ताजा खबर
हिंदी अखबारों का ये कैसा दौर एक लेखक का इंसान होना तो यूपी का पानी पी जाएगा पेप्सी कोला ! विध्वंसकों ने रघुकुल की रीत पर कालिख पोत दी
इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी में झोल !

दीपांकर पटेल 

नई दिल्ली .कारवां की रिपोर्ट की कई बातें गलत साबित करते हुए इंडियन एक्सप्रेस ने एक भारी गलती कर दी है.जस्टिस लोया मौत केस में जिस ईसीजी  रिपोर्ट को आधार बनाकर इंडियन एक्सप्रेस ने स्टोरी का एंगल चेंज किया है, उस  ईसीजी रिपोर्ट को इंडियन एक्सप्रेस ने ठीक से एक बार देखा भी नहीं. 
 ईसीजी रिपोर्ट को ध्यान से देखिए.उस पर तारीख लिखी है 30 नवम्बर.जबकि इसी रिपोर्ट में लिखा है कि उन्होंने 1 दिसम्बर सुबह 4 बजे सीने में दर्द की शिकायत की।दांडे अस्पताल के डायरेक्टर पिनाक दांडे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है ,"उन्हें हमारे अस्पताल में सुबह 4.45 या 5 बजे के करीब लाया गया, हमारे अस्पताल में 24 घंटे चलने वाला ट्रामा सेंटर है" .इस वक्त तारीख थी 1 दिसम्बर.क्योंकि 30 नवम्बर को तो शादी ही थी.
रात के 12 बजते ही तारीख बदल जाती है.तो  ईसीजी मशीन में 30 नवम्बर की तारीख कैसे है ?
क्या मशीन झूठ बोल रही है या अस्पताल झूठ बोल रहा है?क्या  ईसीजी मशीन की इस रिपोर्ट को बाद में बैक डेट में प्रिंट करके फाइल में लगा दिया गया ? और बैक डेट करने के चक्कर में हड़बड़ी में तारीख 30 नवम्बर लिख उठी? जैसे हम सुबह 4 बजे तक जागते हुए पिछली तारीख को उस दिन की तारीख माने रहते हैं.मगर मशीन तो ये गलती नहीं करती ?अगर ये मशीन की गलती है तो क्या इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने कुछ लिखा? आखिर इस बात के पीछे भी तो कुछ बात होगी कि  ईसीजी मशीन नहीं चल रही थी ?
क्या कारवां की रिपोर्ट के बाद जस्टिस भूषण गवई और जस्टिस सुनील शुक्रे पर शक की सूई नहीं गई थी ?अगर कारवां की रिपोर्ट सही है तो क्या दोनो जज और अस्पताल अपने आप को पाक-साफ साबित करने की कोशिश नहीं करेंगे?मोहित शाह भी तो एक जज ही थे, जिसपर लोया को 100 करोड़ ऑफर करके केस मैनेज करने की बात लोया की बहन कह रही थी.क्या ऐसा नहीं लगता कि कारवां की रिपोर्ट के बाद मचे हंगामे को ठंडा करने के लिए इंडियन एक्सप्रेस की विश्वसनीयता का इस्तेमाल  कर लिया गया है?
पनामा पेपर और पैराडाइज पेपर के लाखों पन्ने पढ़ने वाले इंडियन एक्सप्रेस ने एक पेज की  ईसीजी रिपोर्ट को ध्यान से क्यों नहीं देखा ?जस्टिस लोया की मौत अब और रहस्मयी होती जा रही है. कल एक और रिपोर्ट आयेगी परसों कोई और लेकिन कोई इस पर सवाल क्यों नही करता कि जस्टिस लोया की मौत के महज एक महीने बाद नये जज ने आरोपी को कैसे बरी कर दिया? 
क्या ये जल्दबाजी नहीं थी?जस्टिस लोया की मौत के बाद दिल्ली मीडिया में जमी बर्फ को पिघलाने का जिम्मा इंडियन एक्सप्रेस नहीं ले लिया, लेकिन ऐसा लगता है ये बर्फ पिघलाने चले और पिघला पानी गन्दा करके लौट आये हैं.बाद में एक्सप्रेस ने अपनी इस स्टोरी को अपडेट भी किया है .साभार 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • हिंदी अखबारों का ये कैसा दौर
  • ऐसे थे प्रभाष जोशी
  • तो यूपी का पानी पी जाएगा पेप्सी कोला !
  • एक लेखक का इंसान होना
  • विश्वविद्यालय परिसरों में कुलपति से टकराव क्यों
  • फिर गाली और गोली के निशाने पर कश्मीर
  • चंदा कोचर तो अपने पद पर बरक़रार हैं
  • भाजपा के निशाने पर क्यों हैं अखिलेश !
  • एमपी में बनेगा गाय मंत्रालय !
  • विधायक पर फिर बरसी लाठी
  • तो नोटबंदी से संगठित लूट हुई
  • छत्तीसगढ़ में 'मोदी गो बैक' के नारे
  • महाराज ,सरकार में तो छूंछीचोर भी मंत्री हैं !
  • जानिए,कब-कब हुआ जान का खतरा ?
  • शुजात को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई थी
  • तीसरे मोर्चे के गुब्बारे की हवा निकालेंगे प्रणब ?
  • देशभक्तों का महान संगठन ?
  • टूट रहा है ब्रांड मोदी का तिलिस्म !
  • किसान सड़क पर उतरे
  • लोहिया, आंबेडकर और चरण सिंह की अंगड़ाई
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.