अंबरीश कुमार
लखनऊ । समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता अमर सिंह जो पार्टी के राजपूत चेहरे के रूप में जाने जाते हैं उनका साथ ज्यादातर राजपूत नेताओं ने भी छोड़ दिया है। समाजवादी पार्टी के दिग्गज राजपूत नेताओं में पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, विधायक मयंकेश्वर सिंह, विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप, विधायक अक्षय प्रताप सिंह, जसवंत सिंह, राजकिशोर सिंह और सांसद नीरज शेखर आदि शामिल हैं। इनमें से कोई भी अमर सिंह के साथ नहीं है । राजा भैया, मयंकेश्वर सिंह, अक्षय प्रताप सिंह और अरविंद सिंह अमर सिंह के खास सिपहसालार माने जाते रहे हैं । ऐसे में इनका साथ छोड़ना अमर सिंह की राजपूत राजनीति के जरिए घातक साबित हो सकता है । खासकर उस हाóत में जब अमर सिंह राजपूत अस्मिता के अलमबरदार बनकर राष्ट्रीय फलक पर उनकी अनदेखी का सवाल उठा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक ज्यादातर राजपूत नेताओं ने मुलायम सिंह को भरोसा दिया है कि वे पार्टी के साथ रहेंगे ।दूसरी तरफ पार्टी ने अमर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले राजपूत नेता मोहन सिंह को उनकी जगह देकर रही सही कसर भी पूरी कर दी ।
मायावती के पिछले शासनकाल में राजा भैया पर जब पोटा लगाया गया तो अमर सिंह ने इसका विरोध करते हुए राजा भैया का खुलकर साथ दिया था । वे तब राजा भैया से मिलने जेल गए और इसे राजपूतों की अस्मिता पर हमला बताते हुए मायावती के खिलाफ अभियान छेड़ दिया था । उस दौर में अमर सिंह राजपूतों के नए झंडाबरदार के रूप में उभरे थे । क्षत्रियों के कार्यक्रमों में अमर सिंह कि फोटो पगड़ी में होती और हाथ में तलवार । वे लगातार क्षत्रिय महासभा के कार्यक्रमों में शरीक हुए और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद बनारस के जिस कार्यक्रम में पहुंचे थे वह भी क्षत्रिय महासभा का था। पर आज संकट के वक्त राजपूत नेताओं का अमर सिंह का साथ छोड़ना अमर के लिए बड़ा झटका है ।
दो विधायकों मयंकेश्वर सिंह और अरविंद सिंह गोप ने उन्नीस जनवरी के समाजवादी पार्टी के आंदोलन में शरीक होकर मुलायम सिंह के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी। दूसरी तरफ अक्षय प्रताप सिंह के पार्टी के विधायकों की बैठक में न पहुँच पाने की सफाई खुद राजा भैया ने शिवपाल यादव को दी । इससे ज़ाहिर है कि ज़्यादातर राजपूत विधायक पार्टी के साथ ही रहना चाहते हैं । सन २‚१२ में विधानसभा का चुनाव है और एक-आध विधायकों को छोड़कर ज्यादातर पार्टी के वोट बैंक के ही भरोसे हैं । क्योंकि प्रदेश में राजपूत बिरादरी का वोट बैंक पांच फीसदी से भी कम माना जाता है । हालाकि इसका फायदा समाजवादी पार्टी को भी मिला है । पर दोनों को एक दूसरे की ज़रूरत है। यही वजह है कि राजनैतिक भविष्य को देखते हुए राजपूत नेताओं में अमर सिंह से किनारा कर लिया है । अपवाद हैं तो मदन चौहान व अशोक चंदेल जैसे विधायक । पर इनकी ताकत पर उत्तर प्रदेश में अमर सिंह के लिए राजपूतों की राजनीति अब आसान नहीं ।जनसत्ता