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एक आंदोलन इमली का
ऋषि भटनागर
जगदलपुर.  इमली आंदोलन की सुगबुगाहट फिर से शुरू होने लगी है. पूर्व में जहां इमली आंदोलन केवल बस्तर में चलाया गया था, वहीं अब इस बार ट्रायफेड के माध्यम से इस आंदोलन को समूचे छत्तीसगढ़ में लागू करने की तैयारी की जा रही है. खबर है कि लघु वनोपज के रूप में इमली को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने को लेकर राज्य में योजना तैयार हो रही है. इमली से मिलने वाला लाभ सीधे संग्राहकों तक पहुंचे और बीच के बिचैलियों और व्यापारियों की कड़ी को खत्म करने के उद्देश्य से फिर से इमली आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है. इसके लिये ट्रायफेड जहां इमली खरीदने राशि मुहैया करायेगा, वहीं खरीदी का सारा कार्य लघु वनोपज संघ द्वारा किया जायेगा. वन प्रबंधन समिति व स्व-सहायता समूहों के माध्यम से खरीदी जाने वाली इमली से जहां संग्राहकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा, वहीं प्रत्यक्ष खरीददारों को भी बतौर कमीशन कुछ राशि प्रदान किये जाने की योजना तय की गयी है. कुल मिलाकर इमली के आने वाले मौसम के लिये अभी से सारी तैयारियां की जा रही हैं.
वर्ष 1999 के फरवरी माह में तत्कालीन कलेक्टर रहे प्रवीर कृष्ण ने बस्तर में इमली आंदोलन की शुरूआत की थी, जो वर्ष 2001 तक चला. इस दौरान आदिवासी इमली संग्राहकों को सीधा लाभ पहुंचाने और व्यापारियों और बिचैलियों की जद से इन संग्राहकों को बाहर निकालने का प्रयास था, जिसके तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इमली की खरीदी शुरू की गयी थी. इसके लिये तत्कालीन समय में स्व-सहायता समूहों का गठन ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया गया और उन्हें इमली संग्रहण का जिम्मा सौंपा गया था . इस दौरान तकरीबन 50 करोड़ रूपये की इमली खरीदी गयी थी.
 
ट्रायफेड ने फिर से इमली आंदोलन की शुरूआत कर दी है. इसे लेकर जहां वन प्रबंधन समितियों और स्व-सहायता समूहों को कमान सौंपने की बात कही जा रही है, वहीं इमली खरीदी पर उन्हें कमीशन भी तय किया गया है. दूसरी ओर संग्राहकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करने की तैयारी है. चूंकि इमली को गैर निर्दिष्ट लघु वनोपज में शामिल कर लिया गया है, इसलिये इसे लेकर खरीदी कर लघु वनोपज संघ को दिया जायेगा.
 
इमली की खरीदी को लेकर ट्रायफेड द्वारा राशि मुहैया करायी जायेगी, इसके साथ ही इसे लेकर व्यवस्था प्रदान करेगा. वहीं तय किये गये खरीदी केंद्रों में वन प्रबंधन समितियों और स्व-सहायता समूहों द्वारा इमली की खरीदी की जायेगी. इस इमली को लघु वनोपज संघ को सौंपा जायेगा, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया की जायेगी. चूंकि ट्रायफेड केंद्र सरकार का उपक्रम है, इसलिये खरीदी के दौरान होने वाले नुकसान में 75 फीसदी केंद्र तथा 25 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी.
 
सूत्रों की मानें तो आने वाले मौसम में इमली के लिये निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य 22 रूपये के मान से ट्रायफेड द्वारा संग्राहकों को भुगतान किया जायेगा. वहीं प्रत्यक्ष रूप से इमली खरीदने वाली एजेंसियों, वन प्रबंधन समिति व स्व-सहायता समूहों को 7 प्रतिशत बतौर कमीशन प्रदान किया जायेगा. इसके लिये आने वाले मौसम  में इमली आंदोलन के तहत इमली की खरीदी करने के लेकर ट्रायफेड खाका खींच रहा है. ट्रायफेड के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके पण्डा के अनुसार आने वाले इमली के मौसम में ट्रायफेड के माध्यम से इमली की खरीदी की जानी है, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से ट्रायफेड इमली नहीं खरीदेगा. इमली की खरीदी कर इसे लघु वनोपज संघ को दी जायेगी, जिसके बाद प्रक्रिया के तहत इसका विक्रय ट्रायफेड द्वारा किया जाएगा.साभार -द वाइसेज डाट इन 
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