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अब सबकी निगाह राहुल गांधी पर

अंबरीश कुमार 

कल का दिन  ऐतिहासिक था जब कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने मोदी से कहा कि आप जो चाहे कह सकते हैं पर हम आपको प्यार से हटाने जा रहे है .आज की राजनीति में जिस तरह की भाषा में संवाद हो रहा हो रहा है उसे देखते हुए यह नई राजनीति का भी आगाज था .मोदी गुजरात चुनाव में बहुत आक्रामक भाषा में प्रचार कर रहे थे और राहुल बहुत सधी हुई भाषा में .यही राहुल गांधी  अंततः आज सवा सौ साल से ज्यादा पुरानी कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए गए .उनके चुनाव पर भाजपा सवाल उठा रही है .वह भाजपा जिसके यहां कोई नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं होता है .बहरहाल कांग्रेस राहुल गांधी के अध्यक्ष बनते ही 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर माहौल देखने वाला था .ढोल नगाड़ों के साथ राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे की आवाज दूर तक गूंज रही थी .राहुल गांधी जिस समय पार्टी अध्यक्ष बने है वह समय बहुत महत्व रखता है .
लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार  कांग्रेस देश की राजनीति पर कुछ पकड़ बनाती नजर आ रही है .गुजरात के चुनाव में कांग्रेस कुछ खोने नहीं जा रही ,पाने ही जा रही है .दूसरे गुजरात चुनाव में राहुल गांधी ने जिस राजनैतिक कुशलता का परिचय देते हुए रणनीति बनाई वह कामयाब भी हुई .राहुल गांधी इसी गुजरात चुनाव के दौरान अध्यक्ष बनाए गए है जिस पर सारे देश की नजर लगी हुई है .गुजरात में राहुल गांधी ने ही तीन युवा  नेताओं हार्दिक पटेल ,जिग्नेश और अल्पेश के युवा नेतृत्व के जरिये नौजवानों में जोश भर देश में चर्चा का विषय तो बना ही दिया .मोदी जैसे दिग्गज नेता को इस माहौल में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है .बार बार उनकी सभाओं में भीड़ न आने की खबर आ रही है .दूसरी तरफ राहुल गांधी की सभाओं में युवाओं की संख्या बढ़ रही है .चुनाव का नतीजा चाहे जो हो पर गुजरात चुनाव ने राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के समकक्ष तो खड़ा ही कर दिया है .कांग्रेस के लिए यह बड़ी उपलब्धि है .
दूसरे राहुल गांधी ने खुद को एक उदार हिंदू की छवि से भी लैस कर दिया है .वैसे भी इंदिरा गांधी परिवार ने अपनी संस्कृति विरासत को बचाए रखा .शादी ब्याह से लेकर अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर वे कश्मीरी पंडितों के रीति रिवाज पर ही चलते है .यह इसलिए क्योंकि विरोधी दल कांग्रेस पर तुष्टिकरण की जिस राजनीति का आरोप लगते रहे हैं उसकी धार राहुल गांधी ने खुद को शिव भक्त घोषित कर भोथरी तो कर ही दी है .राहुल गांधी की राजनीति को हम उस दिन से देख रहे हैं जब वे अमेठी से चुनाव लड़ने गए थे .काफी बदलाव भी उनमे आया है .दूसरे वे राजनैतिक छूआछूत के भी खिलाफ हैं .यह वे ठीक से समझ गए हैं कि केंद्र में अभी गठबंधन की राजनीति का दौर है .सामान धारा  के राजनैतिक दलों और उनके नेताओं से वे संपर्क में भी रहते है .वैसे भी वंशवादी राजनीति के आरोप के बावजूद राजनीति का ककहरा पढ़ते हुए यहां तक पहुंचे हैं .चाहे दलितों के दमन का विरोध हो या किसानो के हक़ में सड़क पर उतरना हो राहुल गांधी कभी पीछे नहीं हटे . अब वे खेत खलिहान और किसान को ठीक से समझ कर पार्टी की कमान संभालने जा रहे है .तो देश के युवाओं की उम्मीद भी हैं .मुकाबले में जो नेता हैं फिलहाल वे उम्र के साथ सोच में भी कमजोर तो पड़ने ही लगे है .
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