वसूली का दबाव अलोकतांत्रिक

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वसूली का दबाव अलोकतांत्रिक

लखनऊ. भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने सीएए-विरोधी एक्टिविस्टों से हर्जाने के नाम पर वसूली का दबाव बनाने को अलोकतांत्रिक बताते हुए निंदा की है और इसे फौरन रोकने की मांग की है.पार्टी राज्य सचिव सुधाकर यादव ने रविवार को जारी बयान में कहा कि गत 19 दिसंबर को सीएए के खिलाफ हुए आंदोलन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेने वालों पर वसूली के लिए दबाव बनाना योगी सरकार की बदले की कार्रवाई है. उन्होंने कहा कि सरकार अपराधियों-गुंडों को तो संभाल नहीं पा रही और कानून-व्यवस्था के नाम पर ले-देकर लोकतांत्रिक आंदोलन के कार्यकर्ताओं को ही निशाना बना रही है. उन्होंने कहा कि कानून का राज लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन की इजाजत देता है, मगर योगी का राज इस पर पाबंदी लगाता है और अपराधियों-दबंगों को संरक्षण देता है. उत्तर प्रदेश में यही चल रहा है. यहां 71-71 मुकदमों के अपराधी आजाद हैं, आठ-आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर रहे हैं और जन मुद्दों पर आवाज उठाने वाले जेल में या सरकार के निशाने पर हैं. योगी सरकार अधिकारों का दुरूपयोग कर विपक्ष को ही चुप कराने पर आमादा है. मगर जनता सब देख रही है.

माले नेता ने कहा कि समाजसेवी दारापुरी, सदफ जफर व अन्य लोगों के घरों पर शनिवार को वसूली के लिए दबिश टीमें भेजना और उससे भी पहले वसूली के नाम पर राजधानी के दो-दो कारोबारियों की दुकानें तक सील करवा कर उनकी रोजीरोटी ठप कर देना सरकार की हड़बड़ाहट को दिखाता है, जबकि मामला उच्च अदालत में विचाराधीन है. फर्जी तौर पर आरोपित किये गए समाजसेवियों को अपना पक्ष रखने का बिना अवसर दिए और अदालत द्वारा अंतिम रूप से बिना दोषी करार दिए वसूली का दबाव बनाना न्याय प्रक्रिया का मखौल उड़ाना है. सरकार आंदोलनकारियों के साथ संविधान-विरुद्ध और दुर्दांत अपराधियों जैसा सलूक कर रही है. उन्होंने कहा कि योगी सरकार लोकतंत्र पर बंदिशें लगाकर और डरा-धमका कर तानाशाही लाद रही है. लेकिन याद रखना होगा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सत्ता में आकर तानाशाही थोपने वालों को जनता पहले भी सबक सिखा चुकी है.


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