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नेहरु का चरित्र समा गया था मैं अविवाहित हूं लेकिन कुवारां नहीं भारत छोडो आंदोलन और अटल वे एक अटल थे
शिवराज को गुस्सा क्यों आया?
पूजा सिंह
भोपाल.प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यूं तो अत्यंत गंभीर, सहज और शांत स्वभाव का व्यक्ति माना जाता है लेकिन पिछले दिनों धार जिले में नगरीय निकाय चुनाव से जुड़ी एक रैली के दौरान जब उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मी को थप्पड़ मार दिया तो हर कोई स्तब्ध रह गया. जानकारी के मुताबिक गत 14 जनवरी को धार जिले के सरदारपुर में आयोजित एक रैली में सुरक्षाकर्मी भीड़ को हटाने के क्रम में बार-बार मुख्यमंत्री के सामने आ रहा था. उन्होंने न केवल उसे थप्पड़ मारा बल्कि धक्का देकर अपने आगे से हटा दिया.
 
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उसे दूर रहने को कहा लेकिन वह न तो भीड़ को नियंत्रित कर पा रहा था न उनके सामने से हट रहा था. इस पर झल्लाए मुख्यमंत्री ने उसे 2-3 थप्पड़ लगा दिये. यह घटना कैमरे में कैद हो गयी और मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी. मुख्यमंत्री की इस तुनकमिजाजी ने उनके विरोधियो और समर्थकों दोनों को चकित कर दिया है.
 
विपक्ष ने इस मौके को हाथों हाथ लिया. नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने कहा कि सत्ता का मद और खिसकता जनाधार दोनों उनको उलझाये हुए हैं और यह बात उनके व्यवहार में सार्वजनिक रूप से नजर आने लगी है. मुख्यमंत्री अपनों की आलोचना से भी नहीं बच पाये. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूलाल गौर ने कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता को किसी भी व्यक्ति पर हाथ उठाने का अधिकार नहीं है. आम आदमी पार्टी के नेता आलोक अग्रवाल ने तो मुख्यमंत्री पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग ही कर डाली.
 
गौरलतब है कि चित्रकूट विधानसभा चुनाव में हार के बाद से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान काफी दबाव महसूस कर रहे हैं. आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश की मुंगावली और कोलारस विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं. इन चुनावों के परिणाम को प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. इन दोनों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को अपनी सीट का भरोसा है. वर्तमान में मुंगावली और कोलारस में कांग्रेस का बोल-बाला है. ये दोनों सीटे गुना लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, जहां से कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने कोलारस में किरार समुदाय की जनसभा को संबोधित किया था. जिसे उनकी राजनीतिक लॉन्चिंग भी कहा गया.
 
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  • वे राजा भी थे तो फकीर भी !
  • वे एक अटल थे
  • भारत छोडो आंदोलन और अटल
  • मैं अविवाहित हूं लेकिन कुवारां नहीं
  • नेहरु का चरित्र समा गया था
  • तो भाजपा बांग्लादेश के नारे पर लड़ेगी चुनाव
  • लेकिन नीतीश की नीयत पर सवाल
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