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कहानी एक पहाड़ी शहर की कुशीनगर में लोकरंग का रंग कौन हैं ये तिरंगा वाले रीढ़ वाले संपादक थे निहाल सिंह
चालीस साल पुराना मुकदमा ,और गवाह स्वर्गवासी

अंबरीश कुमार 

लखनऊ .चंचल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार का रोचक मुकदमा सोलह नवंबर से शुरू होने जा रहा है .मामला 1978 का है जिसपर काफी कुछ लिखा जा चुका है .लिखा पढ़ा इतना गया कि अदालत भी पसीज गई है .एक दिन जेल भेजा तो दूसरे दिन बेल दे दी .पर मुकदमा तो ठहरा मुकदमा ,चलेगा और ठीक से चलेगा .चर्चा भी होगी और चकल्लस भी .आखिर मुकदमा एक गरीब को चार बोरी  सीमेंट दिलाने के लिए बनारस विश्विद्यालय छात्रसंघ के सबसे चर्चित अध्यक्ष चंचल के एक आला अफसर से भिड़ने का जो है .आज की पीढी सत्तर अस्सी के दशक के दौरान उत्तर प्रदेश के विश्विद्यालय के माहौल और छात्र आंदोलनों से ठीक से परिचित नहीं है .विश्विद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष का जलवा तब किसी विधायक मंत्री से कम नहीं होता था .ऐसे में कोई कलेक्टर या कोई दूसरा अफसर क्या हैसियत रखता था .चंचल भिड़े तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दिया सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का .गैर जमानती धारा का मुकदमा जानबूझ कर लगाया जाता है .यह निचली अदालत भी जानती है और बड़ी वाली भी .खैर छात्र आंदोलनों के उस दौर में कभी किसी छात्र नेता ने इस सबकी परवाह नहीं की .और मुक़दमे भी एकाध हो तो कोई याद रखे .सब भूल गए .पर सरकारी पार्टी और कुछ लोग इसे याद रखे हुए थे .हाल में बनारस हिंदू विश्विद्यालय में छात्राओं का आंदोलन हुआ .इस बीच गंगा के बुलाने पर वाराणसी से चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी भी शहर में थे .छात्राओं से बातचीत करना तो दूर मोदी रास्ता बदल कर निकल लिए .यह बनारस का स्वभाव नहीं रहा है .चंचल ने मोदी के इस रुख पर अपने अंदाज में एक नहीं कई टिपण्णी की .संघ कार्यकर्त्ता और कारसेवक कुलपति को भी नहीं छोड़ा . यह बात सत्ता में बैठे लोगों को नागवार गुजरी .चंचल का इतिहास भूगोल खंगाला गया .अंततः जिले के कारसेवकों ने मदद की .साल उन्नीस सौ अठहत्तर का चार बोरी सीमेंट का यह मुकदमा मिल ही गया .हालांकि सभी सरकारे अपने अपराधी किस्म के नेताओं के भी आपराधिक मुक़दमे वापस ले लेती हैं तो यह तो कहासुनी का मुकदमा था .अखिलेश सरकार के समय ही वापस हो जाता .पर समाजवादी तो समाजवादी ही होता है .खैर जेल गए चंचल बिना किसी राजनैतिक दल के दखल के ही जमानत पा गए हैं .अब मुकदमा चलेगा .जानकारी के मुताबिक जिस दरोगा ने तफ्तीश की थी उसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है .जिस अफसर से चंचल भिड़े थे उसकी भी जानकारी नहीं है .मामले के चार गवाह स्वर्गवासी हो चुके हैं .इसलिए मुकदमा तो रोचक हो ही गया है .मुकदमा तो तलाश लिया गया पर इसे चलाएंगे कैसे यह देखना दिलचस्प होगा .चंचल अब हाजिर हैं .वे खांटी समाजवादी है .जार्ज फर्नांडीज की सोहबत वाले .ऐसे किसी को छोड़ दे यह संभव नहीं है .सोलह को अगली तारीख है .इन्तजार करे .  
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर ने चंचल को चालीस साल पहले के मुक़दमे में जेल भेजे जाने की तीखी निंदा की है .राजबब्बर ने कहा ,चंचल ने हाल में बनारस हिंदू विश्विद्यालय में छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर जो टिपण्णी की थी उसी के चलते उनके पुराने मामले को खोलकर जेल भेजा गया है .सरकार को अब किसी का लिखना बोलना भी नहीं रास आ रहा है .राजबब्बर के मुताबिक सरकार छात्र आंदोलन के दौर के पुराने मुक़दमे निकाल कर विपक्ष को डराने धमकाने का प्रयास कर रही है .राजबब्बर के खिलाफ भी तीस साल पुराना कोई मामला निकाला गया है .कांग्रेस पार्टी इस तरह की कार्यवाई का सड़क पर उतर कर जवाब देगी .
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