अंबरीश कुमार
दमन , दिसंबर।पश्चिम की गंगा यानी दमन गंगा अब अरब सागर के पानी में जहर घोल रही है जिसके चलते उथले समुंद्र की मछलियाँ ख़त्म हो चुकी है । पुर्तगाली संस्कृति को संजोए इस खूबसूरत सैरगाह के मछुवारे अब बहुत कम समुंद्र में जाते है ।नानी दमन में जहाँ पर दमन गंगा और अरब सागर का पानी मिलता है वहा पर मछुवारों की नावें खड़ी नज़र आती है ।पहले यहाँ के मछुवारे तडके ही समुंद्र में चले जाते थे और लौटते तो खर्चा निकाल कर समूचे परिवार का हफ्ते भर का खर्चा आराम से निकाल जाता ।पर नदी और समुंद्र के पानी में जहर घुलने के बाद मछुआरे बदहाली के शिकार हो चुके है ।नावें खड़ी हो गई है और मछुवारे पुस्तैनी कम धंधा छोड़ नौकरी ढूंढ़ रहे है । पर मामला यहीं तक सीमित नहीं है पानी में घुला जहर अब भूजल पर असर डाल रहा है । दमन में मध्य वर्गीय परिवार मिनरल वाटर इस्तेमाल करता है । दमन गंगा की मछलिया खत्म होती जा रही है औरतट से लगा अरब सागर का बीस किलोमीटर का इलाका मछली विहीन हो चुका है ।
आज सुबह ही जम्पोर के समुंद्र तट एक जोड़ा समुंद्र के पानी में जाने के बाद रेत पर लौटते ही मिनरल वाटर से पैर धोता नज़र आया । इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पानी कितना प्रदूषित हो चुका है । दमन वाही जगह है जहाँ सन १५३१ में पुर्तगाली राज शुरू हुआ जो १९६१ तक चला । यहाँ के समाज ,संस्कृति और आबोहवा पर पुर्तगाल का असर महसूस किया जा सकता है । कभी पुर्तगालियों का देश रहा गोवा , दमन व दीव तीन हिस्सों में बंटा है और दमन से दोनों की दूरी ६०० किलोमीटर से ज्यादा है । गोवा अलग राज्य बन चुका है तो दमन -दीव केंद्र शाषित इलाका है । सैलानी और शराब यहाँ की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार है । गोवा ,दमन और दीव का इतिहास और संस्कृति साझा है । यही वजह है कि गोवा के बाद सबसे ज्यादा सैलानी दमन दीव में जुटते है ।बीते २५ दिसंबर को दमन के जम्पोर और देविका समुंद्र तट पर मेले जैसा माहौल था ।जम्पोरे समुंद्र तट के आसमान पर पैरासूट से उड़ाते बच्चे नज़र आते है तो पानी में दौड़ती घोड़ो वाली बग्घिया ।सैलानियों की भीड़ के साथ वीआईपी भी यहाँ आ रहे है । दिल्ली के उप राज्यपाल तेजिंदर खन्ना सर्किट हाउस में ऊपर के कमरे में ठहरे हुए थे । पर इस सब के बावजूद किसी की नज़र काली रेत के इस समुद्र तट पर काले होते पानी पर नहीं जा रही है । बच्चो के एक पार्क का उदघाटन करते हुए तेजिंदर खन्ना ने दमन को एक साल में और साफ़ सुथरा बनाने का सुझाव जरुर दिया पर पानी के प्रदुषण पर उनका भी ध्यान नहीं गया ।
दमन गंगा को गटर बनाने का काम गुजरात के औद्यिगिक शहर वापी ने किया है जो खुद दुनिया के प्रदूषित शहरों में शुमार किया जाता है । यहाँ के केमिकल उद्योग के जहरीले कचरे ने दमन गंगा के पानी को इतना जहरीला बना दिया है कि मछलिया खत्म हो गई है । दमन वाइन मर्चेंट एसोसिएसन के अध्यक्ष लखन तंदेल खुद भी मछुवारे रहे है और प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाते रहे है । लखन तंदेल ने जनसत्ता से कहा -वापी के केमिकल उद्योग ने दमन गंगा का पानी जहरीला बना दिया है । दर्जनों उद्योग ऐसे है जी जहरीला कचरा सीधे नदी में बहा देते है । कुछ तो अब जमीन में जहरीला कचरा डाल रहे है जिससे भूजल पर असर पड़ रहा है । सरकार ने प्रदूषित पानी को साफ़ करने का संयंत्र लगाया है पर वह बंद पड़ा है । इस सब की कीमत यहाँ के मछुवारे चुका रहे है । अब जहरीले पानी की वजह से छोटे मछुवारे बर्बाद हो गए है । वे छोटी नावों से गहरे समुंद्र में जा नहीं सकते और उथले समुंद्र की मछलिया मर चुकी है ।
दमन प्रशासन के चीफ इंजीनियर आरएन सिंह ने कहा -दमन गंगा का पानी इतना जहरीला हो चुका है की अब उसमे मछली खत्म हो चुकी है । जब यह पानी अरब सागर में मिलता है तो कई किलोमीटर इलाके में यह फ़ैल जाता है जिससे समुंद्र में भी प्रदूषण बढ़ गया है । केंद्र ने इस बारे में ठोस पहल करने का भरोसा भी दिया है ।
सबसे ज्यादा समस्या बरसात में होती है जब वापी के उद्योग अपना कचरा पानी में बहा देते है । कई मछुवारों ने बताया कि बरसात में तो समुंद्र में भी मरी हुई मछलिया उतराती नज़र आती है । जनसत्ता