ताजा खबर
साफ़ हवा के लिए बने कानून नेहरू से कौन डरता है? चालीस साल पुराना मुकदमा ,और गवाह स्वर्गवासी चार दशक बाद समाजवादी चंचल फिर जेल में
सड़क पर उतरे विदर्भ के किसान

अंबरीश कुमार

 
यवतमाल, सितंबर, विदर्भ के इस अंचल में किसान फिर सड़क पर है। महाराष्ट्र की संतरा बेल्ट  से लेकर कपास बेल्ट  तक संकट में है। नागपुर से वर्धा होते हुये यवतमाल पहूंचने पर किसान को बदहाली सामने आ जाती है। पिछले वर्ष इस अंचल में करीब बारह सौ कपास किसानों ने खुद्कुशी की थी। इस साल कुछही महीनों में यह आकड़ा साढे छह सौ पार कर चुका है। जाहिर है केन्द्र सरकार की कर्ज माफी योजना और कांग्रेस के युवा चहरे राहुल गांधी की यवतमाल यात्रा तक का कोई खास असर नहीं पड़ा है। यवतमाल पहुंचने से पहले ही कपास के खेतों में हल चलाता किसान और सफेद फूल नजर आता है। पिछले कुछ दिनों से बारिा हुइ है जिससे कपास खेतों की हरियाली के बीच अरहर के बड़े होते पौधें भी नजर आते है। लेकिन किसान आशन्कित है। वर्धा के पास एक नौजवान प्रतीक पाटील कपास के खेत से निकलकर मिलता है। प्रतीक ने कहा कपास में एक एकड़ पर कीटनााक मिलाकर करीब पंद्रह हजार रूपये खर्च हो चुके है। पता नहीं इतना पैसा भी वापस मिलेगा या नहीं। 
यह स्थिति सिर्फ वर्धा और यवतमाल तक ही सीमित नही है। पास के जिले अकोला में भी हालत गंभीर है। अकोला के गजानन मेश्राम ने कहा जिले के आधा दर्जन से ज्यादा तालुका में किसानों की हालत खराब है। दो दिन पहले ही एक किसान खुद्कुशी कर चुका है। खुद्कुशी करने वाले सभी किसान कपास की खेती के चलते कर्ज के जाल में फसे और फिर साहूकारों के दबावों के चलते आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे है। तिलहर, तेल्हारा, अकोट, बोरगांव, मुर्तिजापुर तालुका में हालत काफी खराब है। थोडी बहुत राहत सिर्फ पातुर तालुका में किसानों को मिली है। जहां सिचाई की सूविधा है। 
इससे पहले नागपुर से करीब पंद्रह किलो मीटर आगे बढने पर शिवनगाँव  में किसानों की एक सभा में पहुंचे तो संतरा बेल्ट  के संकट का पता चला। इस गांव के आस-पास ग्यारह गांवों तिल्हारा, कलकुही, सुनढाना, रहेगा, खापरी, चिजभवन, जामथा, खुर्सापार, हिंगना और इसासनी गावों की करीब दस हजार ऐकड जमीन मेहान परियोजना की भेंट चढ चुकी है। गावों के एक कास्तकार भुसारी ने कहा - हमारी दस एकड़ की खेती है। जिससे हर साल पांच लाख रूपयें के फल और अनाज बिक जाते है। जिसमें सिर्फ संतरा एक लाख रूपयें का बिकता है। पर अब यह जमीन सरकार मेहान परियोजना के चलते पूंजीपतियों को सौपने जा रही है। यह जमीन तीन फसली है। इस परियोजना के चलते इस इलाके की संतरा बेल्ट  खत्म हो जाएगी। फिलहाल थोडी बहुत उम्मीद कार्गो मेहान अन्याय विरोधी शेतकरी समिति के आंदोलन से बची है। 
मेहान का मतलब मल्टी मोडल इंटरनेानल हब एंड एअरपोर्ट होता है। जो महाराष्ट्र एअरपोर्ट डेवलपमेंट कम्पनी ने बनाया है। जिसके चलते किसानों से एक एकड जमीन पचास हजार से लेकर डेढ लाख रूपए मे ली गई और उद्योगपतियों को पचपन लाख रूपए एकड के भाव दी जा रही है। जिसके चलते आस-पास के इलाकों की जमीन की कीमत और ज्यादा बढ गइ है। जिसमें नेताओं और उद्यमियों ने बडे पैमाने पर निवेश करना शुरू कर दिया है। सडक के किनारे-किनारे वास्तुलैंड, ग्रेसलैंड, संदेा रिअल स्टेट, वेंटेा सिटी, सहारा सिटी, श्री बालाजी रिअल र्टफ जैसे बोर्ड नजर आते। सारा खेल बडे नेताओं और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का है। यही वजह है की पहले यह जमीन सरकारी सस्ते घर के नाम पर अधिग्रहित की गई। बाद में मेहान फिर एसईजेड और अब इंटरनेानल हेल्थ सिटी, र्फस्ट सिटी टाउनािप के नाम पर लोगों को आकर्षित किया जा रहा है। इसके लिए ऐसी-ऐसी हवाई योजनाएं बनाई जा रही है जिसका कोई तुक ही नहीं है। मसलन हवाई अड्डे तक ट्रेन जाएगी और फिर उससे सामान उतारकर कार्गो में भेजा जाएगा। सभी जानते है की ट्रेन से जो कन्टेनर भेजे जाते है वे हवाई जहाज में नहीं जा सकते। 
विदर्भ में किसानों के बीच काम कर रहे प्रताप गोस्वामी ने कहा - समूचे विदर्भ में किसानों की हालत गंभीर होती जा रही है। न तो केन्द्र की कर्ज माफी योजना का कुछ खास असर हुआ और न ही किसानों से किए गए वायदे पूरे किए गए। शिवनगाँव  से लेकर अकोला अमरावती तक किसान बदहाल है। अभी सिर्फ कपास के फूल आए है। डेढ महीनों का समय बाकी है, अगर फसल ठीक ठाक नहीं रही तो आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या तेजी से बढेगी. जनसत्ता
 
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
Post your comments
Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.