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घर की देहरी लांघ स्टार प्रचारक बन गई डिंपल

सविता वर्मा 

यह दृश्य जौनपुर के एक कालेज का है .लोगों की भीड़ और मूड बहुत कुछ कह रहा है .यह डिंपल यादव की जनसभा का दृश्य है जो चुनाव के तीन चरण बाद मैदान में आई .उसके बाद बहुत से क्षेत्रों से डिंपल यादव की सभा कराने की मांग उठने लगी .अब वे समाजवादी पार्टी की स्टार प्रचारक बन चुकी है .यह समाजवादी पार्टी का पहला ऐसा चुनाव है जिसे अखिलेश यादव अपने कंधे पर उठाएं हुए है .उनके बाद सबसे ज्यादा सभाएं डिंपल यादव की हो रही हैं .  पहले कुछ सब्र किया पर जब हमला तेज हुआ तो वे जवाब भी देने लगीं . वर्ष 2009 में फिरोजाबाद लोकसभा सीट के उपचुनाव में जिसने भी डिंपल यादव को देखा होगा वे आगरा में बीते बुधवार की  रैली में उनका अंदाज देखकर हैरान जरुर होंगे. फिरोजाबाद में वे लगता था गांव के घर की डेहरी से बहुत सकुचाते हुए बाहर निकली हैं. उस समय चुनाव के दौरान गुलाबी साड़ी में अखिलेश यादव के साथ कुल्हड़ में चाय पीते हुए और फिर खुली जीप पर चुनाव प्रचार करते हुए उनकी फोटो आज भी मिल जायेगी. तब से अबतक बहुत फर्क नजर आयेगा. उत्तर प्रदेश की मारकाट की राजनीति में डिंपल यादव का चेहरा बहुत सौम्य माना जाता है और वे अकसर बच्चों के साथ एक गृहणी की तरह नजर आती रही हैं. पर पहली बार समाजवादी पार्टी के प्रचार में वे बिना अखिलेश के अकेले निकली और लोगों की नजर उनपर टिक गयी. हालांकि उनके साथ गुजरे ज़माने की मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन थी पर इस सभा के केंद्र में डिंपल ही थी. लोकसभा में भले वे बोलते हुए अटकी हों पर इस सभा में वे आत्मविश्वास के साथ बोली ही नहीं बल्कि भाजपा पर हमला भी बोला.  डिंपल  यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा ' उन्होंने नोटबंदी करके पूरे देश को परेशानी में डाल दिया. लोगों को उस अपमान का बदला लेना है. आप लोग इस विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों को हराकर बदला लीजिये. प्रधानमंत्री मोदी जी सिर्फ अच्छी-अच्छी बातें करते हैं और लोगों को भ्रम में रखकर झूठे सपने दिखाते हैं. मोदी जी ने देश के लोगों का भरोसा तोड़ा है. उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में जनता से जो भी वादे किये थे, उनमें से एक भी वादे को आज तक पूरा नहीं किया है.'
डिंपल यादव एक फौजी परिवार से खांटी राजनैतिक परिवार आयी हैं और एक दौर में राजनीति में ढकेल दी गयीं. पर शुरुआत ठीक नहीं रही. सामने खड़े थे राजबब्बर जिन्हें वे चाचा कहती रहीं. पर राजनीति ने आमने सामने खड़ा कर दिया. डिंपल यह चुनाव तो हार गयीं पर उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की दिशा भी इसी चुनाव से बदल गयी. अखिलेश यादव को यह पहली बड़ी राजनैतिक चोट लगी थी जिसका हिसाब उन्होंने 2012 का विधान सभा चुनाव जीत कर  बराबर कर दिया.और अब वे पार्टी के भी मुखिया भी है. ऐसे में डिंपल यादव की भूमिका और बड़ी होनी तय है. आगरा से यह शुरुआत हो चुकी है . 
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