ताजा खबर
छतीसगढ़ में जोगी की जमीन खिसकी ! कांग्रेस की सरकार बनने का इंतजार ! एमपी में कहीं बागी न बिगाड़ दें खेल नोटबंदी ने तो अर्थव्यवस्था का बाजा बजा दिया
संसदीय समिति को ऐसे पलीता लगाया

राजेंद्र तिवारी 

नई दिल्ली. आज 31 अगस्त है. यह नोटबंदी पर बनी संसदीय समिति का अंतिम दिन है. संसदीय समिति ने जो रिपोर्ट तैयार की, उसे संख्याबल के बूते रोक दिया गया है. संसदीय समिति आज के बाद भंग हो जाएगी और इसी के साथ उसकी रिपोर्ट भी. रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में नोटबंदी के आकड़े को लेकर मुश्किल में फंसी मोदी सरकार ने नोटबंदी पर संसदीय समिति की रिपोर्ट को अपने सांसदों के जरिये रोक दिया है. वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय संसदीय समिति का कार्यकाल 31 अगस्त को खत्म हो गया. इस समिति ने जो रिपोर्ट तैयार की थी, उसमें कहा गया था कि नोटबंदी की वजह से देश की विकास दर पर एक फीसदी का नकारात्मक असर पड़ा है. संसदीय समिति के 31 सदस्यों में से 17 भाजपा के थे. भाजपा सदस्यों ने झारखंड के सासंद निशिकांत दुबे के नेतृत्व में इन 17 सदस्यों ने इस रिपोर्ट पर असहमति नोट वीरप्पा मोइली को दिया. चूंकि असहमति आधे से ज्यादा सदस्यों की है, इसलिए अब इसे संसद में पेश नहीं किया जा सकेगा.
रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी संबंधी सभी दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के दौरान 500 व 1000 के करेंसी नोटों में से 99.3 फीसदी वापस जमा हो गये. इसका मतलब यह हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी ने जो दावा किया था, वह पूरी तरह गलत साबित हुआ. प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे जिन लोगों ने लाखों करोड़ का कालाधन जमा कर रखा है, वह बेकार हो जाएगा. इसके अलावा, आतंकवाद व नक्सलवाद की कमर टूट जाएगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उसे १५ लाख करोड़ मूल्य के 500 व 1000 रु. के नोटों में से 10 लाख करोड़ के नोट ही वापस आने की उम्मीद है. यानी केंद्र सरकार के मुताबिक करीब ५ लाख करोड़ रुपये (33 फीसदी) काला धन था. लेकिन वस्तुस्थिति कुछ और ही निकली. प्रधानमंत्री ने तो एक सार्वजनिक सभा में यह तक कहा था कि पचास दिन की मोहलत दीजिए और यह सब नहीं हुआ तो उनको चौराहे पर फांसी पर लटका दिया जाए. रिजर्व बैंक के आंकड़ों को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर जबरदस्त ढंग से हमलावर हो चला है.
नोटबंदी के लगभग दो साल बाद आज जब हम देखते हैं तो पाते हैं कि भारतीय परिवारों में नकदी का स्तर बढ़कर राष्ट्रीय आय का 2.8 फीसदी हो गया है जो पिछले एक दशक का सबसे उच्च स्तर है. जबकि बैंक सेविंग्स और कॉरपोरेट जमा दशक के सबसे न्यूनतम स्तर 2.9 फीसदी पर पहुंच गये. रिजर्व बैंक द्वारा दिये गये इन आकड़ों का मतलब क्या हुआ? यही न कि नोटबंदी के बाद जहां नकद इस्तेमाल में कमी आनी थी, लेकिन कमी आने की जगह नकदी का स्तर बढ़ गया. डिपोजिट ग्रोथ जो  2016-17 में 11.1 फीसदी थी लेकिन बीते मार्च में यह स्तर ५5.8 फीसदी ही रह गया. इसी तरह वित्त वर्ष 2016-17 में नकदी कुल जीडीपी का 8.8 फीसदी थी जो बीते वित्त वर्ष में 10.9 फीसदी हो गयी.अब अगर ऐसे में संसदीय समिति की रिपोर्ट भी विपरीत आ जाती तो मोदी सरकार और भाजपा के लिए मुश्किलें और बढ़ जातीं.
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • एमपी में कहीं बागी न बिगाड़ दें खेल
  • कांग्रेस की सरकार बनने का इंतजार !
  • छतीसगढ़ में जोगी की जमीन खिसकी !
  • नोटबंदी ने तो अर्थव्यवस्था का बाजा बजा दिया
  • नोटबंदी की एक और कहानी !
  • छतीसगढ़-सतनामी समाज ने भाजपा को दिया झटका
  • और राजस्थान में जाटों ने छोड़ा साथ
  • महाजन और विजयवर्गीय के बीच घमासान !
  • अन्ना ,विवेकानंद फाउंडेशन और डोभाल
  • छतीसगढ़ में कांग्रेस टिकट बेंच रही है ?
  • तो डोभाल के दिमाग की उपज थी अन्ना आंदोलन !
  • रवि पार्थसारथी का नाम मीडिया छुपा क्यों रही
  • मिशन 65 प्लस के बजाय 35 प्लस का खाका ?
  • टिकट बंटने से पहले ही भाजपा में भगदड़
  • प्रदेश में गरीब 50 फीसदी कैसे हो गए ?
  • रास्ते में जो अफसर आया वह निपट गया !
  • अजीत जोगी नहीं लड़ेंगे चुनाव ?
  • एमपी में भाजपा की हालत बिगड़ी ,संघ का सर्वे
  • सरकार के अहंकार ने ली सानंद की जान !
  • इस ' अकबर ' को जानते हैं आप !
  • एमपी में भाजपा का सिंधिया कार्ड
  • गंगा के लिए मौत मुबारक़!
  • एमजे अकबर नपेंगे तो नरेंद्र मोदी कैसे बचेंगे?
  • अभिषेक के गले की हड्डी न बन जाए विदेशी कमाई ?
  • गंगा के लिए प्राण देने वाला संत !
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.