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भाजपा पर क्यों मेहरबान रहा ओमिडयार

संजय कुमार सिंह 

विदेशी पूंजी किस तरह किसी देश की राजनीति को प्रभावित करती है और एजंडा बदल देती है यह समझने के लिए ओमिडयार नेटवर्क के खेल को समझना होगा । भारत में इस खेल के सूत्रधार भाजपा नेता और एक दक्षिणपंथी  एनजीओ रहा है ।ओमिडयार से धन पाने वाला एक और एनजीओ  2012 में सांसदों को देश के सख्त ई कामर्स कानून के संबंध में अवैध रूप से प्रभावित करता पकड़ा गया था। उस समय भारत की सर्वोच्च सुरक्षा एजेंसी ने इस एनजीओ की निन्दा की थी और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक कह था तथा विदेशी खुफिया एजेंसी को छिपकर काम करने और भारत सरकार में घुसपैठ करने में सहायता करने का आरोप लगाया था और इसका पंजीकरण रद्द कर दिया था (इस एनजीओ का नाम नहीं है)। इस मामले के पकड़े जाने के बाद संबंधित एनजीओ के सह-संस्थापक सीवी मधुकर को ओमिडयार ने नौकरी पर रख लिया। 
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इसके बाद pando.com पर Mark Ames ने ही 9 नवंबर  2014 को (नोटबंदी के बाद) एक और दिलचस्प पीस लिखा था (मैंने इसे भी तब नहीं पढ़ा था)। इसका शीर्षक था, भारत में पियरे ओमिडयार का आदमी मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। दूसरा शीर्षक था, ईबे के अरबपति पियरे ओमिडयार के ग्लोबल इंपैक्ट फंड में लंबे समय तक सीनियर एक्जीक्यूटिव रहे जयंत सिन्हा को भारतीय अतिराष्ट्रवादी नेता नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।  बोल्ड अक्षर में अपडेट के साथ शुरू होने वाली कहानी इस प्रकार थी - सिन्हा (जयंत) का नया पद स्पष्ट बता दिया गया है -वो अब भारत के जूनियर वित्त मंत्री हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली के तहत काम कर रहे हैं। लंबे समय तक ओमिडयार का आदमी रहा व्यक्ति अब इस स्थिति में है कि 2015 का बजट तैयार करने में सहायता करेगा जिसके बारे में (प्रधानमंत्री) नरेन्द्र
मोदी ने (हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक) संकेत दिया है कि "बदलाव लाने वाला" होगा।
जयंत सिन्हा ने 2009 में ओमिडयार नेटवर्क इंडिया एडवाइजर्स की स्थापना की थी और फर्स्ट लुक मीडिया पबलिशर्स इंपैक्ट फंड में साझेदार और प्रबंध निदेशक के रूप में काम किया। सिन्हा ने ओमिडयार नेटवर्क की पांच सदस्यों वाली ग्लोबल एक्जीक्यूटिव कमेटी में भी काम किया था तथा ओमिडयार नेटवर्क के 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा के फंड को भारत की ओर मोड़ दिया था। और इस तरह इसे दुनिया के सबसे बड़े, 700 मिलिय़न डॉलर के इंपैक्ट फंड के लिए सबसे सक्रिय अकेले देश का निवेश बनाया था।  इस साल के शुरू में ओमिडयार नेटवर्क के साझेदार और प्रबंध निदेशक का पद छोड़ दिया था ताकि धुर दक्षिणपंथी भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अपने पिता की संसदीय सीट से चुनाव लड़ सकें। अब मोदी मंत्रिमंडल में सिन्हा की नियुक्ति ने उन्हें पिछले दो सप्ताह में किसी दक्षिण पंथी, कारोबार समर्थक सरकार में सत्ता तक पहुंचने वाली दूसरी ओमिडयार हस्ती बना दिया है (इससे पहले का मामला उक्रेन का है)।
पांडो डॉट कॉम ने आगे लिखा है, जैसा पांडो डेली पूरे साल सूचित करता रहा है, जयंत सिन्हा और उनके बॉस, ओमिडयार भारतीय राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से एक अस्वाभाविक दोहरी भूमिका निभाते रहे हैं और लोकोपकारी दिखने वाले काम सोच-समझकर राजनीतिक निवेश के रूप में किए गए हैं जो सिन्हा के राजनैतिक अभियान का हिस्सा रहा है। ओमिडयार के ऐसे ग्रांट में से कुछ लाभ के लिए किए गए निवेश थे।
जैसे एसकेएस माइक्रोफाइनेंस जैसी माइक्रोफाइनेंस फर्म में ओमिडयार निवेश जिसका समापन बहुत ही घातक ढंग से हुआ जब एसकेएस के कर्ज वसूलने वालों ने जोर लगाया और उनपर सैकड़ों गरीब ग्रामीणों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगा। इन लोगों ने कीटनाशक पीकर, डूबकर और  अन्य तरीकों से आत्महत्या कर ली थी। ओमिडयार सिन्हा का एक और निवेश गैर सरकारी संगठनों में गया जिसने धुर दक्षिणपंथी भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर अच्छी तरह काम किया जब वह विपक्ष में थी और यह काम खासतौर से पिछली (सेंटर-लेफ्ट) सरकार के भ्रष्टाचार पर ध्यान केंद्रित करने का था  जो 2007 से इस साल तक लगातार सत्ता में बनी रही।
भाजपा ने इस साल का चुनाव भ्रष्टाचार के विरोध के दम पर जीता और ओमिडयार सरका ने भारत के सबसे प्रमुख भ्रष्टाचार विरोधी गैर सरकारी संगठनों के अभियान, "आई पेड अ ब्राइब" के लिए धन मुहैया कराया।  2010 में सिन्हा और ओंमिडयार नेटवर्क ने एक भारतीय गैरसरकारी संगठन, जनाग्रह को तीन मिलियन डॉलर दिए ताकि वह  "आई पेड अ ब्राइब" अभियान चला सके। इस खबर में भी जयंत सिन्हा ओमिडयार नेटवर्क की मिलीभगत का जिक्र है तथा गैर सरकारी संगठनों को आर्थिक सहायता तथा उसकी शैली का विवरण है। इसमें अजीत डोभाल के साथ मिलकर इंडिया फाउंडेशन चलाना शामिल है।
इसी खबर में आगे बताया गया है कि सिन्हा और ओमिडयार से धन पाने वाला एक और एनजीओ  2012 में सांसदों को देश के सख्त ई कामर्स कानून के संबंध में अवैध रूप से प्रभावित करता पकड़ा गया था। उस समय भारत की सर्वोच्च सुरक्षा एजेंसी ने इस एनजीओ की निन्दा की थी और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक कह था तथा विदेशी खुफिया एजेंसी को छिपकर काम करने और भारत सरकार में घुसपैठ करने में सहायता करने का आरोप लगाया था और इसका पंजीकरण रद्द कर दिया था (इस एनजीओ का नाम नहीं है)। इस मामले के पकड़े जाने के बाद संबंधित एनजीओ के सह-संस्थापक सीवी मधुकर को ओमिडयार ने नौकरी पर रख लिया। अब वे "सरकारी पारदर्शिता" में ओमिडयार नेटवर्क इंडिया के डायरेक्टर ऑफ इनवेस्टमेंट हैं। इस बीच सिन्हा अपना काम करते रहे हैं ... जिससे ओमिडयार को प्रत्यक्ष लाभ होता है जो अभी भी ईबे के चेयरमैन हैं। ... जून (2014 में) के शुरू में मोदी और सिन्हा के चुनाव जीतने के बाद, मोदी की नई सरकार ने ईबे साथ-साथ अमैजन और गूगल के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था ताकि भारत के ई कामर्स कानून लिखने में सहायता की जा सके।
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