प्रधान मंत्री द्वारा राम मंदिर के शिलान्यास के खिलाफ भाकपा-माले का प्रतिवाद

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प्रधान मंत्री द्वारा राम मंदिर के शिलान्यास के खिलाफ भाकपा-माले का प्रतिवाद

डॉ. लीना पटना. भाकपा-माले ने 5 अगस्त 2020 को काला दिवस बताते हुए पूरे बिहार में प्रतिवाद दर्ज किया और कई सवाल उठाए. माले का आरोप है कि देश की जनता को कोविड-19 और बाढ़ जैसी जानलेवा संकटों से बचाने की बजाय भारत के प्रधानमंत्री मंदिर के शिलान्यास समारोह को राजनीतिक मंच में तब्दील करने में व्यस्त हैं. साथ ही जब अनलॉक-3 के दिशा - निर्देशों के अनुसार सभी धार्मिक आयोजनों पर रोक है और 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को घर पर रहने की सलाह दी गयी है. ऐसे में 69 वर्षीय प्रधानमंत्री इन दिशा निर्देशन का उल्लंघन करते हैं? भाकपा-माले का आरोप है कि अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन समारोह को सरकारी आयोजन में तब्दील कर दिया गया. उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार की इसमें पूर्ण भागीदारी के खिलाफ 5 अगस्त को भाकपा-माले के देशव्यापी प्रतिवाद के तहत पूरे बिहार में भी माले कार्यकर्ताओं ने इसे काला दिवस की संज्ञा देते हुए प्रतिवाद दर्ज किया. प्रतिवाद के जरिये भाकपा-माले ने कई सवाल उठाए. राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि राम के नाम पर बहुसंख्यक की आक्रमकता और धर्म व राजनीति का घालमेल देश के संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर हमला है और भारतीय संविधान की मूल भावना को नष्ट करने का कृत्य है. सुप्रीम कोर्ट के जिस फैसले ने मंदिर निर्माण की राह खोली थी, उसी फैसले में 06 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढाहने की आपराधिक कृत्य के रूप में स्पष्ट तौर पर आलोचना की गयी है. केंद्र सरकार का प्रधानमंत्री के स्तर पर भूमि पूजन में शरीक होना, उस अपराध को वैधता प्रदान करने की कार्यवाही है. भाकपा-माले का यह भी आरोप है कि 69 वर्षीय प्रधानमंत्री अनलॉक-3 के दिशा निर्देशों का उल्लंघन कर धार्मिक समारोह में शामिल हुए. भारत के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एक मंदिर के भूमिपूजन समारोह से राजनीतिक लाभ बटोरने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार धार्मिक आयोजनों से दूर रहे और धर्म का राजनीतिकरण करना बंद हो. साथ ही जन स्वास्थ्य को प्रमुखता दी जाए. नेता महबूब आलम ने कहा कि जब कोरोना के केस दिन दूनी-रात चौगुनी गति से बढ़ रहे हैं, सरकार अपनी पूर्ण विफलता को लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ के जरिये ढकना चाहती है. भाकपा-माले द्वारा राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के तहत पटना के कई स्थानों सहित आरा, जहानाबाद, अरवल, सिवान, गया, भोजपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, गोपालगंज, पूर्णिया आदि कई जिलों में सैंकड़ों जगह शारीरिक दूरी के नियमों का ख्याल रखते हुए प्रतिवाद दर्ज किए गए.

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