घमासान तो एनडीए में भी कम नहीं

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घमासान तो एनडीए में भी कम नहीं

डॉ लीना 

पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान का दौर शुरू हो चुका है. एक ओर बिहार में विपक्षी महागठबंधन में खटपट की खबरें आती रहती हैं तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ एनडीए में भी रह रह कर तनातनी दिखता है. एनडीए में जदयू और लोजपा के बीच खटपट की अटकलें चिराग पासवान के हालिया कुछ बयानों के बाद उठा है.  

लोक जनशक्ति पार्टी ( लोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने बिहार चुनाव से पहले चौंकाने वाला बयान दिया है. उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को कहा कि बिहार में गठबंधन का स्वरूप बदल रहा है और पार्टी कार्यकर्ताओं को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए. लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने 27 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी के जिलाध्यक्षों और जिला प्रभारियों से बात की. इस दौरान उन्होंने सभी को आगामी चुनाव के लिए तैयार रहने के लिए कहा. साथ ही ये भी कहा कि लोजपा नए बिहार के शिल्पकार की भूमिका में रहेगी. चिराग पासवान ने इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को ये भी संकेत दिया कि जरूरत हुई तो पार्टी अकेले चुनाव मैदान में उतर सकती है. ऐसे में सभी कार्यकर्ताओं को किसी भी परिस्थिति को लेकर तैयार रहना चाहिए. उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा कि जल्द ही विधान सभा स्तर पर डिजिटल रैली और प्रदेश स्तर पर वर्चुअल रैली का भी आयोजन किया जाएगा.

लोजपा लगातार सभी 243 सीटों पर अपनी तैयारी करने का दावा करती आई है और उनमें भी 119 सीटों पर सबसे ज़्यादा फोकस है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि ये 119 वो सीटें हैं जहां 2015 में बीजेपी या जेडीयू का उम्मीदवार नहीं जीता था. 11 जून को भी चिराग पासवान ने इन सभी 119 संभावित उम्मीदवारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की थी .


चिराग पासवान कई बार नीतीश कुमार के कामकाज पर सार्वजनिक मंचों से सवाल उठा चुके हैं. पिछले साल पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद चिराग पासवान ' बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट ' नाम से एक यात्रा निकाली थी, जिस दौरान कई बार विकास और क़ानून व्यवस्था के मुद्दे पर उन्होंने नीतीश कुमार सरकार को कठघरे में खड़ा किया था. इसी नारे के साथ लोजपा ने एक घोषणा पत्र तैयार किया हुआ है जिसे 14 अप्रैल को पटना में अम्बेडकर जयंती के दिन रैली में जारी किया जाना था लेकिन लॉकडाउन के चलते रैली रद्द करनी पड़ी. गौरतलब है कि उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा तो है लेकिन बिहार के नीतीश सरकार में उनका कोई मंत्री शामिल नहीं है.


जून के शुरुआत में भी बिहार चुनाव में एनडीए के नेतृत्व के सवाल पर उन्होंने यह कह कर चौंका दिया था कि इसका फ़ैसला भारतीय जनता पार्टी को करना है जो एनडीए में सबसे बड़ा दल है.  इधर, 28 जून को बिहार बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने चिराग पासवान से उनके घर जाकर मुलाकात भी की थी.


नीतीश कुमार और चिराग पासवान के रिश्तों में आई खटास किसी से छुपी नहीं है. एनडीए के लिए चिंता की बात ये है कि अभी तक इस खटास को दूर करने के लिए दोनों ही पक्षों की ओर से कोई पहल नहीं की गई है. लोजपा को सीट बंटवारे में नीतीश कुमार की ओर से अपनी उपेक्षा की भी आशंका है और इसलिए चिराग पासवान कई बार गठबंधन को बनाए रखने की ज़िम्मेदारी अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा के पाले में डाल चुके हैं.

क्या, सचमुच बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए गठबंधन में कोई नया मोड़ आएगा और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान के बीच जारी तनातनी ऐसे मुक़ाम पर पहुंच जाएगी, जहां से दोनों के रास्ते अलग हो जाएंगे?  या फिर यह महज दबाव की राजनीति है ताकि बिहार चुनावों में सीटों के तालमेल के दौरान लोजपा अधिकतम सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर सके .


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