयकों में शामिल है.वे भूमि अधिकार आन्दोलन में भी सक्रिय हैं.

अखिल गोगई 2005 में कृषक मुक्ति संग्राम समिति का गठन कर लगातार  असम के आम नागरिकों की आवाज को बुलंद किया है.बड़े बांधों के खिलाफ संघर्ष ,भ्रस्टाचारियों को जेल भिजवाने ,जन वितरण प्रणाली और मनरेगा में भ्रस्टाचार उजागर करने ,असम की अस्मिता ,भूमि हीनो को भूमि दिलाने आदि  सवालों को उठाने के लिए जाने जाते हैं.अन्ना आंदोलन की कोर कमिटी में हम साथ थे ,अन्ना के सामने सैद्धांतिक मुद्दों पर असहमति होने पर मैंने उन्हें बहस करते देखा है.मैंने अखिल गोगई द्वारा बनाए गए  काजीरंगा बायो डाइवर्सिटी पार्क देखा है ,जो अखिल की रचनात्मकता का अद्वितीय उदाहरण है.

अखिल गोगई ने मैंने उनकी लोकप्रियता तब देखी जब मुझे  कृषक मुक्ति संग्राम समिति के तीन दिवसीय सम्मेलन में शामिल होने का मौका मिला .तीनों दिन भारी बरसात होती रही लेकिन विशालकाय तंबू में समिति का सम्मेलन चलता रहा .असम के दसियों चैनल कार्यक्रम को लाइव दिखाते रहे .सम्मेलन में असम के जाने-माने बुद्धिजीवी , युवा नेता और  जन आंदोलनों के राष्ट्रीय नेता शामिल हुए.

 मैंने दूसरी बात अखिल गोगोई की लोकप्रियता 2017 ने देखी जब उन्हें सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था .मैं तत्कालीन सांसद राजू शेट्टी  जी के साथ अखिल से  मिलने जेल में गया .रिहाई को लेकर हजारों समर्थकों के साथ सभा की, तब मैंने जनता के साथ-साथ मीडिया में भी वैसी ही दीवानगी देखी थी.बाद में हाई कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी को अवैधानिक बतलाकर उन्हें छोड़ दिया गया .

गत वर्ष जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा की कि 4 देशों के हिंदुओं को नागरिकता दी जाएगी.दूसरी तरफ चालीस लाख नागरिकों की  नागरिकता को अवैध घोषित किया जा चुका था, तब अखिल गोगोई ने नागरिकता संशोधन कानून को असंवैधानिक और भेदभाव पूर्ण बतलाते हुए असम में जन आंदोलन छेड़ दिया.उन्हें 12 दिसंबर 2019 को गिरफ्तार कर लिया गया.यूएपीए के तहत राष्ट्रद्रोह के गंभीर आरोप भी लगा दिए गए ,लेकिन पुलिस 90 दिन में चालान पेश नहीं कर पाई तो उन्हें विशेष न्यायालय ने जमानत दे दी परंतु फिर गिरफ्तार कर लिया गया .26 मार्च को फिर बेल हो गई .एनआईए ने अपील कर दी . हाई कोर्ट के फुल बेंच के सामने मामला चला गया .हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हो रही है लेकिन अखिल गोगोई और साथियों की सुनवाई नहीं की जा रही है .

 मुझे अखिल गोगोई की पत्नी ने आज  बताया कि बेल दिए जाने के बाद से उन्हें गुवाहाटी जेल में अखिल गोगोई से मिलने नहीं दिया जा रहा है .उन्होंने बताया कि अखबारों से उन्हें पता चला है कि अखिल पिछले 3 दिन से भूख हड़ताल पर है तथा उनका स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा है. जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय ने किसान नेताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है. 


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