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आदिवासी उभार से दलों की नींद उड़ी
पूजा सिंह
भोपाल. मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब हैं और आदिवासी संगठन जयस की आदिवासी अधिकार यात्रा में उमड़ रही भीड़ को देखकर भाजपा और कांग्रेस दोनों के माथे पर बल पड़ रहे हैं. जयस प्रदेश की 47 आदिवासी बहुल सीटों पर यह यात्रा निकाल रहा है. इसमें बहुत बड़ी तादाद में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हो रहे हैं. दो चरणों की इस यात्रा का पहला चरण समाप्त हो चुका है जबकि दूसरा चरण 14 अगस्त से 24 अगस्त तक चलेगा. इंदौर में एक विशाल महासभा के साथ इसका समापन किया जायेगा.
 
प्रदेश की 47 आदिवासी विधानसभा सीटों में से 32 भाजपा, 14 कांग्रेस और एक निर्दलीय उम्मीदवार के पास है. परंपरागत रूप से कांग्रेस के साथ रहा आदिवासी वोट बैंक पिछले तीन चुनावों से भाजपा के साथ है लेकिन इस चुनाव में यह दोनों से अलग खड़ा दिख रहा है. इस बात ने दोनों राजनीतिक दलों को चिंतित कर दिया है.जयस के अध्यक्ष हीरा अलावा कहते हैं कि राजनीतिक दलों को अब आदिवासियों को वोट बैंक समझना बंद करना होगा. अलावा कहते हैं कि अब आदिवासी अपने अधिकारों को लेकर सतर्क हैं और वे दिन अब गये जब शराब और पैसे बांटकर वोट खरीद लिये जाते थे.
जयस की बढ़ती सक्रियता से प्रदेश सरकार चिंतित है. उसने इस वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेश के 20 आदिवासी बहुल जिलों में अवकाश की घोषणा की. साथ ही प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इस अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर आदिवासियों को साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है.
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहते हैं कि आदिवासी प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा कारक हैं. वे अगर भाजपा से दूर होते हैं तो पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि युवा और किसान पहले ही पार्टी से दूरी बनाते हुए दिख रहे हैं.
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