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तो यूपी का पानी पी जाएगा पेप्सी कोला !
संदीप पांडे 
 लखनऊ . भारत के 6,607 इलाकों के भू-गर्भ जल का सर्वेक्षण किया गया तो पाया गया कि 1,071 इलाके अति-दोहित हैं. तमिल नाडू व केरल के दुकानदार अब पेप्सी व कोका कोला के उत्पादों का बहिष्कार कर रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि अमरीका की ये दो कम्पनियां भारत में भू-गर्भ जल के दोहन के लिए जिम्मेदार हैं.अब वही पेप्सी के कदम यूपी में पड़ रहे हैं .
 
  केन्द्रीय भू-गर्भ जल प्राधिकरण के नियमों के अनुसार यदि भू-गर्भ जल स्तर सुरक्षित, सेमी क्रिटिकल या क्रिटिकल श्रेणी में है तो जल सघन उद्योग, यानी जिन उद्योगों में मुख्य रूप से जल का प्रयोग हो रहा है, वर्षा जल के संचयन से भू-गर्भ जल स्तर को बनाए रखने का क्रमशः 200, 100 व 50 प्रतिशत जल ही उपयोग कर सकते हैं. यदि भू-गर्भ जल स्तर अति दोहित श्रेणी में है तो भू-गर्भ जल के उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती है. केन्द्रीय भू-गर्भ जल प्राधिकरण की परिभाषा के अनुसार पेप्सी के उत्पाद, यानी बोतलबंद पानी व शीतल पेय जल सघन उद्योग की श्रेणी में आते हैं.
 
ऐसा अनुमान है कि पेप्सी संयंत्र 5 से 15 लाख लीटर पानी रोजाना जमीन के नीचे से निकाल रहा है. एक लीटर शीतल पेय बनाने में 2.5 से 3 लीटर पानी खर्च होता है. पेप्सी व कोका कोला कम्पनियों के 1,200 बोतलबंद पानी के व 100 के करीब शीतल पेय बनाने के कारखाने हैं. ये पानी के 50 प्रतिशत बाजार पर काबिज हैं.जन संगठन के नेताओं ने एक बयान में कहा ,हम हरदोई जिला प्रशासन से जानना चाहेंगे कि वह आम जनता को बताए कि सण्डीला क्षेत्र कर भू-गर्भ जल स्तर उपर्लिखित कौन सी चार श्रेणियों में आता है व क्या भू-गर्भ जल उपयोग हेतु भू-गर्भ जल प्राधिकरण के नियमों को पालन किया जा रहा है? यदि भू-गर्भ जल प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो यह संयंत्र तुरंत बंद किया जाना चाहिए.
 
यह कितने शर्म की बात है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सण्डीला क्षेत्र में पेप्सी के संयंत्र को स्थापित करने की अनुमति दी है. भारत पेप्सी के पांच  बड़े बाजारों में से एक है. यह कम्पनी इन वायदों के साथ भारत में आई थी कि 50,000 लोगों को रोजगार देगी, 74 प्रतिशत निवेश खाद्य व कृषि प्रसंस्करण उद्योग में करेगी, 50 प्रतिशत उत्पादन निर्यात करेगी व कृषि अनुसंधान केन्द्र खोलेगी जिनको इसने पूरा नहीं किया.
 
जब तक भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र में सरकार नहीं बना थी तब तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक ईकाइ स्वदेशी जागरण मंच विदेशी कम्पनियों का विरोध करती थी. लेकिन जब से प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करने का तेज अभियान छेड़ा है और यहां तक कि रक्षा क्षेत्र को भी विदेशी पूंजी निवेश के लिए खोल दिया है तब से स्वदेशी जागरण मंच ऐसे गायब हो गया जैसे गधे के सिर से सींगगौ रक्षा के नाम पर लोगों को पीट पीट कर मार डालने वालों व उनको सम्मानित करने वाले महानुभावों से हम पूछना चाहेंगे कि क्या यह राष्ट्रीय शर्म की बात नहीं कि हमारे देश के पानी को लूट कर मनमाना मुनाफा कमाने वाली अमरीकी कम्पनियों पेप्सी व कोका कोला को हमने खुली छूट दे रखी है?
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