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नेहरु का चरित्र समा गया था मैं अविवाहित हूं लेकिन कुवारां नहीं भारत छोडो आंदोलन और अटल वे एक अटल थे
अफसर पर लगाम और हुड़दंगी बेलगाम !

आशुतोष सिंह 

लखनऊ .उत्तर प्रदेश में एक बार फिर हुड़दंगी बेलगाम हो गए हैं .तिरंगा यात्रा के नाम पर जो कुछ भी हो रहा है उससे लोग आशंकित है .कासगंज की घटना उदाहरण है .इस घटना की कवरेज करने वाले वरिष्ठ पत्रकार पंकज झा को जिस तरह असामाजिक तत्वों ने धमकाया वह शर्मनाक है .इस घटना को लेकर बरेली के कलेक्टर सोशल मीडिया पर जब अपनी प्रतिक्रिया दी तो कई मंत्री तक भड़क गए और उस अफसर को अपनी टिपण्णी वपसेनी पड़ी .इस घटना को लेकर नौकरशाही के एक खेमे में सुगबुगाहट शुरू हो गई है .बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने अपनी फेसबुक वॉल पर टिप्पणी की थी, "अजब रिवाज़ बन गया है. मुस्लिम मोहल्लों में ज़बरदस्ती जुलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ. क्यों भाई वे पाकिस्तानी हैं क्या? यही यहां बरेली के खेलम में हुआ था. फिर पथराव हुआ, मुकदमे लिखे गए.' इसी टिपण्णी पर हंगामा हुआ .कट्टरपंथियों के साथ मंत्री भी खड़े हो गए .इससे लोग ज्यादा आशंकित है .पिछले साल ही 
 
 उत्तर प्रदेश सरकार ने हंगामे और तनाव के बाद जिस तरह सहारनपुर के डीएम एनपी सिंह व एसएसपी सुभाष दुबे को निलंबित किया उसपर भी सवाल उठा था . दरअसल कई जगह कट्टरपंथी ताकतें माहौल बिगाड़ने में जुटी हुई हैं .इन जगहों पर पुलिस प्रशासन यदि कड़ाई से पेश आता है तो अफसर उनके निशाने पर आ जाते हैं जिससे स्थिति और विकत हो जाती है .एक अफसर ने नाम न देने की शर्त पर कहा ,सरकार की जिम्मेदारी शांति व्यवस्था बनाए रखने की है .अगर सरकार कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वालों को शह देगी तो राजकाज कैसे चलेगा .अफसर को तो आप फ़ौरन धमका देते है और सड़क पर असलहा लहराते लोगों पर खामोश हो जाते है .इस तरह पुलिस प्रशासन का इकबाल ही खत्म हो जाएगा .
दरअसल कई जिलों में कट्टरपंथी संगठन लगातार माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे है जिससे स्थिति ख़राब हो रही है .
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