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मलयालम कविता के हिंदी संग्रह का लोकार्पण

जनादेश ब्यूरो

कालीकट , अक्टूबर| साहित्य अकादमी पुरस्कार , कबीर सम्मान आदि से सम्मानित मलयालम के सुप्रसिद्ध कवि अक्कितम की प्रतिनिधि कविताओ का वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व कवि उमेश चौहान द्वारा हिंदी में अनुदित तथा भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित कविता -संग्रह 'अक्कितम की प्रतिनिधि कवितायेँ का लोकार्पण विगत २९ अक्टूबर को कालीकट के खचाखच भरें अलकापुरी सभागार में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध मलयालम लेखक श्री एम. टी. वासुदेवन नायर द्वारा किया गया . इस अवसर पर स्वयं कवि अक्कितम नम्बूदिरी ने उमेश चौहान को शाल व प्रेमोपहार अर्पित कर सम्मानित किया.
संग्रह की प्रति डॉ. सी. राजेंद्रन ने ग्रहण की. कार्यक्रम का आयोजन भाषा समन्वय वेदी द्वारा किया गया जिसे अध्यक्ष तथा कालीकट विस्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अरासु ने कार्यक्रम में अनुवाद संग्रह पर विस्तृत टिपण्णी की इस अवसर पर विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ. अनवर जहाँ जुबेरी ने २० महिला मलयालम कथाकारों की कहानियों वालें अनुवाद हिंदी पत्रिका के निदेशांक का भी लोकार्पण किया . कार्यक्रम में बोलेट हुए श्री एम. टी. वासुदेवन नायर नें कहाँ की अनुवाद केवल भाषांतरण नहीं होंगा यह दो रचनाकारों के विचारों तथा दो भिन्न संस्कृतियों का मिलन भी होता है . हम दुसरे प्रदेशों की भू-प्रकृति एवं उसके सांस्कृतिक विरासत व रीत रिवाज़ से अनुवाद के माध्यम से ही परिचित होते है भावः समन्वयता के बिना केवल भाषाई ज्ञान के आधार पर अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता . बीते वर्षो में जब सरकारी संस्थाओ द्वारा भाड़े पर अनुवाद कराये जाने लगे तो उसका सारा जायका ही बिगड़ गया . अब फिर से नेशनल बुक ट्रस्ट आदि ने इस दिशा में अपेक्षित सुधर किया है एक दो ने उमेश चौहान की अनुवाद शैली की भूरी-भूरी प्रशंसा की . अक्कितम व अन्य वक्ताओं नें भी उमेश के अनुवाद को काफी सराहा . इस संकलन में अक्कितम के १९५२ में प्रकशित बहुचर्चित खंड काव्य बीसवीं सदी का इतिहास तथा उसके बाद समय समय पर प्रकाशित अन्य काव्य संग्रहों की  बीस कविताओं को शामिल किया गया है . आलोचकों द्वारा बीसवीं सदी का इतिहास की तुलना टी. एस.एलियट की सुप्रसिद्ध काव्यकृति वेस्ट लैंड से की जाती है संग्रह में शामिल अक्कितम की योद्धा, नित्य मेघ, चाकनचूर संसार,भारतीय का गान, संगमरमर की कहानी, तुलसी, पिता आभार जताते है, कृतज्ञता मात्र , आदि कवितायेँ भी अत्यधिक लोकप्रिय हुई है. अक्कितम की लोकप्रिय मलयालम कविताओं को हिंदी में  पढना एक विरल अनुभव हैं. उमेश नें इन कविताओं के शाब्दिक रूपांतरण के साथ -साथ अपने अनुवाद में अक्कितम की भावः भूमि को भी बखूबी उतरा है जिससे इन कविताओं को हिंदी में पढ़ते समय मूल्य मलयालम कविताओं को पढ़ने जैसा ही आनंद मिलता है. पुस्तक में श्री एम.टी.वासुदेवन नायर द्वारा अक्कितम के बारें में लिखे गए एक लेख तथा मेरा काव्य संसार शीर्षक से स्वयं अक्कितम द्वारा अपनी काव्य रचना के बारें में लिखे गए एक लेख को भी सम्मिलित किया गया है

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