यह माल्या का राजनीतिक उपयोग नहीं है?

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यह माल्या का राजनीतिक उपयोग नहीं है?

संजय कुमार सिंह 

शराब कारोबारी विजय माल्या भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ ब्रिटेन की अदालत में मुकदमा हार गए तो यह उम्मीद बनी थी कि उन्हें भारत ले आया जाएगा.इस आशय की खबरें छपती रहती हैं पर प्रत्यर्पण नहीं हो रहा है.दूसरी ओर, विजय माल्या बैंकों के कर्ज की बकाया राशि देने की पेशकश कर चुके हैं.उनकी अपील है, 'प्लीज पैसा ले लीजिए.मैं इस किस्से को खत्म करना चाहता हूं कि मैंने बैंकों का पैसा चुराया है।' पर इसे ठुकराया जा चुका है और इस दिशा में काम नहीं हो रहा है.साफ है कि अगर लंदन में माल्या के साथ बहुत बुरा हुआ, सभी विकल्प चूक गए तो भी वे भारत की किसी जेल में पहुंच जाएंगे.बैकों का पैसा नहीं मिलेगा

दूसरी ओर, मुकदमा हारने के बाद बचने की हर संभव कोशिश कोई भी करेगा.इसमें पैसे खिलाना, चंदा देना, बांड खरीदना सब शामिल है.माल्या ये तरीके नहीं अपनाएंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है.इन दिनों मीडिया ऐसा है नहीं कि ऐसी कोई खबर छपेगी और सरकार को इसका डर होगा.इस तरह, गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण नहीं होने से इस तरह के अटकलों की पुष्टि कभी नहीं होगी.आरोपों की परवाह सरकार नहीं करती है.वह सर्जिकल स्ट्राइक का दावा करती है तो लोग मान लेते हैं और अभी नहीं पूछ रहे हैं कि चीन के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक क्यों नहीं हो रही है.ना सरकार ने कुछ बताया है. सूत्रों से जैसी जरूरत होगी, खबर छपती रहेगी.

सरकार अगर धनराशि वापस करने की माल्या की पेशकश नहीं मान रही है तो कायदे से कोशिश यह होनी चाहिए थी कि मौका लगते ही उसे लंदन में गिरफ्तार कर भारत ले आया जाता.पर ऐसा हुआ नहीं है.यह विकल्प भी तभी था जब तुरंत गिरफ्तारी की संभावना होती.वरना पहली प्राथमिकता तो वसूली ही होनी चाहिए.जाहिर है, गिरफ्तारी और वसूली दोनों में अड़ंगे होंगे पर वे वाजिब हैं या जानबूझकर खड़े किए गए यह शायद कभी समझ में न आए.लेकिन माल्या पैसे देने के लिए तैयार हैं तो सरकार (बैंक) क्यों नहीं ले रही है यह तो सरकार बता सकती है.पर ऐसा कुछ बताया नहीं गया है.आप समझ सकते हैं कि माल्या अगर बकाया चुकाए तो पैसा बैंकों को जाएगा.माल्या को राहत मिलेगी पर इससे इनकार करने पर उन्हें परेशान किया जाता रहेगा और वे पैसे किस्तों में खर्च करते रहेंगे जिससे कइयों का भला हो सकता है.इसलिए कौन चाहेगा कि मामला निपटे.यही पहले होता था यही अब हो रहा है.सिर्फ सरकार बदल गई है जिसे हम ईमानदार समझते हैं.  

इसके लिए, अखबारों में माल्या के प्रत्यर्पण के लिए सरकार की 'कोशिश' की खबरें छपती रहती हैं.निश्चित रूप से यह हेडलाइन मैनजमेंट या मीडिया मैनेजमेंट का हिस्सा है.गिरफ्तारी का पिछला मौका जितने दिनों का था वह निकल चुका है.इस बारे में अखबारों ने कुछ नहीं बताया है.दूसरी ओर, चुनाव के समय सरकार की ईमानदारी दिखाने, भ्रष्ट के खिलाफ कार्रवाई करती दिखने जैसे मौजूदा सरकार के चुनावी दांव अब लगभग स्पष्ट हो चुके हैं.रॉबर्ट वाड्रा पर कई आरोप हैं.लेकिन कार्रवाई के नाम पर सुनवाई और खबर छपवाने का काम चुनाव के समय ही होता है.अब बिहार चुनाव की तैयारियों के तहत प्रियंका गांधी को बंगला खाली करने को नोटिस दे दिया गया है.

वैसे तो एसपीजी की सुरक्षा हटने के बाद ही वह बंगले की हकदार नहीं रह गई थीं.पर यह काम इतने दिनों तक टलता रहा.अब करने का कारण सरकार जो बताए इस तरह की शंका होगी ही और आरोप लगेंगे ही.9000 करोड़ रुपए की राशि कम नहीं होती है.अभी सरकार और देश की जो आर्थिक स्थिति है उसमें वसूली को सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.पर सरकार गिरफ्तारी की कोशिश में लगी हुई है.और माल्या लगभग मजे में जी रहा है.कहने की जरूरत नहीं है कि इससे अवैध वसूली से लेकर दान पाने तक की संभावना बनती है.पर सरकार को ना उसकी परवाह है ना वह आरोपों के जवाब देती है.

अगर वह पैसे लौटाने के लिए तैयार है तो पहले उससे पैसे लिए जाने चाहिए पर सरकार उसे जेल में रखना चाहती है और वह दलील देता है कि भारतीय जेल उसके लायक नहीं है.अदालत के प्रत्यर्पण के आदेश के बावजूद वह मानवाधिकार उल्लंघन के दावे कर सकता है और मामला टलता रहेगा.हालांकि कुछ दिन पहले खबर छपी थी कि उसने ऐसा कोई दावा नहीं किया और उसका प्रत्यर्पण संभव था लेकिन किया नहीं गया.सरकार के पास अपने कारण होंगे पर माल्या का कहना है  कि वह फैसले से ‘निराश' हैं, लेकिन अपने वकीलों की सलाह के अनुसार कानूनी उपाए जारी रखेंगे.

एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार, किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक ने दोहराया कि उन्होंने भारतीय बैंकों को बकाया ऋण राशि का भुगतान करने की पेशकश की है, लेकिन उस प्रस्ताव को बैंकों ने खारिज कर दिया है.माल्या ने एक बयान में कहा है, ‘मैं स्वाभाविक रूप से न्यायालय के फैसले से निराश हूं.मैं अपने वकीलों की सलाह के अनुसार आगे भी कानूनी उपाए जारी रखूंगा।' उन्होंने कहा, ‘मैंने बार-बार बैंकों को पूरी राशि चुकाने की पेशकश की है, लेकिन दुख की बात है कि कोई फायदा नहीं हुआ।' इस संबंध में मुझे जो जानकारी मिली उससे सरकारी कोशिशों का कुछ पता नहीं चलता है.

दूसरी ओर, लाइव लॉ के अनुसार, 9 मई, 2017 के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी.इस आदेश में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में लेनदारों के एक संघ द्वारा एक याचिका पर अवमानना के लिए माल्या को दोषी ठहराया गया था.इसमें तर्क दिया गया कि माल्या ने अपनी संपत्ति का अस्पष्ट प्रकटीकरण करके अदालती आदेशों की अवहेलना की और अदालत में पेश होने के सम्मन की अनदेखी करके अपने बच्चों को को $ 40 मिलियन का भुगतान स्थानांतरित किया.पुनर्विचार याचिका समय पर दायर की गई थी, लेकिन इसे तीन साल तक सूचीबद्ध नहीं किया गया.सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से सफाई मांगी है.इस मामले में सरकार क्या नहीं कर रही है यह अखबारों में नहीं छपता है पर क्या कर रही है वह खूब छपता है.ऐसा ही एक शीर्षक है, भारत ने ब्रिटेन से किया अनुरोध, भगोड़ा कारोबारी विजय माल्याक यदि शरण मांगे तो कर दें अस्वीहकार.इकनोमिक टाइम्स ने बात की तो पचा चला अपील दायर ही नहीं की गई थी

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