बिहार से फिर होगा पलायन

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बिहार से फिर होगा पलायन

आलोक कुमार 

पटना. बिहार के 38 जिले कोरोना से और दर्जनों जिले बाढ़ से प्रभावित है.पूर्वी चम्पारण में भी काफी में प्रवासी श्रमिक आए हैं.इन कुशल श्रमिक,अर्द्ध कुशल श्रमिक और बेहुनर वाले श्रमिकों को मनरेगा में काम करने में मन नहीं लग रहा है.उसी तरह गरीब कल्याण रोजगार अभियान से भी रोजगार नहीं मिलने से श्रमिकों का पलायन रोकने में नाकामयाब है जिला प्रशासन.

यह सब सोच विकसित करके जनादेश के साथ बातचीत के दरम्यान मेहसी प्रखंड में कार्यशील  सामाजिक कार्यकर्ता अमर जी ने कहा कि वर्तमान हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह है आप कोरोना और बाढ़ संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहे.उन्होंने कहा है कि लॉकडाउन और अनलॉक समय तीस लाख से अधिक कुशल श्रमिक,अर्द्ध श्रमिक और श्रमिक आएं थे.उनको मनरेगा में काम करने में मन नहीं लग रहा है.और तो और गरीब कल्याण रोजगार अभियान भी रोजगार देकर श्रमिकों को रोकने में नाकामयाब है.

इन श्रमिकों के साथ अन्य उपक्रमों में लगे लोग बिहार आए थे,अब ऐसे लोग सूबे से मोहभंग करके धीरे- धीरे आने वाले राज्यों की ओर जाने का मन बना लिये हैं. पलायन रोक सके तो रोक. रुख तो लॉकडाउन के समय ही करने लगे थे.इधर अनलॉक घोषित होने पर सहरसा, पूर्णिया,कटिहार , मोतिहारी आदि जिले से पलायन करने लगे.क्योंकि श्रमिकों ने यह महसूस कर लिया कि हमारे हुनर और काम का नियोजन लगने वाला नहीं है. यहां पर पर काम मिलने वाला नहीं है.

सामाजिक कार्यकर्ता अमर ने कहा कि जिस प्रकार सरकार विवेकहीन व असंवेदनशीलता दिखा रही है.आज मानववादी बनकर श्रमिकों के हित में कदम उठाकर उसे मूर्त रूप देने की आवश्यकता है.मुख्यमंत्री  महोदय आपने स्किल मैपिंग की बात कहते हैं. और तो और उस पर प्रशासन और सरकार से जुड़े लोग काम में लग भी गए हैं. उन्होंने यह उम्मीद जाहिर  किया है कि एक कामगार को लम्बे समय तक इंतजार करना गवारा नहीं है.उनको दो जून की रोटी की तलाश करनी है. इसके आलोक में व्यक्तिगत करबद्ध विनंती पूर्वक निवेदनपूर्वक कहना चाहता हूं कि आज भारत के प्रधानमंत्री जी द्वारा देश के 80 करोड़ लोगों के लिए जिस प्रकार से फ्री राशन प्रति व्यक्ति 5 किलो चावल या गेहूं तथा 1 किलो चना देने का आश्वासन पूरे देशवासियों को नवंबर तक किया है.उसका मन से स्वागत करता हूं.


इस कड़ी में आपसे भी मेरा आग्रह है कि कोविड-19 और बाढ़ की चुनौतियों से निबटने हेतु बड़े पैमाने पर स्वरोजगार सृजन करने की जरूरत है इस दिशा में यदि आप के द्वारा पहल किया गया तो निश्चय ही बिहार से ना केवल पलायन रुकेगा बल्कि उन्हें गांव और शहरो में ही रोजगार उपलब्ध हो सकेगा.


इस दिशा में उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि सर्वप्रथम जितने भी सरकारी विद्यालय, प्राइमरी , मिडिल, अपर,सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी है.इसके अलावे कॉलेज व विश्वविद्यालय है ,अपने राज्य के अंदर मे हैं उन सबको सैनिटाइज करने के लिए  ब्लीचिंग पाउडर और चूने का घोल मिलाकर उसका छिड़काव उन स्थलों पर कराई जाए तत्पश्चात इन सभी इमारतों का या इन सभी भवनों का रंग रोगन मरम्मत कराई जाए साथ ही जितने भी सरकारी दफ्तर हैं चाहे वह पंचायत भवन हो अस्पताल हो ब्लॉक ऑफिस  हो सब डिविजनल ऑफिस हो कलेक्ट्रेट हो कमिश्नरी हो या फिर अन्य विभाग से जुड़े जितने भी भवन हो, सबको सैनिटाइज करने के साथ-साथ उसकी रिपेयरिंग और रंग रोगन करा कर उसे आने वाले कल के लिए तैयार किया जाए साथ ही गांव से लेकर शहर तक सभी आवासीय परिसर को भी सैनेटाईज करने के साथ साथ कार्ययोजना पर सरकार को गंभीरता पूर्वक पहल करने की दिशा मे कदम बढा़ने होंगे ।


वे समझते है कि अगर इस दिशा में सरकार के स्तर पर सभी विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम की शुरुआत की जाए तो निश्चय ही राज्य के अंदर लाखों लोगों को काम की गारंटी आमदनी के साथ सरकार स्वयं सुनिश्चित कर सकती है दूसरा गांव से लेकर यानी पंचायत से लेकर राज्य मुख्यालय तक जितने भी छोटे बड़े नाले जो बरसों से बंद पड़े हैं उसकी साफ सफाई और मरम्मत सुनिश्चित कराई जाए मैं समझता हूं के इसे करने से राज्य के अंदर यहां भी लाखों लोगों का नियोजन हो सकता है इसी प्रकार केंद्र सरकार द्वारा घोषित लोकल को वोकल बनाने के अंतर्गत राज्य में बंद परे चीनी मीले,जुट कारखाना, हस्तकर्घा उद्योग,सुत फैकट्री,खादी, इत्यादी जैसै उद्योगो को पुनरजिवित करने के साथ साथ छोटे-छोटे उद्योग धंधों को बढ़ावा दिया जाए. इस दिशा में खेती से जुड़े हैं उत्पादनों के आधार पर उद्योग धंधे हर जिले में आरंभ की जाए. क्योंकि सरकार के पास हर जिला में इस काम के लिए एक सुनियोजित स्थान पहले से उपलब्ध है जो विआडा के अंतर्गत हैं अगर हम छोटे स्तर पर छोटे उद्यमियों की पहचान कर इसके लिए संसाधन की व्यवस्था करें तो निश्चय ही इस काम से भी लाखों लोगों को जोड़ा जा सकता है मैं समझता हूं कि जब भारत सरकार का हाथ बिहार सरकार के साथ है तो हमें डरने की क्या बात है । खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ आमदनी को भी सुनिश्चित करना आज समय की बड़ी मांग है क्योंकि लॉकडाउन अनलॉक घोषित होने के बाद राज्य के अंदर कुछ घटनाए बढती जा रही है जैसे चोरी छिनतई  बैंक लूट आदि मे वृद्धि होती दिख रही है कुछ जगहों पर कुछ लोगों में निराशा के भाव भी उत्पन्न हो रहे हैं यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है.


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