राजेश आहूजा
नई दिल्ली. चीनी हैकरों ने दिसंबर में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) एमके नारायणन के कंप्यूटर ही नहीं, बल्कि तीनों सेनाध्यक्षों समेत कई शीर्ष अधिकारियों के २क्क् से ज्यादा कंप्यूटर हैक कर लिए थे। इस हैकिंग ऑपरेशन को चीन से अंजाम दिया गया था। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई को चीन की सरकार का समर्थन प्राप्त था।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जैसा शुरू में लग रहा था यह उससे कहीं बड़ा मामला है। घटना की जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर व पूर्व डिप्टी एनएसए शेखर दत्त के कंप्यूटर भी इस हाईटेक सेंधमारी का शिकार हुए थे। एनएसए का दावा है कि हैक किए गए कंप्यूटर शीर्ष अधिकारियों के गोपनीय कम्युनिकेशन नेटवर्क का हिस्सा नहीं थे।
उधर, जांच एजेंसियों ने २क्क् से ज्यादा इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) एड्रेस की पहचान की है, जिनमें सेंधमारी की गई थी। आईपी अंकों का वह लेबल होता है, जो एक ही नेटवर्क से जुड़े कंप्यूटरों को दिया जाता है।
सूत्रों का कहना है कि एक सैन्य प्रमुख का कंप्यूटर तो पूरी तरह हैक कर लिया गया था। उन्होंने सिस्टम हैक करने के इरादे से भेजी गए एक मेल को खोल दिया था। इस मेल में ट्रोजन नामक स्पाईवेयर छिपा था। इसे एक बंद पड़े खाते ‘.एनआईसी.इन’ से भेजा गया था। यह खाता विदेश मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी का था, जिसे पहले ही हैक कर लिया गया था।
हैकिंग की रिपोर्ट मिलते ही नेशनल टेक्निकल रिसर्च आर्गनाइजेशन (एनआरटीओ) व नेशनल इंफार्मेशन सेंटर (एनआईसी) के साइबर एक्सपर्ट सक्रिय हो गए थे। उन्होंने घटना से जुड़ी तमाम कड़ियों को जोड़ दिया था, जिनसे पता चल सका कि यह काम चीन से किया गया था।