लालू यादव की पार्टी में बगावत ,पांच एमएलसी का इस्तीफा

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लालू यादव की पार्टी में बगावत ,पांच एमएलसी का इस्तीफा

आलोक कुमार

पटना.बिहार विधान परिषद के राजद से संबंधित पांच विधान पार्षदों ने अकस्मात इस्तीफा दे दिया. इस इस्तीफे से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को जोरदार झटका लगने वाला है और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की उनकी कुर्सी भी छिन जाएगी. 75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद में मुख्य विपक्षी दल के दर्जे के लिए कुल सदस्यों का 1/10 अर्थात न्यूनतम 8 सदस्य होने चाहिए. राजद के पास गिनती के राबड़ी देवी, सुबोध कुमार और राम चन्द्र पूर्वे यानी 3 सदस्य ही बच गए हैं.

वर्ष 2018 की याद ताजी कर दी है.द्विवार्षिक चुनाव के बाद 75 सदस्यों वाले ऊपरी सदन में राजद के सदस्यों की संख्या 7 से बढ़कर 9 हो गई. बतौर विधान परिषद् के उप सभापति हारुन राशिद की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को विपक्ष के नेता स्वीकृति प्राप्त करने का आवेदन प्राप्त हुआ था. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी को विधान परिषद् में नेता विपक्ष बन गईं. राज्य के ऊपरी सदन में यह स्थिति उनकी पार्टी के सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण हुई है.अब संख्या में कमी होने के नाते राबपटना.बिहार विधान परिषद के राजद से संबंधित 5 विधान पार्षदों ने अकस्मात इस्तीफा दे दिया. इस इस्तीफे से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को जोरदार झटका लगने वाला है और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की उनकी कुर्सी भी छिन जाएगी. 75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद में मुख्य विपक्षी दल के दर्जे के लिए कुल सदस्यों का 1/10 अर्थात न्यूनतम 8 सदस्य होने चाहिए. राजद के पास गिनती के राबड़ी देवी, सुबोध कुमार और राम चन्द्र पूर्वे यानी 3 सदस्य ही बच गए हैं.


वर्ष 2018 की याद ताजी कर दी है.द्विवार्षिक चुनाव के बाद 75 सदस्यों वाले ऊपरी सदन में राजद के सदस्यों की संख्या 7 से बढ़कर 9 हो गई. बतौर विधान परिषद् के उप सभापति हारुन राशिद की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को विपक्ष के नेता स्वीकृति प्राप्त करने का आवेदन प्राप्त हुआ था. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी को विधान परिषद् में नेता विपक्ष बन गईं. राज्य के ऊपरी सदन में यह स्थिति उनकी पार्टी के सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण हुई है.अब संख्या में कमी होने के नाते राबड़ी देवी की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है.


इसके 2 साल के बाद 2020 में मो. कमर आलम, राधा चरण सेठ, संजय प्रसाद,रण विजय कुमार सिंह, दिलीप राय 5 विधान पार्षदों के इस्तीफा देने के बाद संख्या 3 बचकर रह गयी है. इस समय बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर चल रही चुनावी प्रक्रिया में भी संख्या बल के हिसाब से राजद को 3 सीट ही मिल सकती है. ऐसे में राबड़ी देवी की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है. इस संभावित जीत से सदस्यों की संख्या 6 तक पहुंच सकती है. कम से कम 8 सीट की जरूरत है. इस संदर्भ में विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि समय आने पर उचित कार्रवाई कर दी जाएगी.जो प्रतिपक्ष के नेता की कुर्सी पर वार करेगा और राबड़ी देवी प्रतिपक्ष के नेता नहीं रह पायेगी. इतना तो तय है कि राजनीतिक में कुछ भी हो सकता है. अब निर्दलीय रीतलाल राय और अशोक कुमार अग्रवाल पर निर्भर है जो राजद का दामन थामे. वहीं भारतीय राष्ट्र्ीय कांगेस के राजेन्द्र राम और प्रेम चन्द्र मिश्रा, लोक जनशक्ति पार्टी की नूतन सिंह और हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा; सेक्युलर द्ध है.

बिहार में जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच बिहार विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दलबल के साथ अचनाक राजभवन पहुंच गए. राजभवन में उन्होंने महामहिम राज्यपाल फागू चैहान से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा.नेता प्रतिपक्ष ने बिहार सरकार की जमकर शिकायत की. बता दें कि आज सत्ताधारी जेडीयू ने राजद को बड़ा झटका दिया है. जेडीयू ने लालू प्रसाद की पार्टी के 5 विधान पार्षदों को तोड़कर अपनी पार्टी में मिला लिया है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महामहिम राज्यपाल से कहा कि बिहार में जिस तरीके से विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है उसके बारे में हमलोगों ने अवगत कराया. उन्होंने कहा कि सरकार बिहार का विकास छोड़कर विरोधी पार्टियों को तोड़ने में लगी है. राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद बाहर निकले तेजस्वी यादव ने जमकर भड़ास निकाली.उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार घर में छुपकर यही काम कर रहे थे.उनको विकास से तो कोई मतलब है नहीं. वे सिर्फ इसी सब काम में अपना एनर्जी लगाए हुए हैं.उन्हें सिर्फ कुर्सी चाहिए. लेकिन बिहार की जनता आने वाले कुछ दिनों में सबक सिखायेगी. बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चैधरी और भावी विधायक पप्पू राय ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नाटक से लोग उब गये हैं आने वाले चुनाव में सबक सिखाने को बेताब हैं.



इसके 2 साल के बाद 2020 में मो. कमर आलम, राधा चरण सेठ, संजय प्रसाद,रण विजय कुमार सिंह, दिलीप राय 5 विधान पार्षदों के इस्तीफा देने के बाद संख्या 3 बचकर रह गयी है. इस समय बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर चल रही चुनावी प्रक्रिया में भी संख्या बल के हिसाब से राजद को 3 सीट ही मिल सकती है. ऐसे में राबड़ी देवी की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है. इस संभावित जीत से सदस्यों की संख्या 6 तक पहुंच सकती है. कम से कम 8 सीट की जरूरत है. इस संदर्भ में विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि समय आने पर उचित कार्रवाई कर दी जाएगी.जो प्रतिपक्ष के नेता की कुर्सी पर वार करेगा और राबड़ी देवी प्रतिपक्ष के नेता नहीं रह पायेगी. इतना तो तय है कि राजनीतिक में कुछ भी हो सकता है. अब निर्दलीय रीतलाल राय और अशोक कुमार अग्रवाल पर निर्भर है जो राजद का दामन थामे. वहीं भारतीय राष्ट्र्ीय कांगेस के राजेन्द्र राम और प्रेम चन्द्र मिश्रा, लोक जनशक्ति पार्टी की नूतन सिंह और हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा (सेक्युलर) पटना.बिहार विधान परिषद के राजद से संबंधित 5 विधान पार्षदों ने अकस्मात इस्तीफा दे दिया. इस इस्तीफे से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को जोरदार झटका लगने वाला है और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की उनकी कुर्सी भी छिन जाएगी. 75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद में मुख्य विपक्षी दल के दर्जे के लिए कुल सदस्यों का 1/10 अर्थात न्यूनतम 8 सदस्य होने चाहिए. राजद के पास गिनती के राबड़ी देवी, सुबोध कुमार और राम चन्द्र पूर्वे यानी 3 सदस्य ही बच गए हैं.

वर्ष 2018 की याद ताजी कर दी है.द्विवार्षिक चुनाव के बाद 75 सदस्यों वाले ऊपरी सदन में राजद के सदस्यों की संख्या 7 से बढ़कर 9 हो गई. बतौर विधान परिषद् के उप सभापति हारुन राशिद की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को विपक्ष के नेता स्वीकृति प्राप्त करने का आवेदन प्राप्त हुआ था. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी को विधान परिषद् में नेता विपक्ष बन गईं. राज्य के ऊपरी सदन में यह स्थिति उनकी पार्टी के सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण हुई है.अब संख्या में कमी होने के नाते राबड़ी देवी की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है.

इसके 2 साल के बाद 2020 में मो. कमर आलम, राधा चरण सेठ, संजय प्रसाद,रण विजय कुमार सिंह, दिलीप राय 5 विधान पार्षदों के इस्तीफा देने के बाद संख्या 3 बचकर रह गयी है. इस समय बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर चल रही चुनावी प्रक्रिया में भी संख्या बल के हिसाब से राजद को 3 सीट ही मिल सकती है. ऐसे में राबड़ी देवी की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है. इस संभावित जीत से सदस्यों की संख्या 6 तक पहुंच सकती है. कम से कम 8 सीट की जरूरत है. इस संदर्भ में विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि समय आने पर उचित कार्रवाई कर दी जाएगी.जो प्रतिपक्ष के नेता की कुर्सी पर वार करेगा और राबड़ी देवी प्रतिपक्ष के नेता नहीं रह पायेगी. इतना तो तय है कि राजनीतिक में कुछ भी हो सकता है. अब निर्दलीय रीतलाल राय और अशोक कुमार अग्रवाल पर निर्भर है जो राजद का दामन थामे. वहीं भारतीय राष्ट्र्ीय कांगेस के राजेन्द्र राम और प्रेम चन्द्र मिश्रा, लोक जनशक्ति पार्टी की नूतन सिंह और हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा; सेक्युलर द्ध है.


बिहार में जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच बिहार विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दलबल के साथ अचनाक राजभवन पहुंच गए. राजभवन में उन्होंने महामहिम राज्यपाल फागू चैहान से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा.नेता प्रतिपक्ष ने बिहार सरकार की जमकर शिकायत की. बता दें कि आज सत्ताधारी जेडीयू ने राजद को बड़ा झटका दिया है. जेडीयू ने लालू प्रसाद की पार्टी के 5 विधान पार्षदों को तोड़कर अपनी पार्टी में मिला लिया है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महामहिम राज्यपाल से कहा कि बिहार में जिस तरीके से विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है उसके बारे में हमलोगों ने अवगत कराया. उन्होंने कहा कि सरकार बिहार का विकास छोड़कर विरोधी पार्टियों को तोड़ने में लगी है. राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद बाहर निकले तेजस्वी यादव ने जमकर भड़ास निकाली.उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार घर में छुपकर यही काम कर रहे थे.उनको विकास से तो कोई मतलब है नहीं. वे सिर्फ इसी सब काम में अपना एनर्जी लगाए हुए हैं.उन्हें सिर्फ कुर्सी चाहिए. लेकिन बिहार की जनता आने वाले कुछ दिनों में सबक सिखायेगी. बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चैधरी और भावी विधायक पप्पू राय ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नाटक से लोग उब गये हैं आने वाले चुनाव में सबक सिखाने को बेताब हैं. पटना.बिहार विधान परिषद के राजद से संबंधित 5 विधान पार्षदों ने अकस्मात इस्तीफा दे दिया. इस इस्तीफे से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को जोरदार झटका लगने वाला है और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की उनकी कुर्सी भी छिन जाएगी. 75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद में मुख्य विपक्षी दल के दर्जे के लिए कुल सदस्यों का 1/10 अर्थात न्यूनतम 8 सदस्य होने चाहिए. राजद के पास गिनती के राबड़ी देवी, सुबोध कुमार और राम चन्द्र पूर्वे यानी 3 सदस्य ही बच गए हैं.

वर्ष 2018 की याद ताजी कर दी है.द्विवार्षिक चुनाव के बाद 75 सदस्यों वाले ऊपरी सदन में राजद के सदस्यों की संख्या 7 से बढ़कर 9 हो गई. बतौर विधान परिषद् के उप सभापति हारुन राशिद की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को विपक्ष के नेता स्वीकृति प्राप्त करने का आवेदन प्राप्त हुआ था. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी को विधान परिषद् में नेता विपक्ष बन गईं. राज्य के ऊपरी सदन में यह स्थिति उनकी पार्टी के सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण हुई है.अब संख्या में कमी होने के नाते राबड़ी देवी की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है.

इसके 2 साल के बाद 2020 में मो. कमर आलम, राधा चरण सेठ, संजय प्रसाद,रण विजय कुमार सिंह, दिलीप राय 5 विधान पार्षदों के इस्तीफा देने के बाद संख्या 3 बचकर रह गयी है. इस समय बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर चल रही चुनावी प्रक्रिया में भी संख्या बल के हिसाब से राजद को 3 सीट ही मिल सकती है. ऐसे में राबड़ी देवी की कुर्सी जानी तय मानी जा रही है. इस संभावित जीत से सदस्यों की संख्या 6 तक पहुंच सकती है. कम से कम 8 सीट की जरूरत है. इस संदर्भ में विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि समय आने पर उचित कार्रवाई कर दी जाएगी.जो प्रतिपक्ष के नेता की कुर्सी पर वार करेगा और राबड़ी देवी प्रतिपक्ष के नेता नहीं रह पायेगी. इतना तो तय है कि राजनीतिक में कुछ भी हो सकता है. अब निर्दलीय रीतलाल राय और अशोक कुमार अग्रवाल पर निर्भर है जो राजद का दामन थामे. वहीं भारतीय राष्ट्र्ीय कांगेस के राजेन्द्र राम और प्रेम चन्द्र मिश्रा, लोक जनशक्ति पार्टी की नूतन सिंह और हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा; सेक्युलर द्ध है.


बिहार में जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच बिहार विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दलबल के साथ अचनाक राजभवन पहुंच गए. राजभवन में उन्होंने महामहिम राज्यपाल फागू चैहान से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा.नेता प्रतिपक्ष ने बिहार सरकार की जमकर शिकायत की. बता दें कि आज सत्ताधारी जेडीयू ने राजद को बड़ा झटका दिया है. जेडीयू ने लालू प्रसाद की पार्टी के 5 विधान पार्षदों को तोड़कर अपनी पार्टी में मिला लिया है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महामहिम राज्यपाल से कहा कि बिहार में जिस तरीके से विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है उसके बारे में हमलोगों ने अवगत कराया. उन्होंने कहा कि सरकार बिहार का विकास छोड़कर विरोधी पार्टियों को तोड़ने में लगी है. राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद बाहर निकले तेजस्वी यादव ने जमकर भड़ास निकाली.उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार घर में छुपकर यही काम कर रहे थे.उनको विकास से तो कोई मतलब है नहीं. वे सिर्फ इसी सब काम में अपना एनर्जी लगाए हुए हैं.उन्हें सिर्फ कुर्सी चाहिए. लेकिन बिहार की जनता आने वाले कुछ दिनों में सबक सिखायेगी. बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चैधरी और भावी विधायक पप्पू राय ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नाटक से लोग उब गये हैं आने वाले चुनाव में सबक सिखाने को बेताब हैं. है.


बिहार में जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच बिहार विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दलबल के साथ अचनाक राजभवन पहुंच गए. राजभवन में उन्होंने महामहिम राज्यपाल फागू चैहान से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा.नेता प्रतिपक्ष ने बिहार सरकार की जमकर शिकायत की. बता दें कि आज सत्ताधारी जेडीयू ने राजद को बड़ा झटका दिया है. जेडीयू ने लालू प्रसाद की पार्टी के 5 विधान पार्षदों को तोड़कर अपनी पार्टी में मिला लिया है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महामहिम राज्यपाल से कहा कि बिहार में जिस तरीके से विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है उसके बारे में हमलोगों ने अवगत कराया. उन्होंने कहा कि सरकार बिहार का विकास छोड़कर विरोधी पार्टियों को तोड़ने में लगी है. राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद बाहर निकले तेजस्वी यादव ने जमकर भड़ास निकाली.उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार घर में छुपकर यही काम कर रहे थे.उनको विकास से तो कोई मतलब है नहीं. वे सिर्फ इसी सब काम में अपना एनर्जी लगाए हुए हैं.उन्हें सिर्फ कुर्सी चाहिए. लेकिन बिहार की जनता आने वाले कुछ दिनों में सबक सिखायेगी. बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चैधरी और भावी विधायक पप्पू राय ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के नाटक से लोग उब गये हैं आने वाले चुनाव में सबक सिखाने को बेताब हैं.


 

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