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बिना बर्फ़बारी के निकल गया पौष रहीम की दास्तान सुनेगा लखनऊ भाजपा के पल्ले व्यंग नही पड़ता इस विरोध को समझें नीतीश जी
तिकड़ी से घिरे तो बदल गई भाषा !
शंभूनाथ शुक्ल
नई दिल्ली .कांग्रेस अपना अध्यक्ष चुन रही है, नियमतः तो भाजपा को इसमें बेचैनी नहीं होनी चाहिए. पर भाजपा को आपत्ति है. और वह भी इसलिए कि कांग्रेस राहुल गांधी  को अपना अध्यक्ष क्यों चुन रही है! यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है. उसे अगर लगता है कि पार्टी को आज एक उर्जावान नेतृत्त्व की जरूरत है और राहुल गाँधी इसके लिए एकदम फिट रहेंगे तो उसे यह लोकतान्त्रिक अधिकार है कि वह राहुल गांधी को ही अपना नेता चुने. मगर नरेंद्र मोदी समेत पूरी भाजपा राहुल गांधीकी गतिशीलता और हाज़िरजवाबी से इधर खूब परेशान हो गयी है, शायद इसीलिए नरेंद्र मोदी ने औरंगजेबी हुकूमत जैसी वाहियात बातें करनी शुरू कर दी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिशंकर अय्यर के बयान को समझे बिना ही राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी द्वारा निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने को औरंगजेबी राज बता दिया. इससे उन्होंने अपने को बेहद हल्का साबित कर दिया है.
दरअसल मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि अब कोई राजतन्त्र तो है नहीं कि जहांगीर  के बाद शाहजहाँ और शाहजहाँ के बाद औरंगजेब को गद्दी मिलेगी. अब तो लोकतंत्र है और पार्टी अध्यक्ष के चुनाव की जो प्रक्रिया है, उसके पूरी होने के बाद ही राहुल गांधी को अध्यक्ष घोषित किया जाएगा. यह एक सामान्य बात थी और इसे या तो मोदी जी ने समझा ही नहीं अथवा खूब समझ-बूझ कर ही उन्होंने राहुल गांधी की तुलना औरंगजेब से कर दी ताकि उनका तथाकथित हिन्दुत्त्ववादी एजेंडा चुनाव में अपेक्षा के अनुरूप फल दे. प्रधानमंत्री को जानना चाहिए कि राजतन्त्र में राजा को अपना राज्य चुनाव से नहीं बल्कि उत्तराधिकार में मिलता था. अशोक से लेकर महाराणा प्रताप तक को गद्दी ऐसे ही मिली थी. सत्य तो यह है कि गुजरात में राहुल गांधी ने भाजपा को बुरी तरह घेर लिया है. उन्होंने भाजपा के गुब्बारे की हवा निकाल दी है. और उन सारे लोगों को अपने साथ कर लिया है जो पिछले 22 साल के भाजपा राज से असंतुष्ट थे. अल्पेश ठाकोर, जिग्नेश मेवानी और हार्दिक पटेल के कांग्रेस के करीब आ जाने के चलते भाजपा का इस बार गुजरात का रण सहज नहीं रहा.
सत्य तो यह है कि करीब-करीब सारे सैफोलाजिस्ट टक्कर कड़ी बता रहे हैं. यही कारण है कि खुद प्रधानमंत्री दिल्ली का राज-काज छोड़कर गुजरात डेरा डाले हैं, पर इसके बावजूद उनकी रैलियों की खाली-खाली कुर्सियां  हकीकत बयान कर रही हैं. ऐसे में उनके समक्ष एक ही विकल्प बचता है कि वे चुनाव को मुस्लिम बनाम हिन्दू बना दें. इसीलिए उन्होंने औरंगजेब का उदाहरण देकर हिन्दुओं को भयभीत करने की कोशिश की है. लेकिन प्रधानमंत्री भूल जाते हैं कि काठ की हांड़ी एक बार ही चढ़ती है. 
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  • बिना बर्फ़बारी के निकल गया पौष
  • इस विरोध को समझें नीतीश जी
  • भाजपा के पल्ले व्यंग नही पड़ता
  • एअर इंडिया बेचने की तैयारी ?
  • शिवराज को गुस्सा क्यों आया?
  • रहीम की दास्तान सुनेगा लखनऊ
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