रोजगार छिना तो बढ़ गया बाल विवाह !

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रोजगार छिना तो बढ़ गया बाल विवाह !

प्रभाकर मणि तिवारी

कोलकाता.पश्चिम बंगाल बाल विवाह के लिए पहले ही बदनाम रहा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वर्ष 2011 में सत्ता संभालने के बाद इस सामाजिक कलंक पर काबू पाने के लिए कन्याश्री समेत कई योजनाएं शुरू की थीं. तात्कालिक तौर पर उसका असर भी नजर आया. लेकिन अब मार्च से ही कोरोना की वजह से जारी और उसके बाद चक्रवाती तूफान फान की मार ने राज्य में एक बार फिर यह समस्या बढ़ा दी है. मार्च से अब तक बाल विवाह के 500 मामले सामने आए हैं. सरकारी अधिकारियों का दावा किया है कि है कि ज्यादातर मामलों में कम उम्र की लड़कियों की शादी उनके परिजनों ने इसलिए की क्योंकि बंदी की वजह से उनका आय का स्रोत समाप्त हो गया था.

राज्य में बड़े पैमाने पर बाल विवाह की खबरें सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक जून को एक हेल्पडेस्क बना कर हेल्पलाइन नंबर जारी किए थे. आयोग की सलाहकार मोमिता चटर्जी बताती हैं कि कुछ लड़कियों की कम उम्र में ही शादी हो जाती है क्योंकि परिवारों के लिए उनका खर्च वहन करना मुश्किल हो जाता है. इनके अलावा कुछ ऐसी भी लड़कियां हैं जो बेहतर भविष्य की आस में अपनी पसंद के लड़के से शादी करने के लिए घर से भाग जाती हैं.


कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग की एक रिपोर्ट के आधार पर बढ़ते बाल विवाह पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य सरकार को इस बारे में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है. बाल अधिकार संरक्षणआयोग आयोग में बाल विवाह और बाल तस्करी के मामले देखने वाले आयोग की विशेष सलाहकार सुदेष्णा राय बताती हैं, "हमें अब तक 198 शिकायतें मिली हैं. जांच के बाद इनमें से 134 शिकायतें सही पाई गईं. हमने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए उत्तर 24-परगना जिले में 54 और दक्षिण 24-परगना जिले में बाल विवाह के 60 मामलों को रोकने में कामयाबी हासिल की है. हेल्पलाइन नंबर जारी करने के बाद आयोग को रोजोना औसतन चार शिकायतें मिल रही हैं.” आयोग की अध्यक्ष अनन्या चटर्जी चक्रवर्ती कहती हैं, "हमने दो जून को हेल्पलाइन शुरू की थी. उसके बाद अब तक बाल विवाह और बाल तस्करी की सैकड़ों शिकायतें मिल चुकी हैं. कोरोना की वजह से जारी लॉकडाउन औऱ अम्फान तूफान ने ज्यादातर लोगों का रोजगार छीन लिया है. ऐसे में बाल विवाह और तस्करी बढ़ना तय है.”


बाल अधिकार औऱ बाल तस्करी के मुद्दे पर काम करने वाले संगठनों का कहना है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में तो कम उम्र में विवाह की परंपरा बरसों से जारी है. लेकिन अब लाकडाउन ने लोगों का रोजगार छीन लिया है. ऊपर से रही-सही कसर अम्फान तूफान ने पूरी कर दी है. ऐसे में लोग लड़कियों का कम उम्र में ही विवाह कर रहे हैं.

आयोग की एक सदस्य बताती हैं कि बाल विवाह की ज्यादातर शिकायतें राज्य के उत्तर व दक्षिण 24-परगना, पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर, नदिया, मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों से आ रही हैं. इस मामले में यह जिले पहले से ही बदनाम रहे हैं. अब कोविड-19 औऱ अम्फान की दोहरी मार से परिस्थिति और गंभीर हो गई है.

कोलकाता के प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में समाज विज्ञान पढ़ाने वाली सुकन्या सर्वाधिकारी कहती हैं, "इतिहास गवाह है कि किसी बड़ी प्राकृतिक विपदा के बाद राज्य में बाल विवाह और बच्चों की तस्करी के मामले अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाते हैं. वर्ष 1943 में बंगाल के भयावह अकाल के दौर में भी ऐसा ही हुआ था.” 

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