तो सुशासन का श्राद्ध कर रहे हैं नीतीश बाबू !

अयोध्या के अध्याय की पूर्णाहुति ! अब आगे क्या ? हिंदी अखबारों में हिंदू राष्ट्र का उत्सव ! केरल में खुला संघ का सुपर मार्केट ! एमपी में कांग्रेस अब ‘भगवान’ भरोसे धर्म-धुरंधर’ फिर भीख पर गुज़ारा करेंगे राजनीतिक इष्टदेव तो आडवाणी ही हैं प्रधान मंत्री द्वारा राम मंदिर के शिलान्यास के खिलाफ भाकपा-माले का प्रतिवाद राममंदिर के भूमि पूजन इनका है अहम रोल राम मंदिर संघर्ष यात्रा की अंतिम तारीख पांच अगस्त यह कर्रा गांव का शरीफा है बदलता जा रहा है गोवा समुद्र तट पर बरसात बाढ़ से मरने वालों की संख्या 19 आखिर वह दिन आ ही गया ! बिहार में कब चुनाव होगा? मंदिर निर्माण का श्रेय इतिहास में किसके नाम दर्ज होगा ? राष्ट्रीय कंपनी अधिनियम पंचाटः तकनीकी सदस्यों पर अनावश्यक विवाद बहुतों को न्यौते का इंतजार ... आत्महत्या की कहानी में झोल है पार्षदों को डेढ़ साल से मासिक भत्ता नहीं मिला

तो सुशासन का श्राद्ध कर रहे हैं नीतीश बाबू !

अंबरीश कुमार 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने तथाकथित सुशासन का श्राद्ध करते नजर आ रहे हैं . फिलहाल बिहार के मौजूदा हाल से तो यही लग भी रहा है .भाजपा भी यही चाहती है .और नीतीश वही सब कर रहे हैं जो भाजपा चाहती है .बिहार में भाजपा अपना जनाधार मजबूत कर रही है .इसलिए वह भी इनका सुशासन तार तार करना चाहती है .वैसे भी सुशासन तो बिहार में कबका निपट चुका है .अब वे अपने ही सुशासन का तर्पण कर रहे हैं .जरा यह लाक डाउन हटे तो एक नया बिहार नजर आएगा .क्या हाल है बिहार का यह अभी लाक डाउन से पर्दे में है .राज्य में दो महीने में निराश हताश शिक्षकों की हालत सबसे ज्यादा ख़राब है .वे भूख और भुखमरी से भी जूझ रहे हैं .तीन दर्जन से ज्यादा शिक्षकों की जान जा चुकी है .बिहार में लाखों शिक्षक दो महीने से हड़ताल पर हैं. सरकार ने उनका वेतन रोक रखा है. फरवरी महीने में जितने दिनों शिक्षकों ने काम किया था उस अवधि का भी वेतन सरकार ने रोक रखा है.शिक्षकों की बदहाली के साथ अब कोरोना की मार झेलने के लिए बिहार को तैयार रहना चाहिए .

कोरोना के चलते सबसे ज्यादा हैरान परेशान बिहार का हाशिए का समाज हुआ है .वह समाज जो दिल्ली ,मुंबई ,चेन्नई और कोलकता में लाक डाउन के चलते अचानक फंसा तो फंसा ही रह गया .कुछ पैदल ही निकल पड़े तो कुछ किसी साधन से .पर इसमें सब अपने वतन पहुंच गए हों ऐसा भी नहीं हुआ .उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के मजदूरों के लिए भी बस मुहैया कराई तो कोटा में फंसे मध्य वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए भी .पर नीतीश कुमार ने एक बार भी यह प्रयास नहीं किया कि प्रधानमंत्री से बात कर वे बिहार के मजदूरों को निकलने के लिए विशेष रेल का इंतजाम कराते .मुंबई ,दिल्ली ,हैदराबाद आदि से ज्यादा से ज्यादा बीस ट्रेन से इन सभी को बिहार पहुंचाया जा सकता था .दरअसल नीतीश कुमार ने इसका प्रयास ही नहीं किया यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू है .अगर यूपी में योगी आदित्यनाथ तीन सौ बस भेज कर कोटा से पांच हजार छात्रों को राज्य ला सकते थे तो सुशासन का नारा देने वाले नीतीश कुमार क्या यह नहीं कर सकते थे .योगी तो मठ के महंत रहे हैं पहली बार देश का सबसे बड़ा सूबा संभाल रहे हैं .ऐसे संकट के समय वे काम करते दिख रहे हैं .यह मामूली बात नहीं है .वे गाजियाबाद भी बस भेजे थे यह याद रखना चाहिए .और नीतीश बाबू.

वे तो बिहार आंदोलन से निकले .जेपी लोहिया की धारा वाले रहे .केंद्र में रहे तो कितने साल से बिहार संभाल रहे हैं .पिछली सत्ता तो वे जिन लालू प्रसाद यादव की मदद से पाएं उन्हें फिर दांव दिया .और अब वे समूचे बिहार को दांव दे रहे हैं .किसे वे मूर्ख बना रहे हैं .देशभर में जारी लॉकडाउन के बीच बिहार के बीजेपी विधायक अनिल सिंह सड़क मार्ग से ही कोटा जाकर अपनी बेटी को बिहार ले आए. जबकि लॉकडाउन की वजह से कोटा में फंसे बिहार के मध्य वर्गीय परिवार के छात्रों को लेकर नीतीश कुमार ने साफ कहा  कि कोटा में फंसे छात्रों को वापस नहीं बुलाया जाएगा क्योंकि ऐसा करने से लॉकडाउन का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा. ये क्या दो तरह का लाक डाउन है .भाजपा का अलग और जेडी यू का अलग .यूपी का अलग और बिहार का अलग .इसमें गुजरात भी जोड़ लीजिये जिनके राज्य के लोगों को यूपी और उतराखंड से लक्जरी बस से भेजा गया था .पर बिहार के साथ यह नहीं हो पाया .बिहार के मजदूर तो खैर क्या ये लाते मध्य वर्ग उच्च वर्ग के परिवार के छात्रों को भी सरकार ने इस लायक नहीं समझा .ये उसी मध्य वर्गीय परिवार के छात्र हैं जो थाली लोटा पीटकर इनके खेमे का समर्थन करता रहा है .ऐसा दोहरा चरित्र फिलहाल देश में किसी मुख्यमंत्री का तो नहीं दिख रहा है .

अब जरा कोरोना पर भी बात हो जाए .पटना से  फ़ज़ल इमाम मल्लिक के मुताबिक वायरस के कहर से निपटने के लिए नीतीश कुमार भी प्रधानमंत्री के सामने रोना रो रहे थे. उन्होंने कई सवाल उठाए थे. लेकिन अब उनके ही स्वास्थ्य मंत्री ने नीतीश कुमार की पोल खोल कर रख दी है. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि उपकरण इतना ज्यादा मौजूद है कि उसका उपयोग नहीं हो रहा है. कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की थी. इसी दौरान नीतीश कुमार न कहा कि बिहार दवा से लेकर कोरोना के इलाज के लिए जरूरी उपकरण के लिए बुरी तरह परेशान है. बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा था कि हमने पांच लाख पीपीई किट मांगा था लेकिन केंद्र से सिर्फ चार हजार मिले. बिहार ने दस लाख एन-95 मास्क मांगा लेकिन सिर्फ 50 हजार मिले. दस लाख सी प्लाई मास्क की मांग की गई लेकिन सिर्फ एक लाख मिले. दस हजार आरएनए एक्सट्रैक्शन किट की मांग की गई थी लेकिन मिले सिर्फ ढाई सौ.

 बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने भी मीडिया से बात करते हुए संसाधनों की कमी का रोना रोया था. उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार से उन्हें जरूरी सामान नहीं मिल पा रहे हैं. लेकिन अब बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने नीतीश कुमार के दावों की हवा निकाल कर रख दी है. उन्होंने जो कहा उससे तो लगता है कि नीतीश कुमार झूठ बोल रहे हैं. इससे नीतीश कुमार और मंगल पांडेय् आमने सामने आ गए हैं. मंगल पांडेय ने ताबड़तोड़ ट्वीट कई किए. उन्होंने बिहार में कोरोना से बचाव और इलाज के लिए उपलब्ध सामानों की पूरी सूची जारी करते हुए कहा कि सामान इतना है कि उसका उपयोग नहीं हो रहा है.तो साफ़ है कि नीतीश कुमार खुद अपने सुशासन का श्राद्ध कर रहे हैं .फोटो द प्रिंट से साभार 


Share On Facebook
  • |

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :