दल बदल की पूरी कीमत वसूली महाराज ने

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दल बदल की पूरी कीमत वसूली महाराज ने

पूजा सिंह

भोपाल. मध्य प्रदेश में गुरुवार को हुए भारतीय जनता पार्टी के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया का वजन साफ नजर आया. जिन 28 नये मंत्रियों को शपथ दिलायी गयी उनमें 9 सिंधिया समर्थक शामिल हैं. इस तरह मंत्रिमंडल में सिंधिया के वफादारों की तादाद बढ़कर 11 हो गयी है. गौरतलब है कि सिंधिया अपने इतने समर्थकों को कांग्रेस सरकार में भी मंत्री नहीं बनवा पाये थे. सिंधिया स्वयं शपथग्रहण समारोह में मौजूद थे. नये मंत्रियों में 20 कैबिनेट मंत्री और 8 राज्य मंत्री शामिल हैं.

मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्रियों के नाम पर सहमति नहीं बन पाने के कारण यह काफी समय से टल रहा था. आखिरकार केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को तलब किये जाने के बाद गुरुवार को मंत्रिमंडल का विस्तार हो सका. अब तक मंत्रिमंडल पांच मंत्रियों के साथ काम कर रहा था जिनमें दो सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत शामिल थे.


मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं. इस लिहाज से अधिकतम 35 विधायक मंत्री बनाए जा सकते हैं. मंत्रिमंडल विस्तार में विंध्य और महाकौशल इलाकों की अनदेखी की गयी है जबकि उन इलाकों से ज्यादा मंत्री बनाये गये हैं जहां आने वाले दिनों में उपचुनाव होने हैं. इन उपचुनावों में भी ग्वालियर चंबल इलाके के चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ-साथ इस क्षेत्र के भाजपा नेताओं नरेंद्र सिंह तोमर, नरोत्तम मिश्रा, जयभान सिंह पवैया के लिए खासे महत्वपूर्ण हैं.

भाजपा के एक नेता नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहते हैं कि उपचुनाव में अगर सभी सिंधिया समर्थक विधायक जीत जाते हैं तो शिवराज सिंह चौहान के लिए सरकार चलाना और भी मुश्किल हो जायेगा क्योंकि सिंधिया की ओर से लगातार दबाव आयेगा. यही दबाव कमल नाथ के जी का जंजाल भी बना था.कांग्रेस की नजर भारतीय जनता पार्टी के असंतुष्ट नेताओं पर है. भाजपा की ओर से सभी बागी कांग्रेसी विधायकों को टिकट मिलना तय है, ऐसे में कांग्रेस नाराज भाजपायी नेताओं को अपने पाले में खींचने का प्रयास कर रही है. पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ कह चुके हैं कि यह खेल अब शुरू हो गया है तो इसे सभी खेलेंगे. उनका इशारा विधायकों की तोड़फोड़ की ओर था.फोटो साभार 

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