केजरीवाल की राह पर चलतीं दीदी

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केजरीवाल की राह पर चलतीं दीदी

प्रभाकर मणि तिवारी

कोलकता. दिल्ली विधानसभा में आप को मिली कामयाबी ने दीदी यानी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी को भी केजरीवाल की राह पर चलने पर मजबूर कर दिया है. इसी रणनीति के तहत वेअगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पेश राज्य के आखिरी पूर्ण बजट में आम लोगों और खासकर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों मेहरबान हो गई हैं. ममता के इस बजट को राजनीतिक हलकों में पूरी तरह चुनावी बजट माना जा रहा है. इसके तहत तीन महीने में 75 यूनिट बिजली खर्च करने वालों को एक पैसा भी खर्च नहीं करना होगा.

सरकार ने अपने बजट में राज्य के पिछड़े व गरीब तबके के लोगों पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसमें अनुसूचित जाति के वरिष्ठ नागरिकों के लिए “बंधु योजना” व अनुसूचित जनजाति श्रेणी के वरिष्ठ नागरिकों के लिए “जन जोहार योजना” शुरू करने का प्रस्ताव पेश किया गया है. इसके तहत इस समुदाय के 21 लाख बुजुर्गों को हर महीने एक हजार रुपए की पेंश दी जाएगी. इसके लिए तीन हजार करोड़ का प्रावधान रखा गया है. पिछड़े तबके के डेढ़ करोड़ परिवारों की सामाजिक सुरक्षा योजना पर पांच सौ करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे.


सरकार की ओर से घोषित योजनाओं में से ज्यादातर उन इलाकों में लागू की जाएंगी जहां बीते लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था. दरअसल, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की ज्यादातर आबादी उत्तर बंगाल के छह जिलों और जंगलमहल के नाम से कुख्यात रहे झारखंड से सटे इलाको में रहती है. इन इलाकों की 15 लोकसभा सीटों में से तृणमूल को महज दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा था जबकि भाजपा को 12 सीटें मिली थीं. सरकार ने इसके अलावा एक हजार करोड़ के कोष के साथ दो अन्य योजनाएं शुरू करने का भी एलान किया है. इनमें बेरोजगार युवकों को लिए “कर्मसाथी प्रकल्प” औऱ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए “बिना मूल्य सामाजिक सुरक्षा योजना” शामिल है. अब इन मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा योजना का पूरा खर्च सरकार ही उठाएगी. पहले सरकार इस मद में हर महीने 30 रुपए देती थी और बाकी 25 रुपए मजदूरों को देने पड़ते थे. वित्त मंत्री अमित मित्र का कहना था कि कर्म साथी प्रकल्प के तहत हर साल एक लाख बेरोजगार युवकों को तीन वर्ष के लिए आसान शर्तों पर कर्ज दिया जाएगा.


सरकार ने उन लोगों को मुफ्त बिजली देने का एलान किया है जिनके घरों में तिमाही 75 यूनिट की खपत होती है. वित्त मंत्री अमित मित्र का दावा है कि इससे 35 लाख परिवारों को फायदा होगा. इस मद में दो सौ करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. ममता हालांकि अपने बजट के बहाने केंद्र पर हमला करने से भी नहीं चूक रही हैं. उन्होंने कहा है कि किसी सरकारी कंपनी की बिक्री के बिना ही सरकार ने आम लोगों के लिए बजट पेश किया है.

विपक्ष ने ममता बनर्जी सरकार के इस बजट को चुनावी बजट करार देते हुए इसकी खिंचाई की है. भाजपा ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस के पैरों तले की जमीन तेजी से खिसक रही है. इसलिए वोटरों को लुभाने के लिए उसने सरकारी खजाने का मुंह खोल दिया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि सरकार ने बीते आठ-नौ वर्षों के दौरान पिछड़े तबके के लोगों के हित में कुछ खास नहीं किया है. अब उनका समर्थन पाने के लिए वह हड़बड़ी में तमाम योजनाएं लागू कर रही है. लेकिन अब महज कागजी योजनाओं से लोगों को मूर्ख नहीं बनाया जा सकता.

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