बिहार में कब चुनाव होगा?

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बिहार में कब चुनाव होगा?

आलोक कुमार
पटना.
आज 16वीं विधानसभा का सत्रावसान हो गया.  ज्ञान भवन परिसर में आयोजित एक दिवसीय सत्र की समाप्ति की घोषणा सभावति विजय कुमार चौधरी ने की.इसके पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में कब चुनाव होगा? वह तो चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है.तबतक सभी लोग मिलकर कोरोना व बाढ़ से मुकाबला करें.माननीय सदस्य कहने लगे कि अधिकारी तो हमलोगों पर भारी हो जाते हैं सुनते ही नहीं है. इससे आगे सीएम ने कहा कि बिहार के खंजाना पर आपदा पीड़ितों का अधिकार है.इस ओर सचेत होकर सरकार कार्यशील है.
बिहार में विपक्ष के हंगामों के बीच बिहार विधानमंडल का एक दिवसीय मानसून सत्र राजधानी पटना के ज्ञान भवन में शुरू हुआ. कोरोना संकट के बीच सामाजिक दूरी समेत अन्य एसओपी का पालन करते हुए बिहार विधान मंडल का एक दिवसीय मानसून सत्र सोमवार को राजधानी के सम्राट अशोक कन्वेंशन केन्द्र के ज्ञान भवन में आयोजित किया गया.बिहार विधानमंडल भवन के बाहर पहली बार होने वाला यह आयोजन इस मायने में ऐतिहासिक है.
 विधानमंडल सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने हाथों में पोस्टर लेकर नीतीश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.बिहार विधानसभा का एक दिवसीय मानसून सत्र आज शुरू होने से पहले विपक्ष ने हाथों में पोस्टर लेकर नारेबाजी की.विपक्ष राज्य में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण और कई जिलों में आई बाढ़ को लेकर बिहार विधानसभा चुनाव नहीं कराने की मांग कर रहे थे.
ज्ञान भवन के पहले तल पर विधान परिषद जबकि दूसरे तल स्थित प्रेक्षागृह में विधानसभा की बैठक चली. सदन के संचालन को लेकर चाक-चौबंद व्यवस्था की गयी .पूरा ज्ञान भवन परिसर विधानमंडल परिसर के रूप में तब्दील नजर आया. विधानसभा या विधान परिषद का आधिकारिक कार्ड रखने वालों को ही परिसर के अंदर जाने की अनुमति दी गई. गेट पर ही सेनेटाइजर, मास्क समेत तमाम ऐहतियाती व्यवस्था की गई.
बिहार विधानसभा की कार्यवाही करीब चार घंटे चली.सभाध्यक्ष विजय कुमार चौधरी के आरंभिक संबोधन के साथ बैठक आरंभ हुई.दोनों सदनों में राजकीय विधेयक और राजकीय कार्य सदन पटल पर रखा गया. वित्तीय वर्ष 2020-21 का प्रथम अनुपूरक व्यव विवरणी सदन पटल पर रखा गया और उसके अनुरूप विनियोग विधेयक के माध्यम से सरकार को राशि के खर्च की अनुमति सदन से मिल गयी.सदन की कार्यवाही स्थगित रहने के दौरान दिवंगत सदस्यों के बारे में शोक प्रकट किया गया.वहीं विधान परिषद के 195वें सत्र की शुरुआत में नये सदस्यों का शपथ ग्रहण हुआ. परिषद के कार्यकारी सभापति संबोधन कर सत्र की शुरुआत किया.

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बिहार पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सूबे में सियासी पारा भी चढ़ता जा रहा है.बिहार विधानसभा में सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला उठाया गया. सुशांत के चचेरे भाई और बीजेपी विधायक नीरज सिंह बबलू ने इस मामले को उठाया और सीबीआई जांच की मांग की.इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सुशांत केस में सीबीआई जांच कराने की मांग की है.बिहार सरकार के मंत्री जय सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का रवैया संघीय ढांचे के खिलाफ है. बिहार विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा देखने को मिला है.

बिहार के आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी को मुंबई में क्वारंटीन किए जाने को लेकर बिहार में बयानबाजी तेज हो गई है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जो कुछ हुआ, ठीक नहीं हुआ है.हम अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.पटना सिटी के एसपी विनय तिवारी के साथ मुंबई में जो कुछ हुआ, यह गलत बात है. हम इस पर महाराष्ट्र सरकार से बात करेंगे. इस बीच विधानसभा में भी सुशांत मामला की गूंज सुनाई दी. जिसमें तेजस्वी यादव ने सीबीआई जांच की मांग की है.

एक दिवसीय बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार और सुशील मोदी ने 15 वर्षों में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी आईसीयू में पहुंचा दिया है. केंद्र सरकार की रिपोर्ट और मानक संस्थानों की जांच में बिहार सबसे फिसड्डी है.

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से तय मानक प्रति हज़ार आबादी पर स्वास्थ्य केंद्र में बिहार सबसे आखिरी पायदान पर है. बिहार में डॉक्टर मरीज अनुपात पूरे देश में सबसे ख़राब है. जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियमों अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रति एक हज़ार आबादी एक डॉक्टर होना चाहिए (1 :1000 ) पर बिहार में एक डॉक्टर पर 3207  ( 1:3207) है. आंवटित पद को नहीं भरा गया.

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तो और भी दयनीय स्थिति है जहां प्रति 17685 व्यक्ति पर महज 1 डॉक्टर बिहार में है. आर्थिक उदारीकरण के 15 वर्षों में नीतीश सरकार ने इस दिशा में क्या कार्य किया है यह सरकारी आंकड़े बता रहे हैं.

तेजस्वी यादव ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की ओर से जारी रिपोर्ट कार्ड में पिछले 15 सालों में बिहार का सबसे ख़राब प्रदर्शन रहा है. बिहार को जो राशि आवंटित हुई उसका सरकार आधा भी खर्च नहीं कर पाई है. कुपोषण भी सबसे अधिक बिहार में है.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत सबसे ख़राब प्रदर्शन बिहार का रहा है जिसके वजह से केंद्र सरकार ने एक भी पैसा इस साल आवंटित नहीं किया है अभी तक 75 फीसदी आबादी का इ-कार्ड नहीं बन पाया है.चाहे नीति आयोग की रिपोर्ट हो या राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसे संस्थानों के सारे मानकों पर बिहार नीतीश राज के पंद्रह सालों में साल-दर-साल फिसड्डी होते चला गया. ऐसा होना भी लाज़िमी है जिस प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी के स्वास्थ्य चिंता हो उसे प्रदेश वासियों के स्वास्थ्य की चिंता क्यों होगी?

बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से राजगीर में निर्माणाधीन फ़िल्म सिटी का नामकरण सुशांत सिंह राजपूत के नाम पर करने का आग्रह किया है. नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है, 'मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की है कि बिहार के सपूत और उभरते हुए अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन से पूरा देश दुखी है.' तेजस्वी ने लिखा कि वे खुद भी सुशांत के निधन से दुखी हैं. अपने पत्र में तेजस्वी ने लिखा है कि सुशांत ने बेहद कम वक्त में मेहनत से बड़ा मुकाम हासिल किया था और देश में बिहार का नाम रोशन किया था. सुशांत सिंह राजपूत ने बिहारवासियों का सिर ऊंचा करने का काम किया था. कोरोना काल में मजदूर आये हैं उनको रोजगार नहीं मिल रहा है,तो मजबूरी में मजदूर पलायन करने लगे हैं.जो मजदूरों को अपमानित किया गया,उसका जवाब सरकार के द्वारा नहीं दी गयी.

इसके बाद प्रभारी मंत्री अध्यादेशों को सदन के पटल पर रखें. इनमें बिहार माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश 2020, बिहार कराधान विधि (समय-सीमा प्रावधानों का शिथिलीकरण) अध्यादेश 2020, बिहार कराधान विधि (संशोधन) अध्यादेश, 2020 एवं बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश 2020, ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) (बिहार संशोधन) अध्यादेश 2020, औद्योगिक विवाद (बिहार संशोधन) अध्यादेश 2020, कारखाना (बिहार संशोधन) अध्यादेश 2020, बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार (संशोधन) अध्यादेश 2020, बिहार नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2020 और बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद (संशोधन एवं विधि मान्यकरण) अध्यादेश 2020 शामिल हैं. इसके बाद वित्तीय वर्ष 2020-21 के प्रथम अनुपूरक व्यय विवरण सदन पटन पर रखें.


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