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कैसे अमृत बन गया ओडी नदी का पानी बिहार की राजनीति भी हुई गरम विंध्य ने रोका कांग्रेस का विजय रथ पर कांग्रेस के लिए भी सबक है
गोरखपुर में वोट लूटने की तैयारी ?

आशुतोष सिंह 

लखनऊ .उत्तर प्रदेश में लोकसभा की दो सीटों के चुनाव 11 मार्च को होने जा रहे हैं .इन दोनों सीट पर पूरे देश की नजर लगी हुई है .खासकर राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश और ओडिशा के चुनाव नतीजों के बाद . इन दोनों चुनाव में भी गोरखपुर की संसदीय सीट बहुत ही महत्वपूर्ण हो गई है .मोदी ,योगी से लेकर अमित शाह तक के लिए .गोरखपुर  योगी आदित्यनाथ का गढ़ है .इस अंचल में भाजपा से ऊपर योगी आदित्यनाथ की हिंदू युवा वाहिनी है .यह उग्र हिंदुत्व की प्रयोगशाला भी है .ऐसे में योगी के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है .दिक्कत यह है कि यह चुनाव योगी नहीं लड़ रहे हैं न ही गोरक्ष धाम का कोई प्रतिनिधि चुनाव लड़ रहा है .भाजपा हाईकमान ने ब्राह्मण नेता उपेन्द्र दत्त शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है. पर उनकी कोई बड़ी पहचान नहीं रही है इसलिए पार्टी के सिपहसालार चिंतित भी हैं .पर भाजपा किसी तरह यह चुनाव जीतना चाहती है .पूर्वांचल के कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न देने की शर्त पर कहा , गोरखपुर का उप चुनाव तो लूटा जाएगा .सरकार किसी भी कीमत पर यह चुनाव जीतने की तैयारी में है .ऐसे में विपक्ष की राह आसान नहीं है .अगर निष्पक्ष चुनाव हुआ तो भाजपा यह चुनाव आसानी से नहीं जीत सकती .
इस टिपण्णी के पीछे कई वजह भी है .दरअसल गोरखपुर योगी के कई बार सांसद होने के बावजूद सबसे पिछड़ा हुआ शहर है .पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के बाद इस जिले विकास से संबंध ही समाप्त हो चुका है .प्रदेश का यह पिछड़ा ही नहीं सबसे गंदा शहर भी है .पिछले दिनों आक्सीजन के चलते दर्जनों बच्चों की जान जाने के बाद यह शहर चर्चा में आया था .लूटपाट और अन्य अपराध के मामले में भी यह सबसे ऊपर है .हालांकि माफिया गिरोहों की गैंग वार अब नहीं होती पर छुटभैय्ये बदमाश अभी भी राजनीतिक शरण पाते हैं .हिंदू युवा वाहिनी के आगे शासन प्रशासन सब नत मस्तक है .ऐसे में चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार को अपेक्षित वोट मिले यह जरुरी नहीं .समाजवादी पार्टी ही यहां भाजपा को टक्कर देगी .कांग्रेस चुनाव लड़ने की इच्छा पूरी कर रही है .वह कितना वोट काटती है यह देखना होगा .ऐसे में मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच ही होना है .शहर के ज्यादातर ब्राह्मण तो भूतपूर्व बाहुबली हरिशंकर तिवारी का साथ देते हैं .वे भाजपा के साथ न जाएं यह इंतजाम योगी आदित्यनाथ ने पहले ही कर दिया है .दरअसल योगी इस अंचल में राजपूतों के निर्विवाद नेता रहे हैं .ऐसे में अगड़ी जातियों का एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ भी रहा है .पर हिंदुत्व के नाम पर वह एकजुट हो जाता था .इसबार माहौल कुछ बदला है .समाजवादी पार्टी के साथ पीस पार्टी का गठजोड़ भाजपा के लिए कुछ दिक्कत पैदा कर रहा है .दूसरे कांग्रेस ने उम्मीदवार देकर भाजपा का रास्ता मुश्किल तो किया है .वह उम्मीदवार भाजपा का ही वोट कटेगा .पर इस सब पर बूथ प्रबंधन भारी पड़ेगा .भाजपा की तैयारी इस सिलसिले में ठीकठाक है .
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