कोरोना दौर में मंदिर का यह चरणामृत पीजिए

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कोरोना दौर में मंदिर का यह चरणामृत पीजिए

 आलोक कुमार

पटना.महावीर मंदिर के  ऐतिहासिक तथ्यों और  परंपरा  की जांच से पता चला है की इस मंदिर को  स्वामी  बालानंद ने स्थापित किया था.बालानंद 1730 ई. के दौरान रामानंदी संप्रदाय के एक तपस्वी थे.पटना स्टेशन के बगल में है महावीर मंदिर.इस मंदिर का इतिहास बहुत पुरानी है.948 में पटना हाईकोर्ट  के निर्णय के मुताबिक  ये मंदिर प्राचीन काल से यहां मौजूद है.परन्तु मंदिर के ऐतिहासिक तथ्यों और  परंपरा की जांच से पता चला है की इस मंदिर को स्वामी बालानंद ने स्थापित किया था.बालानंद 1730 ई. के दौरान रामानंदीसंप्रदाय के एक तपस्वी थे.

सन्1948 ईस्वी में पटना उच्च न्यायालय ने इसे सार्वजानिक मंदिर घोषित कर दिया.नए भव्य मंदिर का विनिर्माण  1983 से  1985 के बीच किशोर  कुणाल  और उनके भक्तो के योगदान से किया गया  था और वर्तमान  में ये देश के सबसे शानदार मंदिरों में से एक है.वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार 30 नवंबर से 4 मार्च 1985 केबीच हुआ है. मंदिर का क्षेत्रफल 10 

हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैला हुआ है.मंदिर परिसर में  आगंतुकों और भक्तों की सभीजरूरी सुविधाएं उपलब्ध  कराई  जाती है.मंदिर परिसर में प्रवेश करने के पश्चात  बायीं  तरफ एक  चबूतरे पर सीढ़ियों की  श्रृंखला है जो मंदिर के मुख्य क्षेत्र जिसे गर्भगृह कहा जाता है की ओर जाती है, जहां भगवान  हनुमान  का  गर्भ गृह  है. इसके चारों  ओरएक गलियारा है जिसमें  भगवान शिव जी है.मंदिर की पहली मंजिल में देवताओं की चार  गर्भगृह है.इनमें सेएक भगवन  राम का मंदिर है जहां से इसका प्रारंभ होता है.राम मंदिर के पास भगवान कृष्ण का चित्रण किया गया हैजिसमें वे अर्जुन को धर्मोपदेश दे रहे है.इससे अगला देवी दुर्गाका मंदिर है.इसके बाद भगवान शिव, ध्यान करती माँ पार्वती और नंदी-पवित्र बैल की  मुर्तिया हैं  जो लकड़ी के  कटघरे में रखी गयी हैं.लकड़ी के  कटघरे में शिव जी के ज्योतिर्लिंग को स्थापित किया गया है.

इस मंजिल पर एक अस्थायी राम सेतु है.इस सेतु को कांच के एक पात्र में रख गया है.इस  पत्थर की मात्र 13,000 एमएम हैजबकि इसका वजन लगभग 15 किलो है और पानी में तैर रहीहै.मंदिर की दूसरी मंजिल का  प्रयोग अनुष्ठान प्रयोजन के लिएकिया जाता है.संस्कार मंडप इसी मंजिल पर मौजूद है.यहाँ मंत्रो  का उच्चारण, जप,  पवित्र  ग्रंथो का गायन,  सत्यनारायण कथा और अन्य धर्मिक अनुष्ठान किये जाते है.इस  मंजिल  पररामायण की विभिन्न दृश्यों का चित्र प्रदर्शन भी किया गया है.

पहली मंजिल पर ध्यान मंडप को पार करने के पश्चात, बायीं ओर मौजूद भगवान गणेश,  भगवान बुद्ध,  भगवान सत्यनारायण, भगवान राम और सीता  और देवी सरस्वती की प्रतिमाएं भक्तो को अपना  आशीर्वाद देकर कृतार्थ करते है.इन देवताओं के  सामने,  पीपल के  वृक्ष के नीचे शनि  महाराज का मंदिर है जिसे  एक गुफा के आकार का बनाया गया है जो दिखने में बहुत  आकर्षक लगता है.


मंदिर के मुख्य परिसर में एक कार्यालय, धर्मिक वस्तुयों की एक दूकान और किताबो की दुकान  है जहां धार्मिक शैली की किताबें मिलती है.

इस परिसर में एक  ज्योतिषी  और हस्तकला केंद्र और मणि  पत्थरो का भी केंद्र है जो भक्तों की आवश्कताओं को सही मार्गदर्शन से पूर्ण करता है.


मंदिर को एक और विशेषता इसके प्रसाद की है, जो पीठासीन देवताओ को अर्पित किया जाता है. प्रसाद के रूप में “नैवेद्यम”दिया जाता है जिसे  तिरुपति और आंध्र प्रदेश के विशेषज्ञों द्वारातैयार किया जाता है.महावीर मंदिर का नैवेद्यम लडडुओं  का पर्याय है जिसे हनुमान जी को अर्पित किया जाता है.संस्कृत भाषा में नैवेद्यम का अर्थ है  देवता के समक्ष  खाद्य सामग्रीअर्पित करना.इस प्रसाद को तिरुपति के विशेषज्ञों द्वारा तैयारकिया जाता है.इस प्रसाद में बेसन का आटा, चीनी, काजू, किशमिश, हरी इलायची, कश्मीरी केसर और अन्य फलेवर डालकर घी में  पकाया  जाता  है और गेंद के आकार में बनाया जाता है. नैवेद्यम बनाने में प्रयोग की जाने वाली केसर कश्मीरके पंपोर जिले के उत्पादकों से सीधे मंगाई जाती है जिसे कश्मीर में सोने (केसर) की भूमि के नाम  से जाना  जाता है.

वैश्विक कोरोना काल के विख्यात महावीर मन्दिर में  विशेष सर्तकता बनाये रखा जा रहा है.देश में लॉकडाउन के चलते बंद चल रहे धार्मिक स्थलों को अनलाॅक 1 में खोल दिया गया. धार्मिक स्थलों को खोलने के पूर्व तैयारी की गयी थी.बिहार की राजधानी पटना का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर 8 जून से आम लोगों के खोल दिया गया.सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर मंदिर प्रशासन ने कई तरह के प्रबंध किए. मंदिर प्रशासन ने ऑनलाइन दर्शन से लेकर और कई तरह की व्यवस्थाओं को लागू किया. खासतौर पर सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन के साथ दर्शन-पूजन और प्रसाद ग्रहण के लिए कुछ सख्त नियम भी लागू किए.महावीर न्यास परिषद के सचिव और पूर्व आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल है। हनुमान मंदिर प्रशासन का कहना है कि जिस  तरह से देश के दूसरे बड़े मंदिर जैसे तिरुपति और  उज्जैन में ऑनलाइन बुकिंग के बाद दर्शन या  आरती में  शामिल होने का मौका मिलता  है, वैसी ही व्यवस्थायहां भी लागू की जाएगी. इस बारे में महावीर न्यास परिषद के सचिव और पूर्व  आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर  कुणाल(Acharya Kishore Kunal) ने   बातचीत की है. आइए जानते हैं कि किशोर कुणाल ने मंदिर खोले जाने को लेकर क्या  कहा. हाल में  सेन्सर पद्धति सेचरणामृत वितरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई है.कम्पनी की ओरसे जो पद्धति अपनायी गयी थी, उसमें एक बार में अंजलि में 10 मिली चरणामृत आता था जो अंजलि में कुछ अधिक होनेके कारण गिरने की आशंका रहती थी.अतः उसने उसके नीचेएक स्टेनलेस स्टील का पात्र रख दिया है.अंजलि से अधिकचरणामृत उसमें जमा हो जाता था उसे एक  पाइप से  जोड़ा था जिसका निकास उस  स्थान से  जहाँ  से मन्दिर का पानी बाहर जाता है.


बुधवार की शाम में महावीर न्यास परिषद के सचिव और पूर्व आईपीएस अधिकारी  आचार्य किशोर  कुणाल  मन्दिर में आये थे. उन्होंने इस व्यवस्था  को देखा था और उन्होंने इसमें दो परिवर्तन कराये. पहला परिवर्तन था कि अंजलि सेन्सर के नीचे करने पर  10 मि.ली.  के बजाय 5 मि.ली.  चरणामृत आये, ताकि अंजलि से बाहर न जाये. और दूसरा परिवर्तन यह कराया कि पाइप से इसको 

जल-निकास के लिए जो जोड़ा  गया था, उस पाइप को हटाकर नीचे एक पात्र रख दिया गया.यह व्यवस्थाबुधवार की शाम से लागू हो गयी है.

सेन्सर पद्धति द्वारा चरणामृत वितरण की प्रक्रिया  कोरोना वायरस से संक्रमण से बचाव का एक अत्यन्त उपयोगी उपाय है और इसका स्वागत किया जा रहा है. महावीर मन्दिर यह स्पष्टकर देना चाहता है कि महावीर मन्दिर में प्रतिदिन रुद्राभिषेक में शिवजी पर  दर्जनों लीटर  दूध और जल चढ़ते हैं,  उनमें किसी  को भी जल-निकास से नहीं जोड़ा गया है,  बल्कि हरेक शिवलिंग केसामने नीचे पात्र रहता है, जिसमें वह जमा होता है और उसका श्रद्धापर्वूक  विसर्जन किया जाता है. यह गलती प्रारम्भ में कम्पनी द्वारा हुई थी, जिसको 24 घण्टे केअन्दर कल सुधार लिया गया था.फिर भी, जिन लोगों ने इसेबतलाया है, उनको धन्यवाद.जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं उनके प्रति खेद और  जिन्होंने केवल निन्दा के लिए प्रचारितकिया है, उनके प्रति भी आभार, क्योंकि हमारे सन्तों ने कहरखा है- निन्दक नियरे राखिये, आंगन कुटी छवाय.


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