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नेहरु का चरित्र समा गया था मैं अविवाहित हूं लेकिन कुवारां नहीं भारत छोडो आंदोलन और अटल वे एक अटल थे
आनंदी बेन के जरिये शिवराज पर नजर!
पूजा सिंह
भोपाल. मध्य प्रदेश में राज्यपाल पद की शपथ लेने वाली आनंदी बेन पटेल ने शुरुआती दिनों में जो तौर तरीके दिखाये हैं उससे एक संदेश एकदम साफ हो गया है कि साल के अंत में चुनाव का सामना करने जा रहे इस राज्य पर मोदी और करीबी निगाह रखना चाहते हैं और आनंदी बेन यहां राज्यपाल से कुछ ज्यादा बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. आनंदीबेन ने गुजरात के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली की जगह ली है. सितंबर 2016 में तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव का कार्यकाल पूरा होने के बाद से ही कोहली मध्यप्रदेश का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे.
 
सबसे पहले तो आनंदी बेन ने अहमदाबाद से मध्य प्रदेश यात्रा के लिए सरकारी विमान की सेवा न लेते हुए चार्टर्ड बस की सेवा ली और अपने परिवार के कई सदस्यों के साथ एकदम रोड शो वाले अंदाज में सीधे उज्जैन पहुंचकर महाकाल के दर्शन किये.  
 
मंगलवार को शपथग्रहण के तुरंत बाद वह राजधानी के कमजोर वर्ग के बच्चों का हाल जानने निकल पड़ीं. उन्होंने एक आंगनबाड़ी में जाकर बच्चों को फल और टाफियां बांटीं. उन्होंने बच्चियों और किशोरियों से पूछा कि उन्हें सेनेटरी पैड मिलता है या नहीं, वे स्कूल जाती हैं या नहीं आदि. इसके बाद उन्होंने बाल निकेतन ट्रस्ट जाकर बच्चों का हालचाल लिया. कुलमिलाकर उनके हावभाव एकदम राजनेता वाले नजर आये.
 
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी करीबी आनंदी बेन को मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाकर शिवराज सरकार पर दबाव बढ़ाया है. अटेर और चित्रकूट विधानसभा चुनाव में हार के बाद शिवराज पहले ही दबाव में हैं. हार्दिक पटेल ने भी मध्य प्रदेश के पाटीदार समुदाय में अपनी आवाजाही बढ़ा दी है. ऐसे में चुनावी साल में आनंदी बेन को राज्यपाल बनाकर मोदी शिवराज सरकार के हर कदम पर करीबी नजर रखना चाहते हैं.
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  • वे राजा भी थे तो फकीर भी !
  • वे एक अटल थे
  • भारत छोडो आंदोलन और अटल
  • मैं अविवाहित हूं लेकिन कुवारां नहीं
  • नेहरु का चरित्र समा गया था
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