आंदोलनकारी या अतिक्रमणकारी

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आंदोलनकारी या अतिक्रमणकारी

आलोक कुमार

पटना. विनोबा भावे के सहयोगी रहे बाल विजय ने कहा कि विनोबा भावे ने स्पष्ट किया था कि- सबै भूमि गोपाल की, नहीं किसी की मालिकी. बावजूद इसके यह सब हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर किसानों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है. सुप्रसिद्ध गाँधीवादी एसएन सुब्बा राव ने कहा कि सरकार को जगाने का समय आ गया है. आन्दोलन ही एक मात्र रास्ता है. एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणसिंह परमार, किसान नेता सुनीलम, एकता परिषद् के राष्ट्रीय समन्वयक रमेश शर्मा ने किया. रफीक विभिन्न संगठनों  के प्रतिनिधियों ने विचार व्यक्त किया.

 

जन संगठन एकता परिषद के द्वारा यूपीए-1 के शासनकाल में 2007 में जनादेश, यूपीए-2 के शासनकाल में 2012 में जन सत्याग्रह और एनडीए-1 के शासनकाल में 2018 में जनांदोलन किया गया. तीनों आंदोलन में देश-विदेश-प्रदेश के हजारों वंचित समुदाय के लोग गांधी,विनोबा और जयप्रकाश के बताएं मार्ग पर शांतिपूर्ण ढंग से सत्याग्रह पदयात्रा किए. केन्द्र और राज्य सरकार आश्वासन देते रहे. परन्तु समस्या विकराल बनती जा रही है.

बता दें कि जनादेश 2007 में 25 हजार वंचित समुदाय के लोग ग्वालियर से दिल्ली तक पदयात्रा सत्याग्रह किये. इस सत्याग्रह के दरम्यान पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय भूमि सुधार आयोग और राष्ट्रीय भूमि सुधार समिति बनायी गयी. जो कागज में ही सिमटकर रह गयी. जनादेश 2012 के दौरान पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने जल,जंगल और जमीन के मुद्धे पर टास्क फोर्स निर्माण किया. जनांदोलन 2018 में पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण मंत्री नरेन्द्र तोमर बीमार पड़ गये. अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के युवराज राहुल गांधी मुरैना पहुंचे. उन्होंने काफी आश्वासन दिया. इसका असर हुआ कि मध्यप्रदेश के मामा शिवराज सिंह चैहान धाराशाही हो गये. कल्पनाथ राय के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में सरकार बनी. इसे चलने नहीं दिया गया. वैश्विक कोरोना काल में कल्पनाथ राय की सरकार गिरा दी गयी. इसमें ज्योतिराजे सिंधिया की अहम भूमिका रही. कांग्रेस में बगावत करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी का दामन थाम लिए. बतौर सिंधिया राज्यसभा सदस्य बन गये. इसके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने सिंधिया जी के साथ बगावत करने मंत्री बना दिये. मध्य प्रदेश सरकार में मंत्रियों की अहम भूमिका होगी.


तीनों आंदोलनों का नेतृत्व करने वाले एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोापाल ने कहा कि सरकार एक तरफ 2022 तक सबको आवास देने की बात कह रही है लेकिन जब जमीन ही नहीं होगा, तो आवास कैसे दिए जाएंगे. राजगोपाल ने प्रधान मंत्री के समक्ष “राष्ट्रीय आवासीय भूमि अधिकार बिल 2013” को पारित कराने की मांग रखी. इसके साथ ही उन्होनें नेशनल लैंड रिफार्म पालिसी कौंसिल को फिर से पुर्नगठन की मांग भी की. इस कौंसिल के अध्यक्ष खुद प्रधानमंत्री होते हैं. साथ ही देश भर में बढ़ते टकराव विशेष रूप नक्सल राज्यों में जल,जंगल और जमीन की समस्याओं पर संघर्षरत लोगों से संवाद कायम करने के लिए शांति और संभावना मंत्रालय बनाया जाए. प्रधानमंत्री ने राजगोपाल द्वारा उठाए गए सभी मसलों पर विचार करने का आश्वासन दिया.

बिहार के भूमिहीनों के लिए बिहार सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. प्रधानमंत्री आवास योजना के वैसे भूमिहीन लाभार्थियों, जिन्हें घर बनाने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें बिहार सरकार 60 हजार रुपये देगी. ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के शुभारंभ कार्यक्रम में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के वैसे भूमिहीन लाभार्थी, जिन्हें वासभूमि नहीं है, जमीन खरीदने हेतु 60 हजार रूपये प्रदान करेगी. जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सके और उन्हें अपना घर और छत नसीब हो सके. यानी बिहार सरकार यह पैसा उन्हीं लाभार्थियों को देगी, जिनके पास वासभूमि नहीं है. कल्याणकारी सरकार के पास जन्म से लेकर मरण तक की योजना है. उससे लोगों को लाभ दिलवाना है. मगर नौकरशाहों के द्वारा बेहतर ढंग से क्रियान्वयन नहीं करने से आज भी 34 लाख लोग आवासीय भूमिहीन हैं.


इस बीच ‘जो जमीन सरकारी है वह जमीन हमारी है‘ नारा लगाने वालों को अतिक्रमणकारी करार कर अतिक्रमित सरकारी जमीनों के विरुद्ध अपील दायर करने को लेकर बैठक हुई. गया जिले के जिलाधिकारी श्री अभिषेक सिंह ने समाहरणालय अवस्थित अपने प्रकक्ष में अपर समाहर्ता, सरकारी अधिवक्ता, अंचलाधिकारी मानपुर, अंचलाधिकारी बोधगया, अंचलाधिकारी वजीरगंज एवं अंचलाधिकारी नगर के साथ सरकारी भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण समस्या एवं लंबित मामलों में व्यवहार न्यायालय गया में अपील दायर करने को लेकर बैठक की. जिलाधिकारी ने सभी अंचलाधिकारियों को सरकारी भूमि से संबंधित महत्वपूर्ण समस्याओं का विस्तृत विवरण के साथ सूची बनाकर व्यवहार न्यायालय, गया में तत्सम्बन्धी अपील दायर करने का निर्देश दिया. जिलाधिकारी ने कहा कि वैसी सरकारी जमीनें जिनमें व्यवहार न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति ध्पार्टी के पक्ष में आदेश पारित किया गया है, उनमें अविलंब अपील दायर की जाए. उन्होंने कहा कि पूर्व से जिस सरकारी जमीन का अतिक्रमण से संबंधित मामला व्यवहार न्यायालय में लंबित है, वैसी सरकारी जमीनों का प्रतिवेदन सरकार के पक्ष में मजबूत रिपोर्ट तैयार कर भेजा जाए.

जिलाधिकारी ने अंचलाधिकारी मानपुर, सदर, वजीरगंज एवं बोधगया को निदेश दिया कि वैसी सरकारी जमीन, जो 1 एकड़ से ज्यादा है, का अंचलाधिकारी नियमित रूप से महीने में एक बार निरीक्षण करेंगे. जिलाधिकारी ने बताया कि ऐसे कई सरकारी जमीन हैं,जिन पर ध्यान नहीं देने के कारण वह जमीन धीरे-धीरे अतिक्रमित हो गयी और उस पर अवैध कब्जा कर लिया गया. जिलाधिकारी ने अंचलाधिकारी सदर को निर्देश दिया कि सदर अंचल के अंतर्गत कई एकड़ के अलग-अलग प्लॉट, जो सरकारी जमीन हैं, पर धीरे-धीरे कब्जा हो रहा है. उन्होंने संबंधित जमीनों की सूची तैयार कर व्यवहार न्यायालय में अपील दायर करने का निर्देश दिया. जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता श्री मनोज कुमार को सभी अंचलाधिकारी से प्रत्येक माह सरकारी जमीन की जांच प्रतिवेदन प्राप्त करने का निर्देश दिया.


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