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लाल क्रान्ति का काला चेहरा कहां नेहरू कहां मनमोहन कैसे बन रही है मुंडा सरकार लालू -पासवान के खिलाफ मुलायम
सांसत में समाजवादी पार्टी

 अंबरीश कुमार 

लखनऊ, फरवरी। समाजवादी पार्टी मुस्लिम चेहरे को लेकर पशोपेश में है । पार्टी ने आज फिर मुस्लिम समुदाय पर पुलिस जुल्म का मामला उठाते हुए मायावती सरकार पर निशाना साधा । समाजवादी पार्टी का आरोप है कि बलरामपुर में एक मामूली विवाद के बाद पुलिस ने मुस्लिम समुदाय का इतना उत्पीडन किया कि
 कई गांवों मसलन  ग्राम नरायनपुर धनौड़ा, महाराजगंज, कौवापुर, नेवाजपुर, जयनगर, गुलरिहा रिसानपुर आदि  के सैकड़ो लोग गॉव छोडकर भाग गए हैं।यह पूरा मुद्दा पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने उठाया । जबकि पहले मुस्लिम समुदाय का मुद्दा आते ही पार्टी आज़म खान को आगे करती जो अपनी आक्रामक और तीखी भाषा के चलते उसे पूरे प्रदेश के अल्पसंख्यक समुदाय का सवाल बना देते । आज़म खान समाजवादी पार्टी का मुस्लिम चेहरा बन गए थे । अब पार्टी को फिर एक अदद मुस्लिम चेहरे की तलाश है । दो दिन पहले ही समाजवादी पार्टी के विधायक शाहिद मंजूर ने पार्टी के सभी विधयाको को रात्रि भोज पर बुलाया जिसमे ज्यादातर मुस्लिम नेता जुटे और मुलायम सिंह भी मौजूद थे । पर यह सब आजम खान को अपनी ताकत दिखाने की कवायद नज़र आई । भोज में कुछ मुस्लिम विधायकों ने साफ़ कहा कि आज़म खान को पार्टी में आना हो तो खुद पहल करे पार्टी मिन्नत नहीं करेगी  । दरअसल पार्टी के मुस्लिम विधायको का एक खेमा आज़म खान के दुबारा पार्टी में शामिल होने के खिलाफ है । और यही से पार्टी के सामने मुस्लिम चेहरे का संकट भी पैदा होता है । 
पिछले कुछ समय में कई मुस्लिम नेता पार्टी से अलग हुए या कर दिए गए   । शाहिद सिद्दीकी ,सलीम शेरवानी , शाफिकुररहमान बर्क और आज़म खान आदि इनमें शामिल है  । अभी भी जो नेता पार्टी के साथ है उनमे अहमद हसन ,वकार अहमद शाह ,रशीद मसूद ,अबू आज़मी आदि शामिल है  । पर पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक को फिर वापस लौटा लाए यह कूवत इनमे फिलहाल नज़र नहीं आती  । दूसरी तरफ पार्टी के बागी और निष्कासित नेता अमर सिंह इस मोर्चे पर अलग दिक्कत पैदा कर रहे है  । अमर सिंह कह रहे है -अगर मुलायम सिंह में हिम्मत हो तो अगले मुख्यमंत्री के लिए किसी मुस्लिम के नाम का एलान करे । यह मांग दरअसल मुलायम सिंह को फंसाने के लिए है । आगामी विधान सभा चुनाव में मुस्लिम वोटो को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में तीखा टकराव होना है बशर्ते कोई चुनावी तालमेल न हो । 
ऐसे में समाजवादी पार्टी को एक मुस्लिम चेहरे की तलाश है जो आक्रामक तेवरों से अल्पसंख्यक समुदाय को जोड़ सके । इसके लिए पार्टी किसे आगे करे यही उसकी दिक्कत है । दूसरे शब्दों में आज़म खान की जगह कौन लेगा यह सवाल पार्टी के सामने खड़ा है । हालाँकि पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इससे असहमत होते हुए कहा ,
' आज़म खान पार्टी का  मुस्लिम  चेहरा कभी नहीं रहे । विधायक हुए , मंत्री बने और पार्टी के आगे बढ़ाने की वजह से  वे धीरे धीरे बड़े नेता बन गए । पार्टी में आज भी कई बड़े मुस्लिम नेता है । अहमद हसन से लेकर वकार अहमद शाह उदाहरण है । पर राजेंद्र चौधरी भी यह साफ़ नहीं कर पाए कि इनके रहने के बावजूद पार्टी का ऐसे मुस्लिम वोट बैंक कैसे बिखर गया । यह भी जानकारी मिली है कि अगर पार्टी ने आज़म खान को लेने की कोशिश की तो कुछ मुस्लिम विधायक समाजवादी पार्टी छोड़ अमर सिंह का हाथ पकड़ सकते है  । 
पार्टी ने आज कहा कि प्रदेश की मायावती सरकार के इषारे पर मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जा रहा है, क्योंकि मुसलमान अभी भी यह यकीन करते हैं कि उनके हक -हुकूक की लड़ाई मुलायम सिह यादव और समाजवादी पार्टी ही बेहतर लड़ सकती है। अपने मुख्य मंत्रित्वकाल में उन्होने अल्पसंख्यक कल्याण के कई कदम उठाए थे। मदरसों को अनुदान सूची में लेने के साथ लखनऊ-गाजियाबाद में हज हाउस भी बनवाए थे। उर्दू को रोजी-रोटी से जोड़ा था। अल्पसंख्यक वर्ग के सम्मान की रक्षा करने के श्री यादव हमेशा आगे रहें।               
पार्टी प्रवक्ता ने कहा - मुलायम सिंह यादव ने बाबरी मस्जिद बचाने के लिए अपनी सरकार तक दॉव पर लगा दी थी। उसके उलट बसपा सरकार अल्पसंख्यकों के साथ पक्षपात व्यवहार कर रही है। चुन-चुनकर मुस्लिम अफसरों को किनारे किया गया है। पुलिस व प्रशासन में उनकी भागीदारी नगण्य है। jansatta
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