राममंदिर के भूमि पूजन इनका है अहम रोल

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राममंदिर के भूमि पूजन इनका है अहम रोल

राजेंद्र कुमार
अयोध्या .
अयोध्या में भव्य श्रीरामजन्मभूमि  मंदिर निर्माण के भूमि पूजन की सारी तैयारियां पूरी हो गई है. अब बुधवार 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीरामजन्मभूमि मंदिर निर्माण का भूमि पूजन करेंगे. इसके बाद से ही मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से प्रारंभ हो जाएगा. भूमिपूजन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए साधू संत अयोध्या पहुंच गए हैं. भूमि पूजन के इस कार्यक्रम को लेकर बीते दो महीनों में पर्दे के पीछे छह प्रमुख लोगों की अहम भूमिका रही है. अयोध्या के प्रशासनिक अफसरों के अनुसार इन छह लोगों ने ही सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद बहुत गुप्त तरीके सेराम मंदिर ट्रस्ट बनाने से लेकर भूमि पूजन का दिन तय करने तक के कई कार्य किये. इनमें सबसे अहम भूमिका नृपेंद्र मिश्रा की बतायी जा रही है. कहा जा रहा है कि नृपेंद्र मिश्रा ने ही अयोध्या के तमाम साधू महंत और विहिप के पदाधिकारियों से संपर्क कर भूमि पूजन के दिन का निर्धारण करने के साथ ही इस संबंध में आयी तमाम बाधाओं को दूर किया. नृपेंद्र मिश्रा ने किन लोगों की मदद से यह सब किया? उनके बारे में जाने : -
नृपेंद्र मिश्रा
अयोध्या में बनने जा रहे राम मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्रा के पास है. यूपी काडर के आईएएस रहे नृपेंद्र मिश्रा राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष है. 2014 से पीएम नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे मोदी सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने का काम किया है. मिश्रा को निर्माण समिति का अध्यक्ष इसलिए बनाया गया है ताकि मंदिर तय सीमा में बिना किसी विवाद के साथ पूरी भव्यता के साथ तैयार हो सके. मिश्रा 1967 बैच के यूपी काडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं. वह मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह प्रमुख सचिव रहे थे. बताया जाता है कि भूमि पूजन में किस राज्य के कौन -कौन से पंडित शामिल ह होंगे? इसकी सूची उन्होंने महंत नृत्य गोपाल दास से राय मशविरा करके तैयार की. यही नहीं भूमि पूजन के शुभ मुहूर्त को तय करने में भी उन्होंने देश भर के विद्वानों की राय ली और उसे प्रधानमंत्री को बताकर उसका अंतिम फैसला कराया. मंदिर के डिज़ाइन को बदले जाने को लेकर भी उन्होंने साधू संतों तथा विहिप के पदाधिकारियों को मनाने का कार्य किया.  

महंत नृत्य गोपाल दास
राम मंदिर आंदोलन में महंत रामचंद्र परमहंस के बाद जिन प्रमुख संतों ने अयोध्या में सड़क से लेकर कोर्ट तक संघर्ष किया उनमें सबसे प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास है. महंत नृत्य गोपाल दास को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है. दशकों से नृत्यगोपाल दास राम मंदिर आंदोलन के संरक्षक की भूमिका में रहे हैं. मंदिर निर्माण के लिए चंदा जुटाने से लेकर कई काम इन्हीं के नेतृत्व में होते आए हैं. नृत्यगोपाल दास का 6 दिसंबर 1992  को कारसेवकों द्वारा बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की घटना के पहले और बाद में कांग्रेस, बसपा और सपा सरकारों ने कई तरह का उत्पीड़न किया. 11 जून 1938 को यूपी के मथुरा में जन्में नृत्यगोपाल दास ने 12 वर्ष की उम्र में ही वैराग्य धारण कर अयोध्या आ गए थे. वह अयोध्या में मणिराम दास की छावनी में रहते हैं. उनके समर्थक देश विदेश तक में हैं. महंत नृत्य गोपाल दास साधुओं के एक बहुत बड़े तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं.    

चंपत राय
विश्व हिंदू परिषद (विहिप)  के उपाध्यक्ष चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे है. राय के पास विहिप के विस्तार का जिम्मा भी है. राय को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव जैसे अहम पद की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. ट्रस्ट की बैठक हो या राम मंदिर से संबंधित कोई मुद्दा चंपत राय द्वारा ही अधिकृत किया जाता है. मीडिया में बयान देने को आतुर रहने वाले चंपक राय की राम मंदिर आंदोलन को राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन बनाने में अशोक सिंघल की बाद अहम भूमिका रही है. राम मंदिर मामले की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान राय हमेशा मौजूद रहते थे. वहीं वे हमेशा से कहते आए है कि राम मंदिर का निर्माण विहिप के मॉडल पर ही किया जाएगा. ऐसे विचारों वाले चंपक राय से नृपेंद्र मिश्रा को मंदिर का डिजाइन बदलने के लिए आसानी से मना लिया. यही नही मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तिथि को लेकर भी उन्होंने किसी प्रकार का अडंगा नही लगाया. भूमि पूजन के समारोह में किस किस को न्यौता भेजा जायेगा यह दायित्व उन्हें निभाने की जिम्मेदारी दी गई जिसे उन्होंने बेहद गोपनीय रखते हुए निभाया है.

के. पराशरण
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के.पराशरण श्री रामजन्मभूति तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सदस्य है. पराशरण  लंबे वक्त से सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की पैरवी करते आए है. मंदिर के पक्ष में फैसला आने में इनका अहम योगदान रहा है. पराशरण को पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे पुरस्कार भी मिल चुके हैं. उन्होंने मंदिर निर्माण को लेकर नृपेंद्र मिश्रा के साथ मिलाकर जो प्लान तैयार कराने में आपनी राय दी. और ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होकर मंदिर निर्माण के संबंध में क्या -क्या कदम उठाने चाहिए? इसे लेकर अपने अहम सुझाव दिए.

कामेश्वर चौपाल
कामेश्वर चौपाल बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं. चौपाल रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े फिर विहिप से जुड़े बाद में भाजपा में आए. इन्हें श्रीरामजन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दलित समुदाय के सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है. 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में चौपाल ने ही राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी. बीजेपी में उनको बहुत सम्मान दिया जाता है. उनकी किसी भी राय की अनदेखी ट्रस्ट में नही की जाती है.
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देव गिरि जी महाराज
स्वामी देव गिरी महाराज के पास श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी है. मंदिर निर्माण के लिए जुटाए जाने वाले चंदे का पूरा लेखा जोखा इन्हीं के पास है. महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में 1949 में जन्मे देव गिरी महाराज ने 17 वर्ष की उम्र से ही उपदेश देना शुरु कर दिया था. रामायण,भगवत गीता सहित पौराणिक ग्रंथों का देश विदेश में प्रवचन करते है हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती के साथ-साथ संस्कृत भाषा में भी अच्छी पकड़ रखते है. देव गिरी महाराज ने ही गीता परिवार की स्थापना की है. उन्होंने ने ही ट्रस्ट का खाता खुलवाया और मंदिर निर्माण के लिए विहिप के साथ मिलकर कैसे देश भर में लोगों ने आर्थिक सहयोग लिया जाए? इसकी योजना तैयार की है. भूमि पूजन के बाद इस दिशा में कदम उठाये जायंगे. गाँव-गाँव में मन्दिर निर्माण के लिए लोगों से सौ रूपये का आर्थिक सहयोग देने का आग्रह किया जाएगा.    

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