अब आमड़ा तैयार है

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अब आमड़ा तैयार है

डा  शारिक़ अहमद ख़ान

वादे के अनुसार आमड़े के पेड़ स्वामी किसान आमड़ा लेकर आ गए.बीते दिनों हमने उनका पेड़ फ़ेसबुक पर दिखाया था और आमड़े की चर्चा की थी.हम सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए निकलने लगे तो देखा वो किसान आमड़ा लिए घर के सामने बैठे हैं.दौड़कर आए,कहने लगे मालिक आपने आमड़े के लिए कहा था,भोर में तोड़ा है,अब आमड़ा तैयार है.हमने कहा आप कितनी सुबह आ गए.किसान बोले कि मालिक आधे घंटे पहले आ गए थे.हमने कहा अंदर रख दीजिए.किसान स्लेटी कुर्ता और चकाचक धोती पहने थे.जैसी मूंछ रखे थे वैसी मूंछे अब कम दिखती हैं.पुरानी स्टाइल की मूँछ,नाक की लौ के नीचे बाल और बाकी मूँछ बारीक लकीर जैसी,ऐसी मूँछ पुराने दौर के हीरो रखा करते और तब ख़ूब चलन में थी.लग रहा था किसान ने कल शाम ही सेट करायी है.किसान के पास एक जूट का बोरा और था,उसमें आमड़ा भरा था.किसान की तैयारी देख हम भांप गए कि ये कहीं रिश्तेदारी जाने के चक्कर में हैं.हमने पूछा बाकी आमड़ा बेचने जा रहे हैं.किसान ने कहा मालिक आमड़ा लेकर मार्टीनगंज जा रहे हैं,बिटिया का ब्याह वहीं किए हैं,उसके भाग्य से उसकी शादी हम से हज़ार गुना हैसियत वाले के यहाँ हुई है,समय-समय पर फ़सल लेकर बिटिया के यहाँ जाते हैं,है ही क्या हमारे पास,फिर भी जो कुछ है,नहीं जाएंगे तो उसके नातेदार कहेंगे कि कैसा कंगाल बाप है,कहता मालिक कोई नहीं,मन में सोचता है.हमने कहा आप तो बड़ी सुबह निकले,बिटिया के यहाँ पानी तो पिएंगे नहीं,अभी यहाँ भी कुछ नहीं बना है,सेब-केला है,लाते हैं,आप खा लीजिए.किसान ने कहा मालिक हम तो भोर में पूरा खाना खाकर चले हैं,घरवाली बना देती है जब बाहर जाते हैं.अब किसान ने आमड़े का बोरा उठाकर अपने सिर पर रखा और लगभग दौड़ते हुए चले गए.किसान की यही जिजीविषा उसे हर सख़्त-ओ-सुस्त मरहले से गुज़ार ले जाती है.पुराना किसान ज़रूरत होने पर भोर में उठकर किसानी के काम पर लग जाता है,वो भोर में भरपेट भोजन कर सकता है.पुराने दौर में लोग ऐसा किया करते,हमें याद है कि जब मेरे दादा कहीं बाहर जाने को होते तो भोर में ही उनके लिए खाना बन जाता,वो पूरा खाना खाकर घर से निकलते.हमसे कोई कह दे कि भोर में पूरा खाना खा लीजिए तो हम कत्तई ना खा पाएं,वो दौर दूसरा था,वो लोग दूसरे थे.कभी-कभार कुछ वैसे ही लोग टकरा जाते हैं तो उस दौर के लोग याद आ जाते हैं.ख़ैर,आमड़े का अचार भी बनेगा और चटनी भी बनती रहेगी.खुले में रखा ताज़ा आमड़ा भी हफ़्तों ख़राब नहीं होता.तीसरी चीज़ जो बनेगी वो है आमड़े का रस,इम्यूनिटी बूस्टर होता है,इसे बनाने के दो तरीके हैं,एक ये कि आमड़े को बारीक काट ख़ूब उबाल लिया जाए.बचे पानी को छानकर और ठंडाकर पिया जाए,दूसरा तरीका है कि इसे पीस लिया जाए और पानी में मिलाकर पिया जाए.आमड़ा जंगी फल है,जब सैनिकों को जंग में घाव लगती तो आमड़ा पीसकर और उसमें बूटियाँ मिलाकर उसका लेप घाव पर लगाया जाता,ये जादुई असर करता,ये एंटीबैक्टीरियल,एंटी फ़ंगल और एंटीवायरल माना गया है.इसका बॉटनिकल नाम स्पांडियस मैंगीफ़ेरा है.इस मौसम में खोजने पर मिल जाएगा,इसका रस इस समय इस्तेमाल करना चाहिए.


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