विजय शंकर चतुर्वेदी
सोनभद्र, आज फिर एक बारहसिंघा की लाश रामगढ़ के जंगलो में पायी गयी, शिकारियों ने उसे गोली से मारा था । कुछ ही दिनों पहले मऊकला गांव में भालू की हत्या कर दी गयी थी । घोरावल क्षेत्र में अप्रवासी पक्षी साइबेरियन रोज मारे जा रहे हैं किन्तु बेखबर फारेस्ट विभाग के अधिकारी वैध और अवैध खनन की फाइलो में उलझे हुये हैं । पिछले दो माह में पुलिस द्वारा जब्त तेंदुआ, मगरमच्छ, हिरन, चीते की खालों ने साबित कर दिया है कि सोनभद्र वन्य जीवों के खाल तस्करी का भी प्रमुख केन्द्र बनता जा रहा हैं ।
सोनभद्र वन प्रभाग अंतगर्त रामगढ़ वन रेंज में कर्मनाशा नदी के तट पर तीन वर्षीय बारहसिंघें की लाश पड़ी मिली । शिकारियों ने उसे कई गोलियां मारी थी , लेकिन ग्रामीणों के आ जाने की वजह से वे उसे वहीं छोड़ कर भाग गये । जंगल में घूमरहे संदिग्ध शिकारियों को पकड़ने के लिये डीएफओ शिवपाल सिंह ने सख्त निर्देश जारी किये हैं साथ ही ग्रामीणों के बीच सूचनातंत्र विकसित करने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया है ताकि तत्काल ऐसी स्थितियों से निपटा जा सके । उन्हे मऊकला में भालू के शिकारियों को पकड़ने में सफलता भी प्राप्त कर ली है और चार व्यक्ति जेल भेज दिये गये है ।
सोनभद्र पुलिस ने दो हफ्तों के भीतर दो दर्जन से ज्यादा तेंदुआ, हिरन व मगरमच्छ की खालें बरामद कर आधे दर्जन व्यक्तियों को जेल भेजा है । पुलिस अधीक्षक डा0प्रीतिन्दर सिंह के अनुसार नक्सल उन्मुलन में कांबिंग कर रही पुलिस जंगल में संदिग्ध रूप से घूमते व्यक्तियों पर कड़ी पूछताछ करती हैं, ऐसे में दिन दहाड़े शिकार असंभव है । उनके अनुसार वन्यजीव तस्कर दूसरे स्थानों से भी खालें लेकर आते हैं । कुछ वर्ष पूर्व शिकार खेलने गये राजा विजयगढ़ की नक्सलियों द्वारा हत्या किये जाने के बाद रामगढ़ रेंज में शिकार में काफी कमी देखने को मिली थी । लेकिन दो माह के भीतर वन्यजीव खालों की बरामदगी व शिकार की घटनाओं ने पर्यावरणविदों के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी है । पेटा सदस्यों ने भी इस पर चिंता प्रकट करते हुये पत्राचार किया है । कांग्रेस के पीसीसी सदस्य राजेश द्विवेदी ने वन विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुये कहा कि वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी खनन पट्टों की अनापत्ति जारी करने व वैध-अवैध खनन की वसूली में व्यस्त है ।
घोरावल क्षेत्र में इस समय अप्रवासी पक्षी डेरा जमाते हैं । इन साइबेरियन पक्षियों के शिकार की खबरें तो रोज प्राप्त होती हैं लेकिन कार्यवाही की कोई समाचार नहीं मिलता है । जनपद का 54 प्रतिशत भूभाग वन आच्छादित है और फारेस्ट विभाग के चार प्रभागीय वनाधिकारी यहां बैठते है । सोनभद्र, ओबरा, रेणुकूट के अतिरिक्त कैमूर वन्य जीव प्रभाग रिजर्व सेंचुरी भी है। यहां के वनों में अत्यंत दुर्लभ प्रजातियों में कृष्णमृग उल्लेखनीय है । जिनकी खालों की तस्करी काफी ऊंचे दामों पर होती है । तेंदुआ भी यहां बहुतायत में पाया जाता है । डा0 पारसनाथ मिश्रा के अनुसार हम विदेशों में जाकर पर्यावरण पर लिखा भाषण तो पढ़ आते है अपनें स्थानों को नहीं देखते जहां वन और वन्यजीव दोनों असुरक्षित है ।