ताजा खबर
दलित छात्र के हत्यारों को गिरफ्तार करे -अखिलेश राफ़ेल सौदा -शक की सुई किधर ? एक सैरगाह पर उग्रवादियों की नजर रमन के खिलाफ लड़ेंगे जोगी
कलंकित पूंजीवाद की ओर ?

 त्रिभुवन 

मैं हतप्रभ हूं देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली की आर्थिक समीक्षा पढ़ते हुए. उन्होंने एक दिन पहले ही देश की संसद में बजट से ठीक पहले देश की आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत की. मैं इसीलिए इसे उनकी ही समीक्षा कह रहा हूं. उन्होंने अध्याय एक के 29वें पाइंट पर कहते हैं : भारत पिच्छलग्गू समाजवाद से कलंकित पूंजीवाद की ओर अग्रसर हो रहा है.जेटली ने कृषि समीक्षा में कहा है : अंबेडकर ने जोरदार ढंग से ग्रामीण भारत को स्थानीयता का गर्त, अज्ञानता, संकीर्णता और सांप्रदायिकता का अड्‌डा कहकर एक गहरी सच्चाई को ही व्यक्त किया था.
 
देश के अतिप्रबुद्ध वित्त मंत्री ने भारतीय गांवों, भारतीय ग्रामीणों और भारतीय किसानों का ख़तरनाक उपहास उड़ाया है. उन्होंने बहुत आपत्तिजनक शब्दों में कहा है : इतिहास और साहित्य में भारतीय लोक संस्कृति में किसान को मिथकीय दर्जा दे दिया गया है : भोला-भाला, निष्कपट, मेहनती, जो प्रकृति से साथ घुला मिला है. लेकिन फिर भी गरीब, कमज़ोर और पीड़ित रहा है, पहले तो साम्राज्यवादी ताक़तों द्वारा और बाद में इस देश के भूपतियों और बिचौलियों द्वारा. बॉलीवुड ने भी भारतीय किसान के इस मिथक को बनाने और बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उदाहरणार्थ मदर इंडिया, दो बीघा ज़मीन, उपकार, लगान और अभी हाल में पीपली लाइव जैसी फ़िल्मों में.
 
आप देश के किसान के बारे में इस हद तक अपमानजनक ढंग से संसद में एक लिखित दस्तावेज रखने का दु:साहस तो देखिए वित्त मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे इस शख्स का. लगता है, इस देश की संसद और राजधानी के गलियारों में राजनीति और पत्रकारिता में कूड़े का गगनचुंबी ढेर लगा है. आख़िर देश के किसान के बारे में इस देश की संसद में क्या प्रस्तुुत करना संभव है? मैं अवाक हूं.इस देश की संस्कृति और थाती की बातें करने वाली भारतीय जनता पार्टी का एक नेता यहां तक सोच सकता है? और देश की संस्कृति के गर्व की बात करने वाले समस्त संघ दीक्षित तो चुप हैं ही, बाकी सब भी लगता है, मानसिक बंजरपन के दौर से गुजर रहे हैं.
 
जेटली एक जगह कहते हैं : हमें भावी श्रम बल के लिए ऐसे हट्‌टे-कट्‌टे लोग चाहिए, जिनमें निरंतर आत्मासात करने की क्षमता हो!...ओ भाई, यह कौन सी  भाषा है और तुमने देश के किसी कॉलेज में सीखी थी?इस अध्याय के शुरू में ज़नाब ने ब्रिटिश अर्थशास्त्री और मैकॉले की दोहिती के बेटे जॉन मेनर्ड कीन्ज को उद्धृत करते हुए एक निहायत ही मूर्खतापूर्ण बात लिखी है : जो अवश्यंभावी है, वह तो कभी होता नहीं. होता वही है, जो कभी सोचा नहीं.और ये भी लीजिए. वे खंड एक में एक जगह लिखते हैं : भारतीय माता-पिता तब तक बच्चे पैदा करने में जुटे रहते हैं, जब तक उन्हें वांछित पुत्रों की प्राप्ति नहीं हो जाती. अगर यह अंतिम बच्चा है तो यह पुरुषों के पक्ष में मुड़ जाता है, लेकिन अगर यह अंतिम नहीं है तो यह स्त्री के पक्ष में चला जाएगा.
 
एक जगह वे जो लिखते हैं, उसे पढ़कर तो हंस-हंस कर पेट में बल पड़ जाएंगे. वे लिखते हैं : सुधार की गति और परिमाण तभी हो सकते हैं जब शौचालय बनाने का उपयोग शौचालय बनाने में हो.
महाराज ने एक जगह तो पराकाष्ठा ही कर दी : "वस्त्रों के अंतरराष्ट्रीय निर्यात क्षेत्र में एक बहुत ही खुशी की बात है. इस क्षेत्र में चीन का अंशदान तेजी से घट रहा है. हालांकि भारत ने इस स्थिति का कोई फ़ायदा नहीं उठाया है, लेकिन बांग्लादेश और वियतनाम ने चीन के खाली किए इस स्पेस का बहुत तेजी से फ़ायदा उठाया है." ....मन करता है, ऐसा लिखने वाले की नाक पर मुक्का दे मारूं! बलिहारी है, ऐसी बुद्धि पर कि हम तो चलो फ़ायदा नहीं उठा पाए, लेकिन बांग्लादेश और वियतमान ने फ़ायदा ले लिया. अरे वो कौनसे तुम्हारे फूफा के बेटे भाई हैं, जो इतना प्रसन्न हो रहे हो अपनी काहिली पर.
 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • दलित छात्र के हत्यारों को गिरफ्तार करे -अखिलेश
  • एक सैरगाह पर उग्रवादियों की नजर
  • राफ़ेल सौदा -शक की सुई किधर ?
  • बिहार में डेरा डालेंगे शरद यादव
  • रमन के खिलाफ लड़ेंगे जोगी
  • किसानो के नाम पर सफ़ेद झूठ !
  • गले की हड्डी बना वेस्टलैंड हेलीकाप्टर !
  • अफसर पर लगाम और हुड़दंगी बेलगाम !
  • दिग्विजय की यात्रा धार्मिक या सियासी?
  • जोगी की तोडफोड़ शुरू ,देवव्रत पहले शिकार
  • कांग्रेस में राजबब्बर के खिलाफ बगावत ?
  • तो अब हरियाणा की बारी है
  • बदहाल किसानो को अब बजट का इंतजार
  • आनंदी बेन के जरिये शिवराज पर नजर!
  • बिना बर्फ़बारी के निकल गया पौष
  • इस विरोध को समझें नीतीश जी
  • भाजपा के पल्ले व्यंग नही पड़ता
  • एअर इंडिया बेचने की तैयारी ?
  • शिवराज को गुस्सा क्यों आया?
  • रहीम की दास्तान सुनेगा लखनऊ
  • चार जजों की चिट्ठी !
  • हे प्रभु इतनी ऊंचाई न देना !
  • अंबानी को भी बरी कराया और राजा को भी !
  • पर्यावरण का यह अनुपम आदमी
  • राहुल को भी ज़िन्दगी जीने का हक़ है
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.