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बिहार में डेरा डालेंगे शरद यादव

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

पटना .जेडीयू के बागी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर हैं. बिहार में उनकी सक्रियता बढ़ गई है. बिहार यात्रा के दौरान वे रांची भी गए. जेल में पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव से मिले. उनके साथ जेडीयू नेता और विधानसभा के पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी भी थे. जाहिर है कि मुलाकात हुई तो बात भी हुई. लेकिन यह बात क्या हुई, किसी ने किसी से कुछ नहीं कहा. लेकिन बातें सियासी ही हुईं होंगी. भविष्य की सियासत को लेकर बातें हुईं होंगी. इस लिहाज से इस मुलाकात को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है. रांची से बिहार आए तो बक्सर जिले के नंदन गांव गए. नंदन गांव में ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर समीक्षा यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने पथराव किया था. बाद में पुलिस ने गांव वालों पर बेतरह जुल्म ढाया था. बेकसूरों और मजलूमों को जम कर पीटा गया था. घरों में घुस कर महिलाओं और बुजुर्गों तक को नहीं छोड़ा था पुलिस ने. इसकी गूंज दूर तक सुनाई दी लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुलिस की बर्बरता पर चुप्पी साधे रखी.
 
दिलचस्प यह भी है कि इस हमले के पीछे कुछ जेडीयू नेताओं के शामिल होने की बात भी कही जाती रही है. उसी नंदन गांव में शरद यादव गए. दलितों की महापंचायत लगाई गई थी. नंदन गांव और बिहार सहित देश भर में दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ लगाई गई थी महापंचायत. शरद यादव उस महापंचायत का हिस्सा बने. वे बतौर मुख्य अतिथि महापंचायत में शामिल हुए. ज्यादा लोगों की सुनी, बाद में अपनी सुनाई. निशाने पर नीतीश रहे. उन्होंने नीतीश की नाकामियों का क्रमवार जिक्र किया. बेरोजगारी पर बोले और बिहार व देश में सत्ता परिवर्तन का शंखनाद फूंका. लोगों से कहा सत्ता परिवर्तन करें, जरूरी हो गया है.
 
दलित महापंचायत में शरद यादव ने मन का गुबार निकाला और नीतीश कुमार सरकार पर जम कर हमला किया. उन्होंने नंदन गांव के लोगों पर हुए पुलिसिया जुल्म का जिक्र किया और इस बर्बरता की तुलना अंग्रेजों के जुल्मो-सितम से किया. शरद यादव बरसे और जम कर बरसे. उन्होंने कहा कि बिहार बुरे दौर से गुजर रहा है और सरकार निकम्मी हो गई है. बेरोजगारी शबाब पर है. सरकार युवाओं को नौकरी देने में नाकाम रही है. शरद यादव ने एलान किया कि 11 मार्च को पूरे बिहार में बेरोजगारों की मानव ऋंखला बनाई जाएगी. इस मानव ऋंखला में अठारह साल से लेकर चालीस साल तक के युवा शामिल होंगे. दलित महापंचायत में शरद के अलावा पूर्व सांसद अर्जुन राम, सांसद अली अनवर, (जदयू (शरद गुट के) इंजीनियर संतोष यादव, जदयू शरद के प्रदेश अध्यक्ष रमई राम, रामधनी सिंह डॉ. उपेंद्र प्रसाद, रामाशीष कुशवाहा, अरुण कुमार तिवारी बजरंगी मिश्रा, ब्रम्हपुर के विधायक शंभूनाथ यादव ने भी हिस्सा लिया और अपनी बात रखी.
 
दलित महापंचायत को लेकर प्रशासन सतर्क था और पुलिस मुस्तैद. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. दलित महापंचायत में बड़ी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया. नंदन के अलावा आसपास के गांवों से भी लोग आए. महापंचायत में नेताओ ने एक सुर में नीतीश सरकार पर हल्ला बोला. उनका कहना था कि महापंचायत का आयोजन इसलिए करना पड़ा क्योंकि सरकार संवेदनहीन हो गई है. सभी नेताओं ने सत्ता बदलने की गुहार महापंचायत में मौजूद लोगों से की. वक्ताओं का कहना था कि गरीब जब भी अपने अधिकार की मांग करता है तो उसके लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण नहीं किया जाता है. बल्कि बिहार की सरकार उन पर डंडे बरसाती है और जेल में बंद कर डालती है. दलितों को केंद्र में रख कर लगाई गई इस महापंचायत के राजनीतिक मतलब भी निकाले जा रहे हैं.
 
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