ताजा खबर
हिंदी अखबारों का ये कैसा दौर एक लेखक का इंसान होना तो यूपी का पानी पी जाएगा पेप्सी कोला ! विध्वंसकों ने रघुकुल की रीत पर कालिख पोत दी
बेटियों से युद्ध नहीं संवाद करे सरकार

अंबरीश कुमार 

बनारस हिंदू विश्विद्यालय की एक फोटो आई है .छात्राओं के आंदोलन से निपटने के लिए पुलिस के साथ सुरक्षा बल का वह दस्ता लगाया गया है जो दंगो से निपटता है .ये छात्राएं भी तो वही बेटियां हैं जिनके बचाने का नारा सरकार के शीर्ष पर बैठे नेता दे रहे हैं .बनारस तो देश के सबसे बड़े चौकीदार  का राजनैतिक घर है .अब चौकीदार के घर में भी बेटियां सुरक्षित नहीं रहेंगी तो कहां रहेंगी .कल एक बेटी के साथ छेड़खानी हुई और एक बडबोले और बौड़म  कुलपति के चलते छात्राओं को ही छात्रावास में कैद कर दिया गया .छात्राओं ने विरोध शुरू किया तो दबाने के लिए दंगा निपटाने वाले जवानो को आगे कर दिया गया .आप सोच कर देखे कि आपकी बहन बेटी घर से दूर छात्रावास में रह रही हो और कोई लंपट उसके साथ छेड़खानी करे तो किससे कार्रवाई  की अपेक्षा रखेंगे .
 
साफ़ है विश्विद्यालय प्रशासन से .और जब प्रशासन ही इन बेटियों की आवाज दबाने में जुट जाए तो कौन खड़ा होगा .प्रदेश की यह सरकार जब सत्ता आई थी तो एक एंटी रोमियो स्क्वायड बना कर पुलिस वालों को एक साथ जा रहे लड़की और लड़के को प्रताड़ित करने का हथियार दे दिया गया था .भाई बहन तक थाने में बैठाए गए तो पति पत्नी तक को नहीं छोड़ा  .जब एकाध अफसर नेता के परिजन भी फंसे तो यह कवायद बंद हो गई .किसी भी जिले में चले जाएं अगर किसी लड़की महिला से छेड़खानी या बलात्कार का कोई मामला आएगा तो पहला प्रयास यह होगा कि लड़की वाले को थाने से ही बिना शिकायत लिखे भगा दिया जाए .और बलात्कारी बड़े घर का हुआ तो पैसे लेकर मामला रफा दफा कर दिया जाए .यह पुलिसिया चरित्र है .यह कोई योगी सरकार में नहीं बना सभी सरकार में रहा .पर यह तो संस्कार वाली सरकार है ,कुछ तो नई पहल करे कि लड़की सुरक्षित रहे .और जब कोई घटना घटे तो जल्द से जल्द और प्रभावी कार्यवाई हो .क्या यह बेहतर नहीं होता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कम से कम अपने निर्वाचन क्षेत्र में हुई इस घटना की जानकारी लेकर खुद कोई पहल करते .इससे उनका कद ही बढ़ता .विश्विद्यालय से लेकर जिला प्रशासन तक तो जिस लीपापोती में लगा हुआ है उससे लोगों का आक्रोश  बढ़ रहा है .
यह सिर्फ बनारस हिंदू विश्विद्यालय का मामला नहीं है .लखनऊ विश्विद्यालय से लेकर इलाहाबाद विश्विद्यालय तक में छात्राओं को किस तरह दबाया जा रहा है .लखनऊ विश्विद्यालय में छात्रा पूजा शुक्ल को जेल भेज दिया गया .और बडबोला प्राक्टर इस बहाने दूसरों को धमकाने में जुट गया .इलाहाबाद में ऋचा सिंह को किस तरह प्रताड़ित किया गया यह सभी ने देखा है .क्या इस सबसे यह छात्राएं दब जाएंगी .यह संभव नहीं है .हम लोग आंदोलन में रहे है ,देखा है .छात्रों को दबाकर  कोई प्रशासन जीत नहीं पाता .लाठी गोली के बाद जेल भी छात्र जाते रहे और लड़ते रहे .इसलिए सरकार इन बेटियों से युद्ध न करे ,संवाद करे .एक परिसर में माहौल ख़राब हुआ तो दूसरा भी नहीं बचेगा .जेएनयू गया तो दिल्ली विश्विद्यालय भी नहीं बचा .अब यूपी के छात्रों से टकराव ठीक नहीं .आज तो मोदी आरती के लिए निकले तो रूट बदलना पड़ा .क्योंकि रास्ते में ये बेटियां खड़ी थी .बता रहे है कि नवरात्र में इन बेटियों पर लाठी चली है .
 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • हिंदी अखबारों का ये कैसा दौर
  • ऐसे थे प्रभाष जोशी
  • तो यूपी का पानी पी जाएगा पेप्सी कोला !
  • एक लेखक का इंसान होना
  • विश्वविद्यालय परिसरों में कुलपति से टकराव क्यों
  • फिर गाली और गोली के निशाने पर कश्मीर
  • चंदा कोचर तो अपने पद पर बरक़रार हैं
  • भाजपा के निशाने पर क्यों हैं अखिलेश !
  • एमपी में बनेगा गाय मंत्रालय !
  • विधायक पर फिर बरसी लाठी
  • तो नोटबंदी से संगठित लूट हुई
  • छत्तीसगढ़ में 'मोदी गो बैक' के नारे
  • महाराज ,सरकार में तो छूंछीचोर भी मंत्री हैं !
  • जानिए,कब-कब हुआ जान का खतरा ?
  • शुजात को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई थी
  • तीसरे मोर्चे के गुब्बारे की हवा निकालेंगे प्रणब ?
  • देशभक्तों का महान संगठन ?
  • टूट रहा है ब्रांड मोदी का तिलिस्म !
  • किसान सड़क पर उतरे
  • लोहिया, आंबेडकर और चरण सिंह की अंगड़ाई
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.